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यूक्रेन से लौटे छात्रों के कागजात वहीं यूनिवर्सिटी में जाम
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रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण भारतीय छात्रों को पढ़ाई बीच में छोड़कर घर लौटना पड़ा। अब छात्रों के कागजात वहां की यूनिवर्सिटी में जमा है। अब छात्र यहां पर भी दाखिला नहीं ले पा रहे हैं। यूक्रेन की कई यूनिवर्सिटी ने ऑनलाइन पढ़ाई शुरू कर दी है लेकिन वहां की यूनिवर्सिटी ने भारतीय छात्रों को ऑनलाइन कक्षाओं में ऐड करने से इंकार कर दिया है। यूक्रेन की यूनिवर्सिटी का मत है कि भारत युद्ध में रूस का साथ दे रहा है इसलिए वो भारत के छात्रों को नहीं पढ़ाएंगे।
ऐसे में भारत के इन छात्रों के बेहतर भविष्य में संकट के बादल मंडरा रहे हैं। पानीपत में 50 से ज्यादा विद्यार्थी हैं, जो आनलाइन कक्षाओं में शामिल नहीं हो पा रहे हैं।
टरनोपेल मेडिकल यूनिवर्सिटी और कीव मेडिकल यूनिवर्सिटी के शिक्षकों ने इंटरनेट के माध्यम से संदेश भेजकर पढ़ाने से इनकार किया है। जिससे डॉक्टर बनने का सपना विद्यार्थियों का कहीं न कहीं अधूरा रह गया है। वहीं जिनको ऑनलाइन पढ़ा भी रहे है तो उनका अब यूक्रेन से पढ़ने का मन नहीं है।
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बायोलॉजी के प्रोफेसर तुषार कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग, एनएमसी ने विदेश में चिकित्सा स्नातक, एफएमजी करने वालों के लिए 2021 में जो नियम जारी किए उनके अनुसार एमबीबीएस प्रोग्राम के बीच में किसी विदेशी विश्वविद्यालय से भारतीय विश्वविद्यालय में स्थानांतरण का प्रावधान नहीं है। क्योंकि दोनों में प्रवेश के दिशा निर्देश और चयन के मानक अलग-अलग हैं। यूक्रेन में एमबीबीएस की डिग्री लेने में छह साल लगते हैं । दो वर्ष इंटर्नशिप में लगते हैं। डॉक्टर को लाइसेंस लेने के लिए दो साल मिलते हैं। अब छात्रों का एक साल वैसे ही खराब हो गया है इसलिए उनके लिए परेशानियां बढ़ गई हैं।
किसी भी राज्य में नहीं हो पा रहा है दाखिला
भारत की किसी भी विश्वविद्यालय में हमारा दाखिला नहीं हो पा रहा है। पिछले एक महीनें से कॉलेजों के चक्कर लगा रहें हैं। कॉलेज वाले बोल रहे है कि असली कागजात लेकर आओ, लेकिन हमारे कागजात यूक्रेन में जमा है। सरकार हमारी मदद करे।
अनिल कुमार, विद्यार्थी बीएड
यूक्रेन की स्थिति खराब होती जा रही है। अब लग नहीं रहा है कि वहां पर पढ़ना संभव हो पाएगा। कॉलेज की ओर से संदेश आया है कि उन्हें इस सेमेस्टर ऑनलाइन पढ़ाया जाएगा। अभी तो दो साल ही हुए हैं, आगे के चार साल पढ़ाई करना मुश्किल हो जाएगा। सरकार हमें भारत में दाखिला दे।
- मानसी सहगल, विद्यार्थी एमबीबीएस
सरकार ने हमें यूक्रेन से निकालकर बचाया है। अब हमारी पढ़ाई को भी बचाना चाहिए। यूक्रेन के भारतीय विद्यार्थियों को मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिलना चाहिए। तीन साल का कोर्स हो चुका है, यदि दोबारा से भारत में दाखिला लूंगी तो पिछले तीन साल खराब हो जाएंगे।
-टविंकल, विद्यार्थी एमबीबीएस
हम भारतीय विद्यार्थियों को यूक्रेनी विश्वविद्यालय और वहां के प्रोफेसर पढ़ाने से मना कर रहे है। उनका कहना है कि भारत रूस के साथ है इसलिए वह भारतीय विद्यार्थियों नहीं पढ़ाएंगे।
- मानव कुमार, विद्यार्थी एमबीबीए
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ऐसे में भारत के इन छात्रों के बेहतर भविष्य में संकट के बादल मंडरा रहे हैं। पानीपत में 50 से ज्यादा विद्यार्थी हैं, जो आनलाइन कक्षाओं में शामिल नहीं हो पा रहे हैं।
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टरनोपेल मेडिकल यूनिवर्सिटी और कीव मेडिकल यूनिवर्सिटी के शिक्षकों ने इंटरनेट के माध्यम से संदेश भेजकर पढ़ाने से इनकार किया है। जिससे डॉक्टर बनने का सपना विद्यार्थियों का कहीं न कहीं अधूरा रह गया है। वहीं जिनको ऑनलाइन पढ़ा भी रहे है तो उनका अब यूक्रेन से पढ़ने का मन नहीं है।
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बायोलॉजी के प्रोफेसर तुषार कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग, एनएमसी ने विदेश में चिकित्सा स्नातक, एफएमजी करने वालों के लिए 2021 में जो नियम जारी किए उनके अनुसार एमबीबीएस प्रोग्राम के बीच में किसी विदेशी विश्वविद्यालय से भारतीय विश्वविद्यालय में स्थानांतरण का प्रावधान नहीं है। क्योंकि दोनों में प्रवेश के दिशा निर्देश और चयन के मानक अलग-अलग हैं। यूक्रेन में एमबीबीएस की डिग्री लेने में छह साल लगते हैं । दो वर्ष इंटर्नशिप में लगते हैं। डॉक्टर को लाइसेंस लेने के लिए दो साल मिलते हैं। अब छात्रों का एक साल वैसे ही खराब हो गया है इसलिए उनके लिए परेशानियां बढ़ गई हैं।
किसी भी राज्य में नहीं हो पा रहा है दाखिला
भारत की किसी भी विश्वविद्यालय में हमारा दाखिला नहीं हो पा रहा है। पिछले एक महीनें से कॉलेजों के चक्कर लगा रहें हैं। कॉलेज वाले बोल रहे है कि असली कागजात लेकर आओ, लेकिन हमारे कागजात यूक्रेन में जमा है। सरकार हमारी मदद करे।
अनिल कुमार, विद्यार्थी बीएड
यूक्रेन की स्थिति खराब होती जा रही है। अब लग नहीं रहा है कि वहां पर पढ़ना संभव हो पाएगा। कॉलेज की ओर से संदेश आया है कि उन्हें इस सेमेस्टर ऑनलाइन पढ़ाया जाएगा। अभी तो दो साल ही हुए हैं, आगे के चार साल पढ़ाई करना मुश्किल हो जाएगा। सरकार हमें भारत में दाखिला दे।
- मानसी सहगल, विद्यार्थी एमबीबीएस
सरकार ने हमें यूक्रेन से निकालकर बचाया है। अब हमारी पढ़ाई को भी बचाना चाहिए। यूक्रेन के भारतीय विद्यार्थियों को मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिलना चाहिए। तीन साल का कोर्स हो चुका है, यदि दोबारा से भारत में दाखिला लूंगी तो पिछले तीन साल खराब हो जाएंगे।
-टविंकल, विद्यार्थी एमबीबीएस
हम भारतीय विद्यार्थियों को यूक्रेनी विश्वविद्यालय और वहां के प्रोफेसर पढ़ाने से मना कर रहे है। उनका कहना है कि भारत रूस के साथ है इसलिए वह भारतीय विद्यार्थियों नहीं पढ़ाएंगे।
- मानव कुमार, विद्यार्थी एमबीबीए