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मांगों को लेकर ट्रेड यूनियनों ने सरकार का पुतला फूंक जताया रोष
ब्यूरो/अमर उजाला पानीपत।
Updated Fri, 01 Apr 2016 12:08 AM IST
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पानीपत
- फोटो : अमर उजाला
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सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन, एसकेएस, ऐटक ट्रेड यूनियनों ने सरकार द्वारा विधानसभा में मजदूर विरोधी काले कानूनों बारे श्रम संशोधन के खिलाफ सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन लागू करवाने, ठेकेदारी प्रथा पर रोक लगाने और श्रम कानूनों को सख्ती से लागू करवाने की मांग को लेकर, लघु सचिवालय में सरकार का पुतला फूंक विरोध प्रदर्शन किया। यूनियन ने पानीपत के उद्योगों में न्यूनतम वेतन व श्रम कानूनों को लागू करवाने के लिए डिप्टी लेबर कमीशन लिखित ज्ञापन सौंपा। वीरवार को प्रदर्शनकारी सीटू कार्यालय पर एकत्रित हुए। जहां से जुलूस की शक्ल में सरकार की मजदूर कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ नारे लगाते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। खट्टर सरकार होश में आए, पूंजीपति-उद्योगपतियों की दलाली बंद करो, विधानसभा में पेश विधेयक मजदूर विरोधी काले कानून, श्रम संशोधान वापस लो, इंकलाब जिंदाबाद, हर जोर जुल्म की टक्कर संघर्ष हमारा नारा है लगाकर रोष व्यक्त किया।
प्रदर्शन का नेतृत्व सीटू जिला प्रधान सुनील दत्त, सचिव आनंद ज्वारा, इंडस्ट्रीयल वर्कर्स यूनियन, पानीपत प्रधान जयभगवान, महेंद्र, एचएचएसके पुष्पेंद्र शर्मा, इटंक नेता महाबीर ने किया। उन्होंने कहा कि हरियाणा की खट्टर सरकार ने कल विधानसभा में विदेशी व देशी बड़े पूंजीपतियों उद्योगपतियों की लूट को तेज करने के लिए राजस्थान सरकार की तर्ज पर काले कानूनों का प्रस्ताव पेश किया। विधेयक के अनुसार अब 40 मजदूरों तक फैक्ट्री मालिकों को किसी भी प्रकार रिकार्ड रखने व श्रम कानूनों से मुक्त कर दिया। जिस फैक्ट्री में 300 मजदूर तक कार्य करते है। वो कभी भी बैगर सरकार की अनुमति के उद्योग बंद कर मजदूरों से उनकी नौकरी छिन सकते है। इंस्पेक्टरी राज का खात्मा, श्रम अधिकारी बैगर जांच करने का अधिकार नहीं होगा। सरकार ने मजदूरों को स्थाई तौर पर फैक्ट्री मालिकों को बंधुआ गुलाम बना दिया। इससे यूनियन पदाधिकारियों में रोष है। सभी श्रमिकों का आह्वान करते हुए सरकार के लिए एकजुट होकर संघर्ष तेज करने को कहा। इस मौके पर सुनील दत्त, जयभगवान समेत सैकड़ों मजदूर मौजूद रहे।
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प्रदर्शन का नेतृत्व सीटू जिला प्रधान सुनील दत्त, सचिव आनंद ज्वारा, इंडस्ट्रीयल वर्कर्स यूनियन, पानीपत प्रधान जयभगवान, महेंद्र, एचएचएसके पुष्पेंद्र शर्मा, इटंक नेता महाबीर ने किया। उन्होंने कहा कि हरियाणा की खट्टर सरकार ने कल विधानसभा में विदेशी व देशी बड़े पूंजीपतियों उद्योगपतियों की लूट को तेज करने के लिए राजस्थान सरकार की तर्ज पर काले कानूनों का प्रस्ताव पेश किया। विधेयक के अनुसार अब 40 मजदूरों तक फैक्ट्री मालिकों को किसी भी प्रकार रिकार्ड रखने व श्रम कानूनों से मुक्त कर दिया। जिस फैक्ट्री में 300 मजदूर तक कार्य करते है। वो कभी भी बैगर सरकार की अनुमति के उद्योग बंद कर मजदूरों से उनकी नौकरी छिन सकते है। इंस्पेक्टरी राज का खात्मा, श्रम अधिकारी बैगर जांच करने का अधिकार नहीं होगा। सरकार ने मजदूरों को स्थाई तौर पर फैक्ट्री मालिकों को बंधुआ गुलाम बना दिया। इससे यूनियन पदाधिकारियों में रोष है। सभी श्रमिकों का आह्वान करते हुए सरकार के लिए एकजुट होकर संघर्ष तेज करने को कहा। इस मौके पर सुनील दत्त, जयभगवान समेत सैकड़ों मजदूर मौजूद रहे।
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