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Panipat News: जहरीला दूध, मावा और पनीर खा रहे लोग, उत्पादन से तीन गुना खपत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 06 Jun 2023 11:55 PM IST
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People eating poisonous milk, mawa and paneer, consuming three times the production
जगमहेंद्र सरोहा
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पानीपत। पानीपत और प्रदेश के लोग आजकल मिलावटी ही नहीं, जहरीला दूध, दही, मावा और पनीर खा रहे हैं। शहर सहित जिले में हर रोज शुद्धता की गारंटी देकर करीब 10 लाख लीटर दूध की खपत की जा रहा है। इसके अलावा मावा और पनीर में इससे भी ज्यादा मिलावट है।
शहर के कई स्थानों पर यूरिया और केमिकल का प्रयोग कर आसानी से दूध और इसके उत्पाद तैयार कर लेते हैं। इसमें एक या दो व्यक्ति नहीं बल्कि पूरी चेन काम कर रही है। खाद्य सुरक्षा विभाग की सीजन में अब तक सैंपलिंग की ऐसी कोई बड़ी कार्रवाई नहीं कर पाया है। सैंपल रिपोर्ट आने तक दूध या इसके उत्पाद हजम हो जाते हैं।
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आज विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस है। लोगों की सेहत से जुड़ा गंभीर मुद्दे पर कई बार सवाल उठ चुके हैं। दूध और इससे बनने वाले उत्पाद मावा और पनीर की शुद्धता का पता लगाने के लिए कई जगह पड़ताल की। यहां दूध और इससे बनने वाले उत्पादों में मिलावट साफ मिली। इसके अलावा कई जगह केमिकल और अन्य पदार्थों की मदद से दूध तैयार करने की रिपोर्ट मिली। कुटानी रोड पर पहलवान चौक के नजदीक एक मकान में दूध और मावे का काम चलता है।
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यहां दिखावे के नाम पर कुछ भैंस व गाय भी रखी हैं। इसके बाहर पर्दा लगाया गया है। पड़ोस के लोगों का कहना है कि डेयरी से बड़ी मात्रा में दूध सप्लाई किया जाता है। सनौली रोड पर राम मंदिर के नजदीक मावा व पनीर की सप्लाई की जाती है। उसकी सबसे बड़ी खपत एक होटल पर है। वह मात्र 130 रुपये किलोग्राम पनीर सप्लाई करता है। इस रोड पर हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में गिफ्ट शॉप की दुकान की आड़ में मावा व पनीर तैयार किया जाता है।

गर्मी में दूध का उत्पादन घटा, मांग बढ़ी
गर्मी शुरू होते ही दूध का उत्पादन एक साथ गिर गया है। गांवों व कॉलोनियों में भैंस या गाय रखने वाले लोग भी बाहर से दूध लेने को मजबूर हैं। पशुपालन और डेयरी विभाग के अनुसार जिले में 2.35 लाख गाय और भैंस हैं। इनमें 60 प्रतिशत ही दूध देने वाले हैं। असंध रोड स्थित दो बड़ी डेयरियों में सुबह व शाम के समय दूध लेने वालों की लंबी लाइन लग जाती है। यहां हर रोज लाखों लीटर दूध की खपत हो रही है। इनसे कई जगह आगे भी दूध, दही, मावा व पनीर सप्लाई किया जाता है।

देरी से आती है सैंपल रिपोर्ट, कार्रवाई में भी महीनों
खाद्य सुरक्षा विभाग सैंपल लेकर लैब में जांच को भेजता है। यहां से रिपोर्ट आने में समय लगता है। विभाग ने पिछले एक साल में 270 सैंपल लिए हैं। इनमें 87 सैंपल फेल आए हैं। विभाग हर महीने 30 से 35 सैंपल लेने का दावा भी करता है। पिछले दिनों सीएम फ्लाइंग की टीम ने आइसक्रीम के तीन स्थानों से सैंपल लिए थे। इनकी रिपोर्ट 15 से 20 दिन में आएगी।

ढाबे के सैंपल फेल आने पर डेढ़ लाख का जुर्माना
खाद्य सुरक्षा विभाग ने पिछले दिनों समालखा में जीटी रोड स्थित एक टाबे से सैंपल भरे थे। जांच में सैंपल फेल मिले। यह सब स्टैंडर्ड कैटेगरी में आया था। इसका मामला एडीसी के पास सुनवाई के लिए पहुंचा। एडीसी ने ढाबा संचालक पर डेढ़ लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

तीन कैटेगरी में होती है मिलावट पर कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार खाद्य पदार्थ में मिलावट पर तीन कैटेगरी कार्रवाई की जाएगी। किसी उत्पाद में केमिकल मिलने पर वह अनसेफ कैटेगरी में आती है। ये मामले सीजेएम कोर्ट में चलते हैं। इसमें दोषी को चार वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। दूसरी कैटेगरी मिस ब्रांड और तीसरी सब स्टैंडर्ड में आती हैं। इन दोनों कैटेगरी के केसों की सुनवाई एडीसी के पास होती है।



वर्जन :
खाद्य वस्तुओं को लेकर लोगों को जागरूक भी किया जाता है। इसके साथ सैंपल भी लिए जाते हैं। पिछले दिनों सीएम फ्लाइंग के साथ आइसक्रीम के सैंपल लिए थे। इनकी जांच रिपोर्ट 20 दिन में आएगी। इसके आधार पर आगामी कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. जोगिंद्र, एफएसओ, पानीपत।
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