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Panipat News: पार्क अस्पताल प्रबंधन के पुलिस कार्रवाई पर सवाल, कहा-बिना जांच प्राथमिकी दर्ज करना गलत
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प्रेसवार्ता में एसपी को लिखा पत्र दिखाती पार्क अस्पताल की सीईओ सपना भांभरी। संवाद
माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। पार्क अस्पताल में उपचार के दौरान महिला की मौत के मामले में अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। प्रबंधन का कहना है कि विशेषज्ञों की राय लिए बिना डॉक्टर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करना नियमों के विपरीत है। इस संबंध में अस्पताल की ओर से पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर प्राथमिकी रद्द करने की मांग की गई है।
अस्पताल प्रबंधन ने आरोप लगाया कि महिला के परिजन पैसे के लिए दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं। प्रबंधन ने दावा किया कि इस संबंध में उनके पास वीडियो रिकॉर्डिंग भी है। वहीं, महिला के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन के पैसे मांगने के आरोपों को निराधार बताया। पुलिस इस मामले में अभी परिजनों के आने का इंतजार कर रही है। ऐसे में पुलिस ने सोमवार को दूसरे दिन कोई कार्रवाई नहीं की।
सोमवार को पार्क अस्पताल की मुख्य कार्यकारी अधिकारी सपना भांभरी और विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. अजीत श्रीवास्तव ने पूरे मामले को लेकर मीडिया से बातचीत की। उन्होंने बताया कि शुक्रवार शाम करीब सात बजे मरीज गुड्डी को पैर की हड्डी टूटने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
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ऑपरेशन से पहले की गई प्री-एनेस्थेटिक जांच में महिला के हृदय से जुड़ी समस्या सामने आई। ईसीजी और ईको जांच में दो नसों के ब्लॉक होने की जानकारी मिली। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, महिला का उपचार उनके बेटे की सहमति से किया गया। आयुष्मान पोर्टल पर स्टेंट के लिए अनुमति लेने के दौरान उनके बेटे ने हस्ताक्षर किए थे। वहीं, स्टेंट डालने से पहले बड़े बेटे से फोन पर सहमति ली गई थी।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी सपना भांभरी ने कहा कि मरीज की मौत के बाद पुलिस ने बिना विशेषज्ञ राय (डिस्ट्रिक्ट नेग्लिजेंस बोर्ड) के प्राथमिकी दर्ज कर ली। उन्होंने दावा किया कि चिकित्सा लापरवाही से जुड़े मामलों में विशेषज्ञ समिति की राय जरूरी होती है। उन्होंने कहा कि मामले को पहले जिला स्तरीय जांच समिति के समक्ष रखा जाना चाहिए था।
वहीं, रमेश नगर निवासी मृतका के बेटे कुलदीप ने अस्पताल के आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि उनकी मां का गलत उपचार किया गया और चिकित्सकों ने इलाज से जुड़ी पूरी जानकारी परिवार को नहीं दी। उन्होंने बताया कि वह जल्द ही पुलिस अधिकारियों से मिलकर मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग करेंगे।
यह था मामला
शुक्रवार शाम कानपुर देहात के रसूलाबाद निवासी गुड्डी को पैर की हड्डी टूटने के बाद पार्क अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टरों ने हृदय की नस ब्लॉक बताकर स्टेंट डाल दिए, जिसके बाद उनकी मौत हो गई। मृतका के बेटे कुलदीप ने डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उनका आरोप था कि डॉक्टरों ने उनके पिता और दूसरे भाई सुरजीत के फर्जी हस्ताक्षर किए हैं।
इस संंबंध में थाना सेक्टर-29 प्रभारी सुभाष ने बताया कि महिला के बेटे की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। महिला को पैर के ऑपरेशन के लिए भर्ती कराया गया था, जबकि अस्पताल की ओर से बिना जानकारी दिए हृदय संबंधी प्रक्रिया करने का आरोप लगाया गया है। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान अस्पताल प्रबंधन का पक्ष भी शामिल किया जाएगा।
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पानीपत। पार्क अस्पताल में उपचार के दौरान महिला की मौत के मामले में अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। प्रबंधन का कहना है कि विशेषज्ञों की राय लिए बिना डॉक्टर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करना नियमों के विपरीत है। इस संबंध में अस्पताल की ओर से पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर प्राथमिकी रद्द करने की मांग की गई है।
अस्पताल प्रबंधन ने आरोप लगाया कि महिला के परिजन पैसे के लिए दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं। प्रबंधन ने दावा किया कि इस संबंध में उनके पास वीडियो रिकॉर्डिंग भी है। वहीं, महिला के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन के पैसे मांगने के आरोपों को निराधार बताया। पुलिस इस मामले में अभी परिजनों के आने का इंतजार कर रही है। ऐसे में पुलिस ने सोमवार को दूसरे दिन कोई कार्रवाई नहीं की।
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सोमवार को पार्क अस्पताल की मुख्य कार्यकारी अधिकारी सपना भांभरी और विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. अजीत श्रीवास्तव ने पूरे मामले को लेकर मीडिया से बातचीत की। उन्होंने बताया कि शुक्रवार शाम करीब सात बजे मरीज गुड्डी को पैर की हड्डी टूटने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
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ऑपरेशन से पहले की गई प्री-एनेस्थेटिक जांच में महिला के हृदय से जुड़ी समस्या सामने आई। ईसीजी और ईको जांच में दो नसों के ब्लॉक होने की जानकारी मिली। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, महिला का उपचार उनके बेटे की सहमति से किया गया। आयुष्मान पोर्टल पर स्टेंट के लिए अनुमति लेने के दौरान उनके बेटे ने हस्ताक्षर किए थे। वहीं, स्टेंट डालने से पहले बड़े बेटे से फोन पर सहमति ली गई थी।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी सपना भांभरी ने कहा कि मरीज की मौत के बाद पुलिस ने बिना विशेषज्ञ राय (डिस्ट्रिक्ट नेग्लिजेंस बोर्ड) के प्राथमिकी दर्ज कर ली। उन्होंने दावा किया कि चिकित्सा लापरवाही से जुड़े मामलों में विशेषज्ञ समिति की राय जरूरी होती है। उन्होंने कहा कि मामले को पहले जिला स्तरीय जांच समिति के समक्ष रखा जाना चाहिए था।
वहीं, रमेश नगर निवासी मृतका के बेटे कुलदीप ने अस्पताल के आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि उनकी मां का गलत उपचार किया गया और चिकित्सकों ने इलाज से जुड़ी पूरी जानकारी परिवार को नहीं दी। उन्होंने बताया कि वह जल्द ही पुलिस अधिकारियों से मिलकर मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग करेंगे।
यह था मामला
शुक्रवार शाम कानपुर देहात के रसूलाबाद निवासी गुड्डी को पैर की हड्डी टूटने के बाद पार्क अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टरों ने हृदय की नस ब्लॉक बताकर स्टेंट डाल दिए, जिसके बाद उनकी मौत हो गई। मृतका के बेटे कुलदीप ने डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उनका आरोप था कि डॉक्टरों ने उनके पिता और दूसरे भाई सुरजीत के फर्जी हस्ताक्षर किए हैं।
इस संंबंध में थाना सेक्टर-29 प्रभारी सुभाष ने बताया कि महिला के बेटे की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। महिला को पैर के ऑपरेशन के लिए भर्ती कराया गया था, जबकि अस्पताल की ओर से बिना जानकारी दिए हृदय संबंधी प्रक्रिया करने का आरोप लगाया गया है। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान अस्पताल प्रबंधन का पक्ष भी शामिल किया जाएगा।