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विधायक रविंद्र मछरौली हुए बीजेपी में शामिल
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समालखा के निर्दलीय विधायक रविंद्र मछरौली विधानसभा चुनाव से महज ढाई माह पहले भाजपा में शामिल हो गए है। उन्होंने चंडीगढ़ में सीएम मनोहर लाल के नेतृत्व में भगवा रंग का पटका पहना। उनके भाजपा में शामिल होने से भाजपा नेता शशिकांत कौशिक के सामने चुनौती खड़ी हो गई। शशिकांत कौशिक ने 2014 में भाजपा की टिकट पर ही चुनाव लड़ा था, लेकिन उनको रविंद्र मछरौली के हाथों हार का सामना करना पड़ा था, ऐसे में उनके लिए टिकट राह मुश्किल होती दिख रही है।
जानकारी के अनुसार शशिकांत कौशिक 2018 में इनेलो में शामिल हो गए थे। 2019 में वो दोबारा भाजपा में शामिल हो गए। वो फिलहाल अपनी मां व पत्नी के साथ मिलकर समालखा में डोर टू डोर अभियान चला रहे हैं। अब विधानसभा चुनाव में टिकट के लिए रविंद्र मछरौली व शशिकांत कौशिक में कड़ा मुकाबला है। शशिकांत कौशिक के लिए सकारात्मक पहलू ये है कि वो पुराने भाजपाई है और हरियाणा आला कमान में उनकी पकड़ है। रविंद्र मछरौली भाजपा में शामिल अब हुए है। उनको टिकट मिलने पर भाजपा में कलह बढ़ सकती है। वहीं रविंद्र मछरौली का कहना है कि वो भाजपा में निष्ठा रखते हैं। वो भाजपा की नीतियों से प्रभावित होकर भाजपा में शामिल हुए है। भाजपा देश का हित सोचने व गरीबों की हितैषी पार्टी है।
कांग्रेस के नेताओं की टिकट उनके आकाओं पर निर्भर
गुटों में बंटी कांग्रेस के स्थानीय नेता अपने स्तर पर लोगों के बीच पहुंचकर पार्टी को मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं। पानीपत ग्रामीण में हुडा खेमे के नेता खामोश है जबकि अशोक तंवर गुट के नेता उत्साहित है और वो फील्ड में काम कर रहे हैं। किस नेता को ग्रामीण से टिकट मिलेगी ये उनके आका के वर्चस्व पर निर्भर करता है। फिलहाल ग्रामीण में पूर्व मंत्री बिजेंद्र सिंह बिल्लू व कांग्रेस प्रवक्ता ओमबीर पंवार मजबूत नजर आ रहे है। जबकि 2014 में चुनाव लड़ चुके खुशीराम जागलान सक्रिय नहीं है।
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इनेलो के पास मजबूत उम्मीदवारों की कमी
इनेलो व जजपा में फूट के बाद इनेलो कमजोर हुई है। पानीपत शहरी व समालखा में इनेलो के पास कोई उम्मीदवार नजर नहीं आता। जबकि पानीपत ग्रामीण में भी एक दुक्का नेता ही सक्रिय है। वहीं जजपा पानीपत में पूर्ण रूप से पूर्व स्पीकर सतबीर कादियान पर निर्भर होती नजर आ रही है।
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जानकारी के अनुसार शशिकांत कौशिक 2018 में इनेलो में शामिल हो गए थे। 2019 में वो दोबारा भाजपा में शामिल हो गए। वो फिलहाल अपनी मां व पत्नी के साथ मिलकर समालखा में डोर टू डोर अभियान चला रहे हैं। अब विधानसभा चुनाव में टिकट के लिए रविंद्र मछरौली व शशिकांत कौशिक में कड़ा मुकाबला है। शशिकांत कौशिक के लिए सकारात्मक पहलू ये है कि वो पुराने भाजपाई है और हरियाणा आला कमान में उनकी पकड़ है। रविंद्र मछरौली भाजपा में शामिल अब हुए है। उनको टिकट मिलने पर भाजपा में कलह बढ़ सकती है। वहीं रविंद्र मछरौली का कहना है कि वो भाजपा में निष्ठा रखते हैं। वो भाजपा की नीतियों से प्रभावित होकर भाजपा में शामिल हुए है। भाजपा देश का हित सोचने व गरीबों की हितैषी पार्टी है।
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कांग्रेस के नेताओं की टिकट उनके आकाओं पर निर्भर
गुटों में बंटी कांग्रेस के स्थानीय नेता अपने स्तर पर लोगों के बीच पहुंचकर पार्टी को मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं। पानीपत ग्रामीण में हुडा खेमे के नेता खामोश है जबकि अशोक तंवर गुट के नेता उत्साहित है और वो फील्ड में काम कर रहे हैं। किस नेता को ग्रामीण से टिकट मिलेगी ये उनके आका के वर्चस्व पर निर्भर करता है। फिलहाल ग्रामीण में पूर्व मंत्री बिजेंद्र सिंह बिल्लू व कांग्रेस प्रवक्ता ओमबीर पंवार मजबूत नजर आ रहे है। जबकि 2014 में चुनाव लड़ चुके खुशीराम जागलान सक्रिय नहीं है।
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इनेलो के पास मजबूत उम्मीदवारों की कमी
इनेलो व जजपा में फूट के बाद इनेलो कमजोर हुई है। पानीपत शहरी व समालखा में इनेलो के पास कोई उम्मीदवार नजर नहीं आता। जबकि पानीपत ग्रामीण में भी एक दुक्का नेता ही सक्रिय है। वहीं जजपा पानीपत में पूर्ण रूप से पूर्व स्पीकर सतबीर कादियान पर निर्भर होती नजर आ रही है।