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Panipat News: परिवहन सुविधा के नाम पर स्कूली बच्चों से खिलवाड़
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निजी वाहनों में स्कूल जाते बच्चे। संवाद
- फोटो : पिटाई से घायल बिजली कर्मचारी विवेक मिश्रा।
पानीपत। शहर के स्कूलों में परिवहन सुविधा के नाम पर बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड़ की जा रहर है। बच्चे स्कूलों द्वारा लगाई गई ऑटो व ई-रिक्शा में सवार होकर स्कूलों में पहुंचते हैं, इससे लटक कर स्कूल पहुंचने वाले बच्चों को हादसे का खतरा सताता है। बसों व वैन में भी सुरक्षा के व्यापक प्रबंध नहीं किए गए हैं। स्कूलों में बच्चों की आवाजाही के लिए ट्रांसपोर्ट की बेहतर व्यवस्था नहीं की गई है।
शहर में स्कूलों की परिवहन सुविधाओं की मैदान पर जाकर पड़ताल की। स्कूलों में जाने वाले बच्चों को ठंड में खुली ऑटो व ई-रिक्शा में स्कूल ले जाया जाता है। साथ ही उन्हें वहां से घर भी छोड़ा जाता है। टीम द्वारा जांच के दौरान बच्चे ऑटो व रिक्शा और स्कूल बसों में लटक कर यात्रा करते नजर आए। इस तरह के ट्रांसपोर्ट के कारण बच्चों के साथ किसी भी समय हादसा हो सकता है। ऑटो व ई-रिक्शा में आवाजाही में वह चोटिल हो सकते है। निजी स्कूलों में बच्चों को तीन पहिया ऑटो व ई-रिक्शा पर निर्भर होना पड़ता है, इसको लेकर अभिभावकों द्वारा कई बार स्कूल प्रशासन को बेहतर ट्रांसपोर्ट सुविधा उपलब्ध कराने के लिए मांग की गई लेकिन स्कूल प्रशासन की ओर से कोई राहत कार्य नहीं किया गया है, इससे समस्या पहले की तरह बनी हुई है। ऑटो व ई-रिक्शा में यात्रा के दौरान कई बार बच्चे चोटिल भी हो चुके है।
अभिभावक बोले- मजबूरी का फायदा उठा रहे
जैन मोहल्ला के रमेश ने बताया कि उनका बेटा असंध रोड स्थित एक निजी स्कूल में पढ़ता है। एक प्राइवेट वैन से बेटा स्कूल आता-जाता है, इसमें इतनी व्यवस्था नहीं है और वैन चालक भी अपनी कमाई के लिए अपेक्षा से अधिक बच्चे लेकर जाते हैं। तहसील कैंप के निरंजन ने बताया कि स्कूल बसों में पर्याप्त सुविधा नहीं हैं, ऐसे में मजबूरीवश बच्चों को भेजा पड़ता है।
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स्कूलों में बेहतर ट्रांसपोर्ट व्यवस्था के लिए स्कूली प्रशासन को अवगत कराया गया है। ट्रांसपोर्ट व्यवस्था में कमी होने पर संबंधित स्कूल प्रशासन पर कार्रवाई करने के प्रावधान है।
- राकेश बूरा जिला शिक्षा अधिकारी।
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शहर में स्कूलों की परिवहन सुविधाओं की मैदान पर जाकर पड़ताल की। स्कूलों में जाने वाले बच्चों को ठंड में खुली ऑटो व ई-रिक्शा में स्कूल ले जाया जाता है। साथ ही उन्हें वहां से घर भी छोड़ा जाता है। टीम द्वारा जांच के दौरान बच्चे ऑटो व रिक्शा और स्कूल बसों में लटक कर यात्रा करते नजर आए। इस तरह के ट्रांसपोर्ट के कारण बच्चों के साथ किसी भी समय हादसा हो सकता है। ऑटो व ई-रिक्शा में आवाजाही में वह चोटिल हो सकते है। निजी स्कूलों में बच्चों को तीन पहिया ऑटो व ई-रिक्शा पर निर्भर होना पड़ता है, इसको लेकर अभिभावकों द्वारा कई बार स्कूल प्रशासन को बेहतर ट्रांसपोर्ट सुविधा उपलब्ध कराने के लिए मांग की गई लेकिन स्कूल प्रशासन की ओर से कोई राहत कार्य नहीं किया गया है, इससे समस्या पहले की तरह बनी हुई है। ऑटो व ई-रिक्शा में यात्रा के दौरान कई बार बच्चे चोटिल भी हो चुके है।
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अभिभावक बोले- मजबूरी का फायदा उठा रहे
जैन मोहल्ला के रमेश ने बताया कि उनका बेटा असंध रोड स्थित एक निजी स्कूल में पढ़ता है। एक प्राइवेट वैन से बेटा स्कूल आता-जाता है, इसमें इतनी व्यवस्था नहीं है और वैन चालक भी अपनी कमाई के लिए अपेक्षा से अधिक बच्चे लेकर जाते हैं। तहसील कैंप के निरंजन ने बताया कि स्कूल बसों में पर्याप्त सुविधा नहीं हैं, ऐसे में मजबूरीवश बच्चों को भेजा पड़ता है।
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स्कूलों में बेहतर ट्रांसपोर्ट व्यवस्था के लिए स्कूली प्रशासन को अवगत कराया गया है। ट्रांसपोर्ट व्यवस्था में कमी होने पर संबंधित स्कूल प्रशासन पर कार्रवाई करने के प्रावधान है।
- राकेश बूरा जिला शिक्षा अधिकारी।

निजी वाहनों में स्कूल जाते बच्चे। संवाद- फोटो : पिटाई से घायल बिजली कर्मचारी विवेक मिश्रा।