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Panipat News: गांव में प्रदूषण और नियमों के उल्लंघन पर रिपोर्ट तलब
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थर्मल/पानीपत। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के मुख्य बेंच ने खुखराना गांव में प्रदूषण और नियमों के उल्लंघन की रिपोर्ट तलब की है। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पिछले उल्लंघन में अब तक की कार्रवाई की समीक्षा की रिपोर्ट छह सप्ताह में देनी होगी। एनजीटी ने इस मामले में अगली सुनवाई 15 मई 2026 को तय की है। समिति की जांच में सामने आया कि खुखराना गांव की तरफ ग्रीन बेल्ट नहीं बनाई गई है।
जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने खुखराना गांव में नजदीक ही सीमेंट प्लांट से पर्यावरण प्रदूषण की समीक्षा की। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से एडवोकेट ने ट्रिब्यूनल को बताया कि 27 फरवरी 2025 को संयुक्त समिति को अंतरिम रिपोर्ट दी गई थी। इसमें प्लांट के भीतर प्रदूषण नियंत्रण मानकों की अनदेखी पाई गई थी।
सीमेंट प्लांट 34.6 एकड़ में है। इसमें नियमानुसार 11.72 एकड़ में ग्रीन बेल्ट होनी चाहिए थी। समिति की जांच में सामने आया कि खुखराना गांव की तरफ ग्रीन बेल्ट नहीं बनाई गई है। गांव में केवल 950 वर्गमीटर में ग्रीन बेल्ट का प्रस्ताव मिला। गांव की तरफ चहारदीवारी की ऊंचाई 10-12 फीट है। यह धूल को गांव की तरफ जाने से रोकने में पर्याप्त नहीं है। प्लांट परिसर में धूल दबाने के लिए ट्रैक्टर और टैंकरों के माध्यम से पानी का छिड़काव किया जा रहा है। पोंड ऐश हैंडलिंग और ट्रक पार्किंग में मिट्टी जमा रहती है। इसके समाधान के कोई प्रबंध नहीं किए गए हैं। एचएसवीपी ने नियमों का उल्लंघन मिलने के बाद भी प्लांट पर किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की। समिति ने रिपोर्ट में कहा कि संयुक्त समिति के निरीक्षण के समय प्लांट बंद था। ऐसे में सभी हिस्सों में निरीक्षण नहीं किया जा सका।
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जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने खुखराना गांव में नजदीक ही सीमेंट प्लांट से पर्यावरण प्रदूषण की समीक्षा की। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से एडवोकेट ने ट्रिब्यूनल को बताया कि 27 फरवरी 2025 को संयुक्त समिति को अंतरिम रिपोर्ट दी गई थी। इसमें प्लांट के भीतर प्रदूषण नियंत्रण मानकों की अनदेखी पाई गई थी।
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सीमेंट प्लांट 34.6 एकड़ में है। इसमें नियमानुसार 11.72 एकड़ में ग्रीन बेल्ट होनी चाहिए थी। समिति की जांच में सामने आया कि खुखराना गांव की तरफ ग्रीन बेल्ट नहीं बनाई गई है। गांव में केवल 950 वर्गमीटर में ग्रीन बेल्ट का प्रस्ताव मिला। गांव की तरफ चहारदीवारी की ऊंचाई 10-12 फीट है। यह धूल को गांव की तरफ जाने से रोकने में पर्याप्त नहीं है। प्लांट परिसर में धूल दबाने के लिए ट्रैक्टर और टैंकरों के माध्यम से पानी का छिड़काव किया जा रहा है। पोंड ऐश हैंडलिंग और ट्रक पार्किंग में मिट्टी जमा रहती है। इसके समाधान के कोई प्रबंध नहीं किए गए हैं। एचएसवीपी ने नियमों का उल्लंघन मिलने के बाद भी प्लांट पर किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की। समिति ने रिपोर्ट में कहा कि संयुक्त समिति के निरीक्षण के समय प्लांट बंद था। ऐसे में सभी हिस्सों में निरीक्षण नहीं किया जा सका।
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