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सरकारी स्कूल पर जड़ा ताला, गली में लगाई क्लास
अमर उजाला ब्यूरो/पानीपत
Updated Fri, 11 Jul 2014 12:11 AM IST
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शहर के हरिनगर स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला पर अभिभावकों ने पर्याप्त कमरे न होने पर ताला जड़ दिया। स्कूल के बाहर गली में कक्षाएं चलीं।
अभिभावकों और कालोनी निवासियों ने शिक्षा अधिकारियों व सरकार की अनदेखी पर रोष व्यक्त किया। अभिभावकों के प्रदर्शन और गुस्से के डर से शिक्षा अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे।
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी ने स्कूल को दो शिफ्टों में लगाकर समस्या के समाधान का दावा किया है।
हरिनगर स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला में साढ़े छह सौ विद्यार्थियों के लिए मात्र दो ही कमरे हैं। सरकार और शिक्षा अधिकारियों की अनदेखी से आक्रोशित अभिभावक वीरवार सुबह ही कालोनी स्थित प्राथमिक पाठशाला पर पहुंच गए और स्कूल के गेट पर ताला जड़ दिया।
अभिभावकों ने बच्चों को बाहर गली में ही बैठाकर प्रशासन व शिक्षा अधिकारियों की अनदेखी पर रोष व्यक्त किया। स्थानीय निवासी रविंद्र, राजू, बिमला और चमेली ने कहा कि कालोनी के प्राथमिक स्कूल में दो ही कमरे हैं।
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यहां पर साढ़े छह सौ विद्यार्थियों को बैठा पाना मुश्किल है। स्कूल प्रमुख कमरों का नाम आते ही अपने हाथ खड़े कर लेता है। वे स्कूल में कमरों की समस्या के समाधान को लेकर शिक्षा और प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा सांसद दीपेंद्र हुड्डा से भी मिल चुके हैं।
उनको हर बार स्कूल में कमरों की समस्या के समाधान का आश्वासन मिला है, लेकिन यहां पर कमरों की समस्या आज भी जस की तस है। शिक्षा अधिकारी यहां पर आकर भी नहीं देखते और गर्मी के मौसम में बच्चों का पढ़ पाना मुश्किल हो गया है।
बच्चों को तेज धूप में दिनभर बैठना पड़ रहा है, जिससे बच्चे बीमार हो रहे हैं। छात्र अमित और छात्रा दीपा ने बताया कि स्कूल में उनको बैठने की जगह नहीं मिल पाती। वे धूप, बारिश व ठंड में ही बैठने को मजबूर हैं। उनको यहां पर मिड-डे मील तो मिल जाता है, लेकिन बैठने को जगह तक नहीं मिल पाती।
यह है विद्यार्थियों की स्थिति
कक्षा छात्रा छात्र कुल
पहली 54 37 91
दूसरी 64 76 140
तीसरी 85 94 179
चौथी 87 56 143
पांचवीं 43 63 106
कुल 333 326 659
प्रदेश नंबर वन स्कूल में बैठने की जगह नहीं
स्कूल प्रबंधन कमेटी की प्रधान मंजू पुरी ने कहा कि मुख्यमंत्री प्रदेश को नंबर वन कहते हैं, लेकिन नंबर वन प्रदेश के स्कूलों में विद्यार्थियों के बैठने की जगह तक नहीं है। सरकारी स्कूलों में बच्चों का भविष्य नहीं है और सरकार की अनदेखी से ही प्राइवेट स्कूल बिजनेस बनते जा रहे हैं। सरकारी स्कूलों में योजनाओं के नाम पर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ की जा रही है। सरकार व प्रशासन को स्कूल बनाने के लिए जगह तलाशनी चाहिए।
यह कहता है आरटीई का नार्म्स
आरटीई के नार्म्स अनुसार 30 विद्यार्थियों का एक सेक्शन होना चाहिए और उन पर एक टीचर होना जरूरी है। विभाग के नार्म्स को ही देखें तो यहां पर 650 विद्यार्थियों के लिए 20 कमरों की जरूरत है। शिक्षा विभाग इसी के आधार रेशनलाइजेशन भी लागू कर रहा है।
डबल शिफ्ट में नहीं होगा समस्या का समाधान
शिक्षा अधिकारी स्कूल को डबल शिफ्ट में कर समस्या के समाधान की कह रहे हैं, लेकिन अधिकारियों के इस कदम के आगे छात्र संख्या बाधा बनेगी। विभाग पहली और दूसरी कक्षा को एक शिफ्ट में करता है तो छात्र संख्या 231 हो जाती है और दूसरी शिफ्ट में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ जाएगी। लड़कों व लड़कियों की अलग-अलग शिफ्ट बनाने में भी काम नहीं चल सकता।
विभाग के पास दो विकल्प
शिक्षा विभाग के पास स्कूल में विद्यार्थियों की समस्या के समाधान को लेकर दो विकल्प हैं। स्कूल के जानकारों की मानें तो दो कमरों के ऊपर शिक्षा विभाग के नार्म्स को छोड़कर छोटे आकार के चार कमरे बनाए जा सकते हैं। इसके साथ यहां पर छह कमरे बन जाएंगे और समस्या का समाधान कुछ हद तक हो सकता है। इसके विपरीत विभाग दूसरी जगह ले और वहां पर स्कूल का भवन तैयार करें।
हाई और सीसे स्कूल की दरकार
हरिनगर स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला में वार्ड-23 व 24 के बच्चे आते हैं। इन दोनों कालोनियों में करीब 50 हजार की जनसंख्या है। ऐसे में यहां पर हाई व सीनियर सेकेंडरी स्कूल भी बनाया जा सकता है। यहां के बच्चों को राजकीय माडल संस्कृति या दूसरे स्कूलों में जाना पड़ता है।
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अभिभावकों और कालोनी निवासियों ने शिक्षा अधिकारियों व सरकार की अनदेखी पर रोष व्यक्त किया। अभिभावकों के प्रदर्शन और गुस्से के डर से शिक्षा अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे।
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी ने स्कूल को दो शिफ्टों में लगाकर समस्या के समाधान का दावा किया है।
हरिनगर स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला में साढ़े छह सौ विद्यार्थियों के लिए मात्र दो ही कमरे हैं। सरकार और शिक्षा अधिकारियों की अनदेखी से आक्रोशित अभिभावक वीरवार सुबह ही कालोनी स्थित प्राथमिक पाठशाला पर पहुंच गए और स्कूल के गेट पर ताला जड़ दिया।
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अभिभावकों ने बच्चों को बाहर गली में ही बैठाकर प्रशासन व शिक्षा अधिकारियों की अनदेखी पर रोष व्यक्त किया। स्थानीय निवासी रविंद्र, राजू, बिमला और चमेली ने कहा कि कालोनी के प्राथमिक स्कूल में दो ही कमरे हैं।
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यहां पर साढ़े छह सौ विद्यार्थियों को बैठा पाना मुश्किल है। स्कूल प्रमुख कमरों का नाम आते ही अपने हाथ खड़े कर लेता है। वे स्कूल में कमरों की समस्या के समाधान को लेकर शिक्षा और प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा सांसद दीपेंद्र हुड्डा से भी मिल चुके हैं।
उनको हर बार स्कूल में कमरों की समस्या के समाधान का आश्वासन मिला है, लेकिन यहां पर कमरों की समस्या आज भी जस की तस है। शिक्षा अधिकारी यहां पर आकर भी नहीं देखते और गर्मी के मौसम में बच्चों का पढ़ पाना मुश्किल हो गया है।
बच्चों को तेज धूप में दिनभर बैठना पड़ रहा है, जिससे बच्चे बीमार हो रहे हैं। छात्र अमित और छात्रा दीपा ने बताया कि स्कूल में उनको बैठने की जगह नहीं मिल पाती। वे धूप, बारिश व ठंड में ही बैठने को मजबूर हैं। उनको यहां पर मिड-डे मील तो मिल जाता है, लेकिन बैठने को जगह तक नहीं मिल पाती।
यह है विद्यार्थियों की स्थिति
कक्षा छात्रा छात्र कुल
पहली 54 37 91
दूसरी 64 76 140
तीसरी 85 94 179
चौथी 87 56 143
पांचवीं 43 63 106
कुल 333 326 659
प्रदेश नंबर वन स्कूल में बैठने की जगह नहीं
स्कूल प्रबंधन कमेटी की प्रधान मंजू पुरी ने कहा कि मुख्यमंत्री प्रदेश को नंबर वन कहते हैं, लेकिन नंबर वन प्रदेश के स्कूलों में विद्यार्थियों के बैठने की जगह तक नहीं है। सरकारी स्कूलों में बच्चों का भविष्य नहीं है और सरकार की अनदेखी से ही प्राइवेट स्कूल बिजनेस बनते जा रहे हैं। सरकारी स्कूलों में योजनाओं के नाम पर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ की जा रही है। सरकार व प्रशासन को स्कूल बनाने के लिए जगह तलाशनी चाहिए।
यह कहता है आरटीई का नार्म्स
आरटीई के नार्म्स अनुसार 30 विद्यार्थियों का एक सेक्शन होना चाहिए और उन पर एक टीचर होना जरूरी है। विभाग के नार्म्स को ही देखें तो यहां पर 650 विद्यार्थियों के लिए 20 कमरों की जरूरत है। शिक्षा विभाग इसी के आधार रेशनलाइजेशन भी लागू कर रहा है।
डबल शिफ्ट में नहीं होगा समस्या का समाधान
शिक्षा अधिकारी स्कूल को डबल शिफ्ट में कर समस्या के समाधान की कह रहे हैं, लेकिन अधिकारियों के इस कदम के आगे छात्र संख्या बाधा बनेगी। विभाग पहली और दूसरी कक्षा को एक शिफ्ट में करता है तो छात्र संख्या 231 हो जाती है और दूसरी शिफ्ट में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ जाएगी। लड़कों व लड़कियों की अलग-अलग शिफ्ट बनाने में भी काम नहीं चल सकता।
विभाग के पास दो विकल्प
शिक्षा विभाग के पास स्कूल में विद्यार्थियों की समस्या के समाधान को लेकर दो विकल्प हैं। स्कूल के जानकारों की मानें तो दो कमरों के ऊपर शिक्षा विभाग के नार्म्स को छोड़कर छोटे आकार के चार कमरे बनाए जा सकते हैं। इसके साथ यहां पर छह कमरे बन जाएंगे और समस्या का समाधान कुछ हद तक हो सकता है। इसके विपरीत विभाग दूसरी जगह ले और वहां पर स्कूल का भवन तैयार करें।
हाई और सीसे स्कूल की दरकार
हरिनगर स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला में वार्ड-23 व 24 के बच्चे आते हैं। इन दोनों कालोनियों में करीब 50 हजार की जनसंख्या है। ऐसे में यहां पर हाई व सीनियर सेकेंडरी स्कूल भी बनाया जा सकता है। यहां के बच्चों को राजकीय माडल संस्कृति या दूसरे स्कूलों में जाना पड़ता है।