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संशोधित: हरेरा के आदेशों की अनदेखी, अब तक नहीं हुई लोगों के विला व फ्लैट की रजिस्ट्री, एल्डिको कार्यालय पर जड़ा ताला
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पानीपत। एल्डिको निवासी सालों से अपने फ्लैट व विला के लिए संघर्ष कर रहे हैं। एल्डिको फेस थ्री में अब तक बिजली फीडर नहीं लगा है। लोग यहां फ्लैट की फुल पेमेंट भी कर चुके हैं। हरेरा ने 45 दिन पहले एल्डिको को फटकार लगाते हुए फ्लैट व विला धारकों की रजिस्टरी के निर्देश दिए थे। अब तक रजिस्ट्री शुरू नहीं हुई है। अब कंपनी ने दूसरी आवासीय कंपनी के लोगों को आन जाने के लिए सोसायटी के बीच से रास्ता दिया है। इसका लोग विरोध कर रहे हैं। दूसरी ओर लोग एल्डिको के मनमाने मैनटेनेंस के चार्ज से भी परेशान है। लोगों ने रविवार को एल्डिको के गेट पर कंपनी के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया। लोगों ने एल्डिको के दोनों गेट पर ताला जड़ दिया। अब यहां के लोगों ने एल्डिको के खिलाफ बेमियादी धरना शुरू कर दिया है।
हरेरा ने एल्डिको को आदेश देते हुए कहा था कि 45 दिन के भीतर सभी विला और प्लॉट मालिकों की रजिस्ट्री करवाई जाए। 90 दिन में इन्हें कब्जा नहीं देने पर 9.80 प्रतिशत ब्याज देने के भी निर्देश दिए थे। एल्डिको का अपनी दलीलों में मत था कि उनके पास ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट नहीं है। इस पर हरेरा का कहना था कि बिना ओसी के रजिस्ट्री हो सकती है।
पीड़ित एडवोकेट सचिन मिगलानी ने बताया कि पीड़ित अंकित मित्तल, सरोज, राखी तोमर, संजय कुमार, विकास चौधरी और विकास बख्शी ने 2015 से 2017 के बीच एल्डिको कंपनी से फ्लैट, विला व प्लॉट की खरीद की थी। एल्डिको कंपनी ने उनसे फ्लैट, विला, प्लॉट का पूरा भुगतान प्रदेश सरकार द्वारा तय गए गए टैक्स व जीएसटी के साथ वसूला। इसके बावजूद एल्डिको कंपनी ने फ्लैट व विला की रजिस्टरी नहीं करवाई। वहीं प्लॉट का पूरा भुगतान लेने के बाद भी इनके मालिकों को कब्जा नहीं दिया। कब्जा नहीं मिलने के कारण मालिक अपने प्लॉट पर मकान नहीं बना पा रहे और किराए के घरों में रहने को मजबूर हैं। प्लॉट धारकों का कहना है कि जब कंपनी की रजिस्टरी करवाने की तारीख नजदीक आई तो तमाम लोग एल्डिको में ही किराए के मकानों में रहने लगे, ताकि अपनी देखरेख में मकान बना सकें, लेकिन अब तक न तो रजिस्टरी हुई, न ही कब्जा मिला। चेतावनी दी कि अगर जल्द फ्लैट व विला की रजिस्टरी न हुई तो वे बेमियादी धरना प्रदर्शन करेंगे।
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हरेरा ने एल्डिको को आदेश देते हुए कहा था कि 45 दिन के भीतर सभी विला और प्लॉट मालिकों की रजिस्ट्री करवाई जाए। 90 दिन में इन्हें कब्जा नहीं देने पर 9.80 प्रतिशत ब्याज देने के भी निर्देश दिए थे। एल्डिको का अपनी दलीलों में मत था कि उनके पास ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट नहीं है। इस पर हरेरा का कहना था कि बिना ओसी के रजिस्ट्री हो सकती है।
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पीड़ित एडवोकेट सचिन मिगलानी ने बताया कि पीड़ित अंकित मित्तल, सरोज, राखी तोमर, संजय कुमार, विकास चौधरी और विकास बख्शी ने 2015 से 2017 के बीच एल्डिको कंपनी से फ्लैट, विला व प्लॉट की खरीद की थी। एल्डिको कंपनी ने उनसे फ्लैट, विला, प्लॉट का पूरा भुगतान प्रदेश सरकार द्वारा तय गए गए टैक्स व जीएसटी के साथ वसूला। इसके बावजूद एल्डिको कंपनी ने फ्लैट व विला की रजिस्टरी नहीं करवाई। वहीं प्लॉट का पूरा भुगतान लेने के बाद भी इनके मालिकों को कब्जा नहीं दिया। कब्जा नहीं मिलने के कारण मालिक अपने प्लॉट पर मकान नहीं बना पा रहे और किराए के घरों में रहने को मजबूर हैं। प्लॉट धारकों का कहना है कि जब कंपनी की रजिस्टरी करवाने की तारीख नजदीक आई तो तमाम लोग एल्डिको में ही किराए के मकानों में रहने लगे, ताकि अपनी देखरेख में मकान बना सकें, लेकिन अब तक न तो रजिस्टरी हुई, न ही कब्जा मिला। चेतावनी दी कि अगर जल्द फ्लैट व विला की रजिस्टरी न हुई तो वे बेमियादी धरना प्रदर्शन करेंगे।
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