{"_id":"5f0612178ebc3e6360136b0d","slug":"re-panipat-news-knl367320125","type":"story","status":"publish","title_hn":"पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने पर रिफाइनरी पर 642.18 करोड़ के हर्जाना की अनुसंशा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने पर रिफाइनरी पर 642.18 करोड़ के हर्जाना की अनुसंशा
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हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपनी जांच में रिफाइनरी को पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का दोषी पाते हुए 642.18 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने की अनुशंसा की है। पर्यावरण को पहुंचे नुकसान की भरपाई के लिए राशि की गणना कर बोर्ड ने रिपोर्ट नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) को सौंप दी है। अब रिफाइनरी पर कितना जुर्माना लगेेगा, इसका फैसला एनजीटी में लिया जाएगा।
रिफाइनरी पर गांव न्यू बोहली, सिंहपुरा, बोहली, सिठाना, ददलाना, रेर कलां, फरीदपुर, बाल जटान समेत रिफाइनरी के आस पास के क्षेत्र में भूजल को खराब करने और रिफाइनरी से निकलने वाली खतरनाक गैस से लोगों का स्वास्थ्य खराब करने के आरोप हैं। लगाए गए हर्जाने की राशि का प्रयोग रिफाइनरी क्षेत्र में स्वच्छ पर्यावरण को बढ़ावा देने के लिए किया जाएगा। टिब्यूनल ने रिफाइनरी में वायु और जल प्रदूषण फैलाने के मामले की जांच के लिए स्पेशल ज्वाइंट एक्शन कमिटी का गठन किया था। इससे पहले ट्रिब्यूनल ने पानीपत रिफाइनरी पर 17.31 करोड़ रुपये का जुर्माना किया था। जिसे रिफाइनरी ने भर दिया था। इस मामले में पानीपत रिफाइरी के अधिकारियों से संपर्क किया गया, लेकिन उनका पक्ष नहीं मिला। रिफाइनरी की ओर से इस मामले में पक्ष दिया जाएगा तो उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।
प्रशासन ने नहीं सुनी तो वर्ष 2018 में की एनजीटी पहुंचे सरपंच
प्रशासन ने शिकायत नहीं सुनी तो गांव सिठाना के सरपंच सत्यपाल ने प्रशासन के रवैये के खिलाफ 2018 में एनजीटी में शिकायत की। जिसके बाद ट्रिब्यूनल ने रिफाइनरी की कार्यप्रणाली की जांच के लिए पानीपत के डीसी की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया। कमेटी की लंबे समय से चल रही जांच में पानीपत रिफाइनरी वायु और जल प्रदूषण फैलाने की दोषी पाई गई।
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सीएसआईआर-नीरी और सीजीडब्ल्यू ने 659.49 करोड़ के हर्जाने की गणना की थी
सीएसआईआर-नीरी, केंद्रीय भूजल बोर्ड और डीसी की एक जांच कमेटी गठित की थी। जांच के बाद 659.49 करोड़ रुपये का हर्जाना लगाने की सिफारिश की। रिफाइनरी इस मामले में 17.31 करोड़ रुपये हर्जाने के रूप में जमा करा चुका है। अब 642.18 करोड़ रुपये का हर्जाना जमा कराना बाकी बताया जा रहा है।
पानी और हवा से इस तरह बढ़े बीमार
वर्ष पानी से लगने वाली बीमारी सांस संबंधी बीमारी
2015 198 1911
2016 60 2449
2017 436 505
2018 388 1157
2019 205 2495
ये है रिपोर्ट में
ऑक्सीजन में आई कमी एवं अवैध रूप से केमिकल युक्त पानी बहाने पर भूजल के दूषित होने पर क्षतिपूर्ति 26.90 करोड़ रुपये
लोगों के स्वास्थ्य एवं पर्यावरण की क्षतिपूर्ति: 92.59 करोड़ रुपये
भूजल को हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति 540 करोड़ रुपये
क्षतिपूर्ति की कुल राशि: 659.49 करोड़ रुपये
जांच में ये मिलीं कमियां
संयुक्त टीम ने रिफाइनरी और इसके 10 किलोमीटर के आसपास के क्षेत्र में भूजल की जांच कराई। यहां से 31 सैंपल भरे गए। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी साथ रहा। लैब से जांच रिपोर्ट चिंताजनक मिली। रिफाइनरी और इसके आसपास का पीएच 7.15 से 8.24 मिला। क्लोराइड 250 एमजी से नीचे मिला। खंडरा गांव के सरकारी स्कूल से लिए पानी के सैंपल में फ्लोराइड 0.36 एमजी प्रति लीटर रही।
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रिफाइनरी पर गांव न्यू बोहली, सिंहपुरा, बोहली, सिठाना, ददलाना, रेर कलां, फरीदपुर, बाल जटान समेत रिफाइनरी के आस पास के क्षेत्र में भूजल को खराब करने और रिफाइनरी से निकलने वाली खतरनाक गैस से लोगों का स्वास्थ्य खराब करने के आरोप हैं। लगाए गए हर्जाने की राशि का प्रयोग रिफाइनरी क्षेत्र में स्वच्छ पर्यावरण को बढ़ावा देने के लिए किया जाएगा। टिब्यूनल ने रिफाइनरी में वायु और जल प्रदूषण फैलाने के मामले की जांच के लिए स्पेशल ज्वाइंट एक्शन कमिटी का गठन किया था। इससे पहले ट्रिब्यूनल ने पानीपत रिफाइनरी पर 17.31 करोड़ रुपये का जुर्माना किया था। जिसे रिफाइनरी ने भर दिया था। इस मामले में पानीपत रिफाइरी के अधिकारियों से संपर्क किया गया, लेकिन उनका पक्ष नहीं मिला। रिफाइनरी की ओर से इस मामले में पक्ष दिया जाएगा तो उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।
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प्रशासन ने नहीं सुनी तो वर्ष 2018 में की एनजीटी पहुंचे सरपंच
प्रशासन ने शिकायत नहीं सुनी तो गांव सिठाना के सरपंच सत्यपाल ने प्रशासन के रवैये के खिलाफ 2018 में एनजीटी में शिकायत की। जिसके बाद ट्रिब्यूनल ने रिफाइनरी की कार्यप्रणाली की जांच के लिए पानीपत के डीसी की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया। कमेटी की लंबे समय से चल रही जांच में पानीपत रिफाइनरी वायु और जल प्रदूषण फैलाने की दोषी पाई गई।
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सीएसआईआर-नीरी और सीजीडब्ल्यू ने 659.49 करोड़ के हर्जाने की गणना की थी
सीएसआईआर-नीरी, केंद्रीय भूजल बोर्ड और डीसी की एक जांच कमेटी गठित की थी। जांच के बाद 659.49 करोड़ रुपये का हर्जाना लगाने की सिफारिश की। रिफाइनरी इस मामले में 17.31 करोड़ रुपये हर्जाने के रूप में जमा करा चुका है। अब 642.18 करोड़ रुपये का हर्जाना जमा कराना बाकी बताया जा रहा है।
पानी और हवा से इस तरह बढ़े बीमार
वर्ष पानी से लगने वाली बीमारी सांस संबंधी बीमारी
2015 198 1911
2016 60 2449
2017 436 505
2018 388 1157
2019 205 2495
ये है रिपोर्ट में
ऑक्सीजन में आई कमी एवं अवैध रूप से केमिकल युक्त पानी बहाने पर भूजल के दूषित होने पर क्षतिपूर्ति 26.90 करोड़ रुपये
लोगों के स्वास्थ्य एवं पर्यावरण की क्षतिपूर्ति: 92.59 करोड़ रुपये
भूजल को हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति 540 करोड़ रुपये
क्षतिपूर्ति की कुल राशि: 659.49 करोड़ रुपये
जांच में ये मिलीं कमियां
संयुक्त टीम ने रिफाइनरी और इसके 10 किलोमीटर के आसपास के क्षेत्र में भूजल की जांच कराई। यहां से 31 सैंपल भरे गए। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी साथ रहा। लैब से जांच रिपोर्ट चिंताजनक मिली। रिफाइनरी और इसके आसपास का पीएच 7.15 से 8.24 मिला। क्लोराइड 250 एमजी से नीचे मिला। खंडरा गांव के सरकारी स्कूल से लिए पानी के सैंपल में फ्लोराइड 0.36 एमजी प्रति लीटर रही।