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Panipat News: पुराने उपकरण पर अभ्यास कर पूनम ने जिम्नास्टिक में जमाई धाक, 10 बार बनीं राष्ट्रीय चैंपियन
Sun, 18 Jan 2026 01:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Sun, 18 Jan 2026 01:22 AM IST
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पूनम, उत्तर रेलवे नई दिल्ली मुख्यालय में चीफ ऑफिस सुपरीटेंडेंट। स्वयं
अंबाला। सफलता सुविधाओं की मोहताज नहीं होती, बस मन में कुछ कर गुजरने का विश्वास होना चाहिए। इस कहावत को अंबाला की पूनम और सानिया सैनी ने सच कर दिखाया है। पूनम ने सुविधाओं के अभाव और पुराने उपकरणों के साथ अभ्यास कर जिम्नास्टिक की दुनिया में पहचान बनाई और 10 बार नेशनल चैंपियन बनीं।
पूनम वर्तमान में उत्तर रेलवे के नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में चीफ ऑफिस सुपरीटेंडेंट के पद पर सेवाएं दे रही हैं। वहीं दूसरी ओर सानिया की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने आर्थिक तंगी और अभावों को पछाड़कर जिम्नास्टिक में पहचान बनाई। खेतों में पसीना बहाया, बाइक चोरी हुई तो पैदल स्टेडियम गईं, अब डाक विभाग में अफसर बनकर जिम्मेदारी निभा रहीं हैं।
चोट लगने का रहता था डर
अंबाला निवासी पूनम ने बताया कि उन्होंने महज 10 साल की उम्र में जिम्नास्टिक की दुनिया में कदम रखा था। उस समय चुनौतियां बहुत थीं। उस दौरान जिम्नास्टिक हॉल में उपकरण काफी पुराने और अधूरे हुआ करते थे। अभ्यास के दौरान कई बार उपकरण अपनी जगह से निकल जाते थे, जिससे चोट लगने का डर बना रहता था। इन्हीं पुराने उपकरणों पर पसीना बहाते हुए पूनम एक बेहतरीन जिम्नास्ट बनकर उभरीं। उनकी मेहनत का ही नतीजा था कि उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में एक के बाद एक 10 स्वर्ण पदक जीतकर धाक जमाई। राष्ट्रीय स्तर पर लोहा मनवाने के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया और खेल जगत में प्रतिभा का प्रदर्शन किया। पूनम की उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें रेलवे में नौकरी मिली। वर्तमान में वह दिल्ली मुख्यालय में एक वरिष्ठ प्रशासनिक पद की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
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जिम्नास्टिक का जागा शौक
पिता अमरीक सैनी ने बताया कि सानिया जब महज पांच साल की थी, तब वह उसे लेकर स्टेडियम गए, बच्चों को कलाबाजी करते देख सानिया के मन में जिम्नास्टिक का ऐसा शौक जागा कि उसने इसी मैदान को अपनी कर्म भूमि बना लिया। घर के हालात ठीक नहीं थे, लेकिन पिता ने बेटी के सपनों के बीच कभी गरीबी को आने नहीं दिया। अमरीक सैनी खुद खेतों में काम करते थे और सानिया खेल के साथ-साथ खेतों में भी अपने पिता का हाथ बंटाती थी। इसी बीच एक दिन उनकी बाइक चोरी हो गई, जिससे स्टेडियम जाना दूभर हो गया। लेकिन पिता-पुत्री के इरादे नहीं डगमगाए। वह बस से कैंट बस अड्डे आते और वहां से स्टेडियम पैदल पहुंचते थे।
सानिया ने स्कूल और कॉलेज स्तर पर जिम्नास्टिक में पदकों की झड़ी लगा दी और नेशनल खिलाड़ी बनीं। उनकी इसी खेल प्रतिभा के दम पर पिछले साल उनका चयन भारतीय डाक विभाग में हुआ। वर्तमान में सानिया बिहार के गया में ब्रांच पोस्ट मास्टर के पद पर तैनात होकर परिवार और जिले का नाम रोशन कर रही हैं। सानिया की सफलता ने उसके छोटे भाई-बहनों के लिए भी रास्ता खोल दिया है। पिता अमरीक ने गर्व से बताया कि सानिया की छोटी बहन माफिया और छोटा भाई दक्ष भी जिम्नास्टिक के खिलाड़ी हैं और अपनी बहन के पदचिन्हों पर चलते हुए मेहनत कर रही हैं।
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पूनम वर्तमान में उत्तर रेलवे के नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में चीफ ऑफिस सुपरीटेंडेंट के पद पर सेवाएं दे रही हैं। वहीं दूसरी ओर सानिया की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने आर्थिक तंगी और अभावों को पछाड़कर जिम्नास्टिक में पहचान बनाई। खेतों में पसीना बहाया, बाइक चोरी हुई तो पैदल स्टेडियम गईं, अब डाक विभाग में अफसर बनकर जिम्मेदारी निभा रहीं हैं।
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चोट लगने का रहता था डर
अंबाला निवासी पूनम ने बताया कि उन्होंने महज 10 साल की उम्र में जिम्नास्टिक की दुनिया में कदम रखा था। उस समय चुनौतियां बहुत थीं। उस दौरान जिम्नास्टिक हॉल में उपकरण काफी पुराने और अधूरे हुआ करते थे। अभ्यास के दौरान कई बार उपकरण अपनी जगह से निकल जाते थे, जिससे चोट लगने का डर बना रहता था। इन्हीं पुराने उपकरणों पर पसीना बहाते हुए पूनम एक बेहतरीन जिम्नास्ट बनकर उभरीं। उनकी मेहनत का ही नतीजा था कि उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में एक के बाद एक 10 स्वर्ण पदक जीतकर धाक जमाई। राष्ट्रीय स्तर पर लोहा मनवाने के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया और खेल जगत में प्रतिभा का प्रदर्शन किया। पूनम की उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें रेलवे में नौकरी मिली। वर्तमान में वह दिल्ली मुख्यालय में एक वरिष्ठ प्रशासनिक पद की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
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जिम्नास्टिक का जागा शौक
पिता अमरीक सैनी ने बताया कि सानिया जब महज पांच साल की थी, तब वह उसे लेकर स्टेडियम गए, बच्चों को कलाबाजी करते देख सानिया के मन में जिम्नास्टिक का ऐसा शौक जागा कि उसने इसी मैदान को अपनी कर्म भूमि बना लिया। घर के हालात ठीक नहीं थे, लेकिन पिता ने बेटी के सपनों के बीच कभी गरीबी को आने नहीं दिया। अमरीक सैनी खुद खेतों में काम करते थे और सानिया खेल के साथ-साथ खेतों में भी अपने पिता का हाथ बंटाती थी। इसी बीच एक दिन उनकी बाइक चोरी हो गई, जिससे स्टेडियम जाना दूभर हो गया। लेकिन पिता-पुत्री के इरादे नहीं डगमगाए। वह बस से कैंट बस अड्डे आते और वहां से स्टेडियम पैदल पहुंचते थे।
सानिया ने स्कूल और कॉलेज स्तर पर जिम्नास्टिक में पदकों की झड़ी लगा दी और नेशनल खिलाड़ी बनीं। उनकी इसी खेल प्रतिभा के दम पर पिछले साल उनका चयन भारतीय डाक विभाग में हुआ। वर्तमान में सानिया बिहार के गया में ब्रांच पोस्ट मास्टर के पद पर तैनात होकर परिवार और जिले का नाम रोशन कर रही हैं। सानिया की सफलता ने उसके छोटे भाई-बहनों के लिए भी रास्ता खोल दिया है। पिता अमरीक ने गर्व से बताया कि सानिया की छोटी बहन माफिया और छोटा भाई दक्ष भी जिम्नास्टिक के खिलाड़ी हैं और अपनी बहन के पदचिन्हों पर चलते हुए मेहनत कर रही हैं।

पूनम, उत्तर रेलवे नई दिल्ली मुख्यालय में चीफ ऑफिस सुपरीटेंडेंट। स्वयं