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समय और मांग के साथ बदला शिक्षा के साथ खेल का क्षेत्र
amar ujala beuro panipat
Updated Thu, 27 Oct 2016 12:10 AM IST
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- फोटो : zc
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हरियाणा गठन के बाद जिले में शिक्षा और खेल के क्षेत्र में बड़े बदलाव आए हैं। वर्तमान मेें जिले के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाए हुए हैं। विद्यार्थी भी शिक्षा के क्षेत्र में खुद को साबित कर रहे हैं। वे सिविल सर्विस की परीक्षा में अच्छे रैंक पाकर दूसरे प्रदेशों में भी अपनी धाक जमा रहे हैं।
हरियाणा स्वर्ण जयंती समारोह मनाने की तैयारी में है। एक नवंबर को गुरुग्राम में स्वर्ण जयंती समारोह आयोजित किया जाएगा। अमर उजाला प्रदेश के स्वर्ण जयंती के साथ पानीपत के इतिहास और इसकी भूमिका से पाठकों को रूबरू करा रहा है। अमर उजाला ने जिले में शिक्षा और खेलों के क्षेत्र में आए बदलाव के बारे में शिक्षाविद् और खिलाड़ियों से जाना। सभी ने माना कि शिक्षा और खेल दोनों क्षेत्रों में व्यापक बदलाव आया है। जिले में स्कूलों के साथ कॉलेजों की संख्या बढ़ती जा रही है। जिले में पांच एडेड, एक प्राइवेट और चार राजकीय कॉलेज हैं। एनसी मेडिकल कॉलेज हाल ही में शुरू हुआ है।
जिले में करीब 400 सरकारी और इतने ही निजी स्कूल हैं। इंजीनियर और एजूकेशन कॉलेजों की संख्या करीब एक दर्जन है। जिले में खेलों के क्षेत्र में भी सुविधा मिली हैं। यहां एक बड़ा स्टेडियम और आठ राजीव गांधी खेल स्टेडियम हैं। भापरा गांव में राजीव गांधी खेल स्टेडियम का निर्माणा चल रहा है। जिले में करीब 105 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी हैं।
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सुविधाओं में पिछड़े, पदकों में आगे आए
कबड्डी के अंतरराष्ट्रीय कोच बलवान सिंह दहिया से अमर उजाला ने खेलों के क्षेत्र में सुविधाओं और पदक के बारे में बातचीत की। बलवान सिंह दहिया साई से कबड्डी के सीनियर कोच के पद से सेवानिवृत्त हैं। बलवान सिंह दहिया ने बताया कि खेलों के क्षेत्र में प्रदेश की उपलब्धियां रही हैं। कॉमनवेल्थ, एशियन या दूसरे खेलों में प्रदेश के खिलाड़ी हर बार पदक लेकर आए हैं।
जिले के खिलाड़ियों ने स्कूल और ओपन में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन किया है। ये स्थिति तब है जबकि खिलाड़ियों को पर्याप्त प्राथमिक सुविधा नहीं मिल पाती। सरकार प्राथमिक सुविधाओं पर थोड़ा सा ध्यान दें तो युवा खेल के मैदान पर और भी अधिक पदक जीत सकते हैं। सरकार को इस इस संबंध में विशेषज्ञों से राय लेनी चाहिए। खिलाड़ियों को दी जाने वाली खेलों की सुविधाओं को बढ़ाना चाहिए।
शिक्षा की पहचान और तरीके बदले
शिक्षाविद् सुरेश गोयल ने बताया कि आज शिक्षा की पहचान और शिक्षा पाने के तरीके बदल गए हैं। आधुनिक उपकरण आने के बाद अभिभावकों और बच्चों का शिक्षा के प्रति रुझान बढ़ा है। सुरेश गोयल एसडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल से जेबीटी के पद से रिटायर्ड हैं। वे वर्तमान में नूरवाला स्थित कृष्णा विद्या मंदिर स्कूल के प्रबंधक हैं। उन्होंने बताया कि हमारे समय में स्कूल दूर-दूर होते थे। विद्यार्थियों को पैदल ही स्कूल तक जाना पड़ता था। अभिभावक भी बच्चों की तरफ इतना ध्यान नहीं देते थे। वर्तमान में आधुनिक उपकरणों के आने के बाद शिक्षा के क्षेत्र में विशेष बदलाव आए हैं।
अभिभावक शिक्षा के प्रति गंभीर हो गए हैं। वे अपने बच्चों को अच्छे से अच्छे स्कूल में पढ़ाना चाहते हैं। उनको हर तरह की सुविधा देना चाहते हैं। सरकारी स्कूलों में योग्य और अनुभवी अध्यापक हैं। हालांकि, इसके बाद भी बहुत से स्थानों पर अपेक्षाकृत सुविधाएं नहीं हैं। इससे सरकारी स्कूल पिछड़ते जा रहे हैं। निजी स्कूल प्रबंधन प्रतिस्पर्धा के चलते हर बेहतर सुविधा देने में लगे हुए हैं।
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हरियाणा स्वर्ण जयंती समारोह मनाने की तैयारी में है। एक नवंबर को गुरुग्राम में स्वर्ण जयंती समारोह आयोजित किया जाएगा। अमर उजाला प्रदेश के स्वर्ण जयंती के साथ पानीपत के इतिहास और इसकी भूमिका से पाठकों को रूबरू करा रहा है। अमर उजाला ने जिले में शिक्षा और खेलों के क्षेत्र में आए बदलाव के बारे में शिक्षाविद् और खिलाड़ियों से जाना। सभी ने माना कि शिक्षा और खेल दोनों क्षेत्रों में व्यापक बदलाव आया है। जिले में स्कूलों के साथ कॉलेजों की संख्या बढ़ती जा रही है। जिले में पांच एडेड, एक प्राइवेट और चार राजकीय कॉलेज हैं। एनसी मेडिकल कॉलेज हाल ही में शुरू हुआ है।
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जिले में करीब 400 सरकारी और इतने ही निजी स्कूल हैं। इंजीनियर और एजूकेशन कॉलेजों की संख्या करीब एक दर्जन है। जिले में खेलों के क्षेत्र में भी सुविधा मिली हैं। यहां एक बड़ा स्टेडियम और आठ राजीव गांधी खेल स्टेडियम हैं। भापरा गांव में राजीव गांधी खेल स्टेडियम का निर्माणा चल रहा है। जिले में करीब 105 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी हैं।
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सुविधाओं में पिछड़े, पदकों में आगे आए
कबड्डी के अंतरराष्ट्रीय कोच बलवान सिंह दहिया से अमर उजाला ने खेलों के क्षेत्र में सुविधाओं और पदक के बारे में बातचीत की। बलवान सिंह दहिया साई से कबड्डी के सीनियर कोच के पद से सेवानिवृत्त हैं। बलवान सिंह दहिया ने बताया कि खेलों के क्षेत्र में प्रदेश की उपलब्धियां रही हैं। कॉमनवेल्थ, एशियन या दूसरे खेलों में प्रदेश के खिलाड़ी हर बार पदक लेकर आए हैं।
जिले के खिलाड़ियों ने स्कूल और ओपन में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन किया है। ये स्थिति तब है जबकि खिलाड़ियों को पर्याप्त प्राथमिक सुविधा नहीं मिल पाती। सरकार प्राथमिक सुविधाओं पर थोड़ा सा ध्यान दें तो युवा खेल के मैदान पर और भी अधिक पदक जीत सकते हैं। सरकार को इस इस संबंध में विशेषज्ञों से राय लेनी चाहिए। खिलाड़ियों को दी जाने वाली खेलों की सुविधाओं को बढ़ाना चाहिए।
शिक्षा की पहचान और तरीके बदले
शिक्षाविद् सुरेश गोयल ने बताया कि आज शिक्षा की पहचान और शिक्षा पाने के तरीके बदल गए हैं। आधुनिक उपकरण आने के बाद अभिभावकों और बच्चों का शिक्षा के प्रति रुझान बढ़ा है। सुरेश गोयल एसडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल से जेबीटी के पद से रिटायर्ड हैं। वे वर्तमान में नूरवाला स्थित कृष्णा विद्या मंदिर स्कूल के प्रबंधक हैं। उन्होंने बताया कि हमारे समय में स्कूल दूर-दूर होते थे। विद्यार्थियों को पैदल ही स्कूल तक जाना पड़ता था। अभिभावक भी बच्चों की तरफ इतना ध्यान नहीं देते थे। वर्तमान में आधुनिक उपकरणों के आने के बाद शिक्षा के क्षेत्र में विशेष बदलाव आए हैं।
अभिभावक शिक्षा के प्रति गंभीर हो गए हैं। वे अपने बच्चों को अच्छे से अच्छे स्कूल में पढ़ाना चाहते हैं। उनको हर तरह की सुविधा देना चाहते हैं। सरकारी स्कूलों में योग्य और अनुभवी अध्यापक हैं। हालांकि, इसके बाद भी बहुत से स्थानों पर अपेक्षाकृत सुविधाएं नहीं हैं। इससे सरकारी स्कूल पिछड़ते जा रहे हैं। निजी स्कूल प्रबंधन प्रतिस्पर्धा के चलते हर बेहतर सुविधा देने में लगे हुए हैं।