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Panipat News: बकरीद पर नमाज अदा कर अमन व शांति की दुआ की
Fri, 29 May 2026 01:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Fri, 29 May 2026 01:21 AM IST
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बकरीद पर मॉडल टाउन स्थित ईदगाह में एक दूसरे को बधाई को देते समुदाय के लोग। स्रोत : प्रबंधन
पानीपत। शहर समेत जिलेभर में ईद उल अजहा (बकरीद) पर दरगाह व ईदगाह पर सुबह नमाज अदा कर लोगों ने अमन और शांति के लिए दुआ की। ईदगाह में मुख्य नमाज सुबह 7:30 बजे अदा की गई। समुदाय के लोगों ने नमाज अदा कर एक-दूसरे को गले लगाकर बकरीद का शुभकामनाएं दी। नमाज अदा करने के लिए युवाओं के साथ बच्चों में काफी उत्साह देखने को मिला।
ईदगाह के मौलाना सादिक ने बताया कि ईदगाह में मुख्य नमाज सुबह 07:30 बजे अदा की गई और लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाया और अल्लाह से अमन और शांति के लिए प्रार्थना की। उन्होंने बताया कि यह पर्व त्याग, कुर्बानी और इंसानियत का संदेश देता है। इस दिन कुर्बानी का मतलब केवल जानवर की बलि देना नहीं बल्कि इंसान के अंदर मौजूद बुराइयों, लालच और अहंकार को खत्म करना भी है। यह पर्व जरूरतमंदों की मदद करने और समाज में भाईचारा बढ़ाने की सीख देता है।
बकरीद के उपलक्ष्य में वीरवार को अवकाश रहा और सभी ने मिलकर नमाज अदा कर सुख-शांतिस अमन व चैन की दुआ मांगी और एक-दूसरे को गले लगाकर बकरीद की बधाई दी। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने दरगाह व मस्जिद में खीर का भंडारा लगाया।
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मौलवियों ने खुले में कुर्बानी देने की मनाही की
मौलवियों ने बकरीद पर खुले में कुर्बानी देने पर मनाही की और लोगों को साफ-सफाई बनाए रखने और कुर्बानी के अवशेषों को उचित निस्तारण करने पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने कहा कि कुर्बानी का मतलब जानवर की बली देना नहीं बल्कि स्वयं के अंदर छिपी बुराइयों को खत्म करना है।
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ईदगाह के मौलाना सादिक ने बताया कि ईदगाह में मुख्य नमाज सुबह 07:30 बजे अदा की गई और लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाया और अल्लाह से अमन और शांति के लिए प्रार्थना की। उन्होंने बताया कि यह पर्व त्याग, कुर्बानी और इंसानियत का संदेश देता है। इस दिन कुर्बानी का मतलब केवल जानवर की बलि देना नहीं बल्कि इंसान के अंदर मौजूद बुराइयों, लालच और अहंकार को खत्म करना भी है। यह पर्व जरूरतमंदों की मदद करने और समाज में भाईचारा बढ़ाने की सीख देता है।
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बकरीद के उपलक्ष्य में वीरवार को अवकाश रहा और सभी ने मिलकर नमाज अदा कर सुख-शांतिस अमन व चैन की दुआ मांगी और एक-दूसरे को गले लगाकर बकरीद की बधाई दी। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने दरगाह व मस्जिद में खीर का भंडारा लगाया।
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मौलवियों ने खुले में कुर्बानी देने की मनाही की
मौलवियों ने बकरीद पर खुले में कुर्बानी देने पर मनाही की और लोगों को साफ-सफाई बनाए रखने और कुर्बानी के अवशेषों को उचित निस्तारण करने पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने कहा कि कुर्बानी का मतलब जानवर की बली देना नहीं बल्कि स्वयं के अंदर छिपी बुराइयों को खत्म करना है।

बकरीद पर मॉडल टाउन स्थित ईदगाह में एक दूसरे को बधाई को देते समुदाय के लोग। स्रोत : प्रबंधन