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उत्पादन गिरा, एक हजार करोड़ रुपये का नुकसान
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पानीपत। पिछले एक माह से इंडस्ट्रियल एरिया में बिजली के पांच से छह घंटे के कट लग रहे हैं। ऐसे में इंडस्ट्री का उत्पादन 40 प्रतिशत तक कम हो गया है। उद्योगों को एक भी शिफ्ट में नियमित नहीं चल पा रहे। उद्यमियों को लेबर को बिना काम का वेतन भी देना पड़ रहा है। उद्यमी इस संबंध में बिजली निगम के एमडी से भी मिल चुके हैं बावजूद इसके कोई समाधान नहीं हुआ है। चैंबर ऑफ कॉमर्स के महासचिव मनीष अग्रवाल के अनुसार पिछले 15 दिन में पानीपत इंडस्ट्री को एक हजार करोड़ का नुकसान हो चुका है। उद्यमी बिजली कटों के कारण समय ऑर्डर पूरे नहीं कर पा रहे हैं। उद्यमियों को कटों की पहले से जानकारी नहीं दी जा रही है।
लाखों रुपये का फूंक चुके हैं तेल
बिजली की आपूर्ति सुचारू रूप से नहीं हो रही है। उत्पादन 50 प्रतिशत तक कम हो चुकी है। किसी भी शिफ्ट में उद्योग नियमित नहीं चल पा रहे हैं। 15 दिनों में लाखों रुपये का जेनरेटर में तेल फूंक चुके हैं। उत्पादन बहुत महंगा पड़ रहा है। सरकार से अपील है कि इंडस्ट्रियल एरिया में बिजली व्यवस्था सुधारी जाए। -भीम राणा, प्रधान डायर्स एसोसिएशन
कटों की सरकार पहले से दे जानकारी
पिछले 15 दिनों में पानीपत इंडस्ट्री को एक हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। काम न चलने के कारण लेबर को बिना काम के पैसे देने पड़ रहे हैं। पहले ग्रैप के कारण उद्योग बंद रहे अब बिजली आपूर्ति ठप होने के कारण उद्योग बंद हो रहे हैं। सरकार से मांग है कि उद्योगों को चलाने के लिए बिजली व्यवस्था सुधारी जाए। -मनीष अग्रवाल, महासचिव चैंबर ऑफ कॉमर्स
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आश्वासन मिला था, पर नहीं सुधरी व्यवस्था
पानीपत इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रधान प्रीतम सिंह ने भी बिजली कटों पर चिता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उन्हें आश्वासन दिया गया था कि सूचना एडवांस मिलेगी, लेकिन नहीं मिल रही। जो यूनिट रात को चलते थे वे पांच दिनों से नहीं चला पा रहे। दिन में ही काम हो रहा है। रात को अनिवार्य रूप से चलने वाले उद्योगों को पांच दिनों में एक लाख से अधिक का जेनरेटर में तेल फूंकना पड़ा है।
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लाखों रुपये का फूंक चुके हैं तेल
बिजली की आपूर्ति सुचारू रूप से नहीं हो रही है। उत्पादन 50 प्रतिशत तक कम हो चुकी है। किसी भी शिफ्ट में उद्योग नियमित नहीं चल पा रहे हैं। 15 दिनों में लाखों रुपये का जेनरेटर में तेल फूंक चुके हैं। उत्पादन बहुत महंगा पड़ रहा है। सरकार से अपील है कि इंडस्ट्रियल एरिया में बिजली व्यवस्था सुधारी जाए। -भीम राणा, प्रधान डायर्स एसोसिएशन
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कटों की सरकार पहले से दे जानकारी
पिछले 15 दिनों में पानीपत इंडस्ट्री को एक हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। काम न चलने के कारण लेबर को बिना काम के पैसे देने पड़ रहे हैं। पहले ग्रैप के कारण उद्योग बंद रहे अब बिजली आपूर्ति ठप होने के कारण उद्योग बंद हो रहे हैं। सरकार से मांग है कि उद्योगों को चलाने के लिए बिजली व्यवस्था सुधारी जाए। -मनीष अग्रवाल, महासचिव चैंबर ऑफ कॉमर्स
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आश्वासन मिला था, पर नहीं सुधरी व्यवस्था
पानीपत इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रधान प्रीतम सिंह ने भी बिजली कटों पर चिता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उन्हें आश्वासन दिया गया था कि सूचना एडवांस मिलेगी, लेकिन नहीं मिल रही। जो यूनिट रात को चलते थे वे पांच दिनों से नहीं चला पा रहे। दिन में ही काम हो रहा है। रात को अनिवार्य रूप से चलने वाले उद्योगों को पांच दिनों में एक लाख से अधिक का जेनरेटर में तेल फूंकना पड़ा है।