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मिक्सोपैथी कानून के खिलाफ आज भूख हड़ताल पर बैठेंगे निजी डॉक्टर
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मिक्सोपैथी कानून के खिलाफ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने दोबारा सड़कों पर उतरने का ऐलान कर दिया है। 10 फरवरी आईएमए ने भूख हड़ताल करने का फैसला किया है। 10 फरवरी को चिकित्सक अपने क्लीनिक-अस्पतालों को बंद रखेंगे। लघु सचिवालय के सामने (फ्लाईओवर के नीचे) भूख हड़ताल पर बैठेंगे। अगर सरकार ने जल्द इस पर फैसला नहीं लिया तो वो भी कड़े फैसले लेने पर मजबूर होंगे।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के जिला प्रधान डॉ. वेद प्रकाश ने बताया कि मिक्सोपैथी कानून में आयुष चिकित्सकों को भी 58 प्रकार की सर्जरी करने का अधिकार दे दिया है। एक अच्छा सर्जन बनने में पढ़ाई के बाद पांच-छह वर्ष का समय लग जाता है। सरकार आयुष के चिकित्सकों को दो साल का प्रशिक्षण देकर सर्जरी की अनुमति दे रही है। इससे एलोपैथी में प्रेक्टिस करने वाले चिकित्सकों का आर्थिक अहित होगा, मरीजों के जीवन से भी खिलवाड़ होगा। इसी के विरोध में 10 फरवरी को सुबह दस से शाम छह बजे तक अस्पताल-क्लीनिक बंद रखने का निर्णय लिया है। डीसी को प्रधानमंत्री और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपा जाएगा। सरकार को अपना फैसला वापस लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सर्जरी के लिए विज्ञान, अनुसंधान, उपकरण, गहन प्रशिक्षण की जरूरत है। शल्य प्रक्रिया में एनेस्थेटिक दवाओं की आवश्यकता होती है, जो एलोपैथिक हैं। प्रशिक्षित चिकित्सक (एनेस्थेटिक) केवल इन दवाओं का उपयोग कर सकते हैं। अब ये बात समझ से परे है कि आयुर्वेदकि डॉक्टर सर्जरी कैसे कर सकते हैं। सरकार को इस संबंध में कोई कड़ा कदम उठाना होगा। लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ ना किया जाए।
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सेंट्रल काउंसिल आफ इंडियन मेडिसिन ने आयुष के चिकित्सकों को 58 प्रकार के ऑपरेशन करने की अनुमति दी है। इनमें मोतियाबिंद, ईएनटी सर्जरी, कोशिकाओं की सर्जरी, ऑथोेपैडिक सर्जरी, यूरोलॉजी सर्जरी, स्त्री रोग प्रक्रिया, सामान्य सर्जरी, पेट-आंतों की लकीर और डेंटल प्रक्रियाओं सहित आधुनिक सर्जरी कर सकेंगे।
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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के जिला प्रधान डॉ. वेद प्रकाश ने बताया कि मिक्सोपैथी कानून में आयुष चिकित्सकों को भी 58 प्रकार की सर्जरी करने का अधिकार दे दिया है। एक अच्छा सर्जन बनने में पढ़ाई के बाद पांच-छह वर्ष का समय लग जाता है। सरकार आयुष के चिकित्सकों को दो साल का प्रशिक्षण देकर सर्जरी की अनुमति दे रही है। इससे एलोपैथी में प्रेक्टिस करने वाले चिकित्सकों का आर्थिक अहित होगा, मरीजों के जीवन से भी खिलवाड़ होगा। इसी के विरोध में 10 फरवरी को सुबह दस से शाम छह बजे तक अस्पताल-क्लीनिक बंद रखने का निर्णय लिया है। डीसी को प्रधानमंत्री और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपा जाएगा। सरकार को अपना फैसला वापस लेना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि सर्जरी के लिए विज्ञान, अनुसंधान, उपकरण, गहन प्रशिक्षण की जरूरत है। शल्य प्रक्रिया में एनेस्थेटिक दवाओं की आवश्यकता होती है, जो एलोपैथिक हैं। प्रशिक्षित चिकित्सक (एनेस्थेटिक) केवल इन दवाओं का उपयोग कर सकते हैं। अब ये बात समझ से परे है कि आयुर्वेदकि डॉक्टर सर्जरी कैसे कर सकते हैं। सरकार को इस संबंध में कोई कड़ा कदम उठाना होगा। लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ ना किया जाए।
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सेंट्रल काउंसिल आफ इंडियन मेडिसिन ने आयुष के चिकित्सकों को 58 प्रकार के ऑपरेशन करने की अनुमति दी है। इनमें मोतियाबिंद, ईएनटी सर्जरी, कोशिकाओं की सर्जरी, ऑथोेपैडिक सर्जरी, यूरोलॉजी सर्जरी, स्त्री रोग प्रक्रिया, सामान्य सर्जरी, पेट-आंतों की लकीर और डेंटल प्रक्रियाओं सहित आधुनिक सर्जरी कर सकेंगे।