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Panipat News: नई वार्डबंदी से बढ़ सकती हैं लोगों की परेशानी, बदलाव न करने की मांग
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पानीपत।निकाय चुनाव को लेकर तैयार की जा रही नई वार्डबंदी में सबसे बड़ा मुद्दा शहरी और ग्रामीण विधानसभा के वार्डों को अलग करने का है। अगर इनको अलग अलग किया गया तो एक बार फिर से निगम क्षेत्र के लोगों के सामने बड़ी परेशानी और चुनौती खड़ी हो सकती हैं। इसलिए वार्डों की पुरानी सीमा को ही ज्यों की त्यों रखने के लिए लोगों के साथ निवर्तमान पार्षद विरोध में आगे आ गए हैं। वे लोगों के साथ डीसी से भी मिलने की तैयारी में हैं। इसके लिए कई वार्डों में हस्ताक्षर अभियान तक चलाने को तैयार हैं। उनका मानना है कि दोनों विधानसभा के क्षेत्र अलग किए तो लोगों को परेशानी का आ सकती है। वे नई वार्डबंदी पर नियमानुसार आपत्ति भी लगाएंगे।
निवर्तमान पार्षदों का कहना है कि जब नगर निगम की सीमा एक है और इसी सीमा में शहरी और ग्रामीण विधानसभा के वार्ड आते हैं तो दोनों विधानसभाओं की सीमा बांटने से कोई बड़ा लाभ नहीं होगा। बल्कि इससे परेशानी बढ़ जाएगी। एक बार फिर से तबदील किए जाने वाले वार्डों के लोगों को अपने प्रमाण पत्र में रिहायशी पते बदलवाने पड़ेंगे। इसके साथ सभी वार्डों में लगे कॉलोनियों के नामों के साइन बोर्ड तक बदले जाएंगे। पिछले चुनाव की तरह लोग भ्रमित होंगे कि उनका वार्ड किस एरिया में आता है और उनको वोटिंग करने के लिए किस बूथ या वार्ड के उम्मीदवारों को वोट करनी है।
सबसे बड़ा फर्क उन जनप्रतिनिधियों के लिए भी है जिन्होंने पिछले पांच साल में अपने वार्डों में करोड़ों रुपये के काम करवाए हैं। अपनी राजनीतिक पैठ लोगों में बनाई है। अगर वे एरिया उनके वार्ड से कट जाते हैं तो उनको बड़े वोट बैंक का नुकसान होगा वहीं, नया वोट बैंक जोड़ने के लिए फिर से कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी।
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बोले जनप्रतिनिधि:
अगर वार्डों की सीमा बदली तो नए वार्ड में शामिल होने वाले सभी लोगों के दस्तावेजों में भी तबदीली होगी। लोग वोट करने तक के लिए भ्रमित होंगे। इसलिए अच्छा यही रहेगा कि सीमाएं न बदली जाएं।
चंचल डावर, निवर्तमान पार्षद, वार्ड 22
हमारे वार्ड के लोग दूसरे वार्ड में शामिल होना ही नहीं चाहते। अब तक सैकड़ों लोग इसकी शिकायत कर चुके हैं। नई वार्डबंदी पर लोगों की सहमति नहीं हुई तो डीसी से मिलकर इस समस्या का हल करवाया जाएगा।
अंजलि शर्मा, निवर्तमान पार्षद वार्ड 03
सभी पार्षदों ने मिलकर अपने अपने वार्डों में विकास कार्य करवाए हैं। लोगों के साथ उनकी संवेदनाएं जुड़ी हैं। अब लोग नहीं चाहते कि उनके एरिया को काट कर दूसरे में जोड़ा जाए। इससे मौजूदा वोट बैंक का नुकसान हो सकता है और नया वोट बैंक जोड़ने में चुनौती खड़ी होगी।
संजीव दहिया, निवर्तमान पार्षद, वार्ड 21
जहां ज्यादा जरूरी है केवल उसी एरिया या बूथ को ही नई वार्डबंदी में जोड़ा जाए। अनावश्यक बदलाव लोगों को परेशान कर सकते हैं। जनहित को देखते हुए नई वार्डबंदी पर अमल किया जाएगा।
कोमल सैनी, निवर्तमान पार्षद वार्ड 11
वर्जन:
अभी वार्डबंदी की प्रक्रिया चल रही है। ड्रॉफ्ट तैयार होने के बाद इसे सार्वजनिक भी किया जाएगा और नियमानुसार लोगों से आपत्तियां भी मांगी जाएगी। इसके बाद ही फाइनल वार्डबंदी को लागू किया जाएगा।
वीरेंद्र मलिक, एमई, नगर निगम।
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निवर्तमान पार्षदों का कहना है कि जब नगर निगम की सीमा एक है और इसी सीमा में शहरी और ग्रामीण विधानसभा के वार्ड आते हैं तो दोनों विधानसभाओं की सीमा बांटने से कोई बड़ा लाभ नहीं होगा। बल्कि इससे परेशानी बढ़ जाएगी। एक बार फिर से तबदील किए जाने वाले वार्डों के लोगों को अपने प्रमाण पत्र में रिहायशी पते बदलवाने पड़ेंगे। इसके साथ सभी वार्डों में लगे कॉलोनियों के नामों के साइन बोर्ड तक बदले जाएंगे। पिछले चुनाव की तरह लोग भ्रमित होंगे कि उनका वार्ड किस एरिया में आता है और उनको वोटिंग करने के लिए किस बूथ या वार्ड के उम्मीदवारों को वोट करनी है।
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सबसे बड़ा फर्क उन जनप्रतिनिधियों के लिए भी है जिन्होंने पिछले पांच साल में अपने वार्डों में करोड़ों रुपये के काम करवाए हैं। अपनी राजनीतिक पैठ लोगों में बनाई है। अगर वे एरिया उनके वार्ड से कट जाते हैं तो उनको बड़े वोट बैंक का नुकसान होगा वहीं, नया वोट बैंक जोड़ने के लिए फिर से कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी।
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बोले जनप्रतिनिधि:
अगर वार्डों की सीमा बदली तो नए वार्ड में शामिल होने वाले सभी लोगों के दस्तावेजों में भी तबदीली होगी। लोग वोट करने तक के लिए भ्रमित होंगे। इसलिए अच्छा यही रहेगा कि सीमाएं न बदली जाएं।
चंचल डावर, निवर्तमान पार्षद, वार्ड 22
हमारे वार्ड के लोग दूसरे वार्ड में शामिल होना ही नहीं चाहते। अब तक सैकड़ों लोग इसकी शिकायत कर चुके हैं। नई वार्डबंदी पर लोगों की सहमति नहीं हुई तो डीसी से मिलकर इस समस्या का हल करवाया जाएगा।
अंजलि शर्मा, निवर्तमान पार्षद वार्ड 03
सभी पार्षदों ने मिलकर अपने अपने वार्डों में विकास कार्य करवाए हैं। लोगों के साथ उनकी संवेदनाएं जुड़ी हैं। अब लोग नहीं चाहते कि उनके एरिया को काट कर दूसरे में जोड़ा जाए। इससे मौजूदा वोट बैंक का नुकसान हो सकता है और नया वोट बैंक जोड़ने में चुनौती खड़ी होगी।
संजीव दहिया, निवर्तमान पार्षद, वार्ड 21
जहां ज्यादा जरूरी है केवल उसी एरिया या बूथ को ही नई वार्डबंदी में जोड़ा जाए। अनावश्यक बदलाव लोगों को परेशान कर सकते हैं। जनहित को देखते हुए नई वार्डबंदी पर अमल किया जाएगा।
कोमल सैनी, निवर्तमान पार्षद वार्ड 11
वर्जन:
अभी वार्डबंदी की प्रक्रिया चल रही है। ड्रॉफ्ट तैयार होने के बाद इसे सार्वजनिक भी किया जाएगा और नियमानुसार लोगों से आपत्तियां भी मांगी जाएगी। इसके बाद ही फाइनल वार्डबंदी को लागू किया जाएगा।
वीरेंद्र मलिक, एमई, नगर निगम।