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चातुर्मास में स्वाध्याय और संयम का करें अभ्यास : अरुण मुनि महाराज
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पानीपत। अरुण मुनि महाराज ने चातुर्मास प्रवचन सभा में चातुर्मास के आध्यात्मिक महत्व, जीवन के मूल्य और सत्य की खोज पर प्रकाश डाला। वे शुक्रवार को श्री वर्धमान श्वेतांबर स्थानक अग्रवाल मंडी स्थित जैन स्थानक में सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि चातुर्मास आत्मशुद्धि, संयम और साधना का अवसर होता है। इसलिए इस पावन काल का उपयोग आत्मचिंतन, स्वाध्याय और संयम के अभ्यास में करें।
उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने मानवता को जो सबसे कीमती धरोहर दी है वह है अपने अपने कर्मों के अनुसार जीवन जीना। यह केवल सांस लेने का साधन नहीं बल्कि आत्मा के उत्थान और कर्मों के बंधन से मुक्ति का साधन है।
जीवन एक यज्ञ है और इस यज्ञ में हमें अपने क्रोध, अहंकार, वासना जैसे विकारों की आहुति डालनी है। जो ऐसा करता है वही सत्य को प्राप्त करता है। प्रेम ही ध्यान है। प्रेम ही सामयिक है। प्रेम ही तप है और प्रेम ही सच्ची भक्ति है। जो आत्मा प्रेम से भर जाती है वह केवल 48 मिनट में भी जीवन की दिशा और दशा बदल सकती है। जिस साधु या श्रावक के पास मन की शांति और प्रेमभाव होता है वह संसार का सबसे अमीर व्यक्ति होता है। चाहे उसके पास भौतिक धन हो या न हो।
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जीवों पर भी रखें दया का भाव : श्रेयांश मुनि महाराज
राजाखेड़ी गांव स्थित जैन स्थानक में श्रेयांश मुनि महाराज ने प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को हमेशा दया की भावना रखनी चाहिए। उसे व्यक्ति के साथ जीवों पर भी दया रखनी चाहिए। तभी सृष्टि में तालमेल स्थापित होगा। आज व्यक्ति खुद तक सीमित है। यह बहुत की चिंतनीय है। लोगों को एक दूूसरे की भावनाओं को भी समझना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने मानवता को जो सबसे कीमती धरोहर दी है वह है अपने अपने कर्मों के अनुसार जीवन जीना। यह केवल सांस लेने का साधन नहीं बल्कि आत्मा के उत्थान और कर्मों के बंधन से मुक्ति का साधन है।
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जीवन एक यज्ञ है और इस यज्ञ में हमें अपने क्रोध, अहंकार, वासना जैसे विकारों की आहुति डालनी है। जो ऐसा करता है वही सत्य को प्राप्त करता है। प्रेम ही ध्यान है। प्रेम ही सामयिक है। प्रेम ही तप है और प्रेम ही सच्ची भक्ति है। जो आत्मा प्रेम से भर जाती है वह केवल 48 मिनट में भी जीवन की दिशा और दशा बदल सकती है। जिस साधु या श्रावक के पास मन की शांति और प्रेमभाव होता है वह संसार का सबसे अमीर व्यक्ति होता है। चाहे उसके पास भौतिक धन हो या न हो।
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जीवों पर भी रखें दया का भाव : श्रेयांश मुनि महाराज
राजाखेड़ी गांव स्थित जैन स्थानक में श्रेयांश मुनि महाराज ने प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को हमेशा दया की भावना रखनी चाहिए। उसे व्यक्ति के साथ जीवों पर भी दया रखनी चाहिए। तभी सृष्टि में तालमेल स्थापित होगा। आज व्यक्ति खुद तक सीमित है। यह बहुत की चिंतनीय है। लोगों को एक दूूसरे की भावनाओं को भी समझना चाहिए।