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पोस्टमैन ने ट्रेन के आगे कूद जान दी
अमर उजाला ब्यूरो/पानीपत
Updated Wed, 25 Jun 2014 12:17 AM IST
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पानीपत मुख्य डाकघर में तैनात पोस्टमैन ने कथित तौर पर पोस्टमास्टर और सहायक पोस्टमास्टर से तंग आकर ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी।
उसका शव मुख्य ट्रैक पर बिशनस्वरूप कालोनी के नजदीक मिला। जीआरपी ने सुसाइड नोट को कब्जे में लेकर परिजनों के बयान पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। जीआरपी ने निष्पक्ष जांच कर आरोपियों को जल्द ही काबू करने का दावा किया है।
मंगलवार सुबह करीब साढ़े 10 बजे दिल्ली-अंबाला रेलवे ट्रैक पर बिशनस्वरूप कालोनी के नजदीक एक व्यक्ति का शव मिला। जीआरपी सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची और शव को शव गृह में रखवा दिया।
जीआरपी ने उसकी शिनाख्त विजय कुमार (35) निवासी राजीव कालोनी के रूप में की और उसके परिजनों को सूचित किया। इसी बीच उसकी जेब से दो सुसाइड नोट मिले।
जीआरपी ने दोनों सुसाइड नोटों को कब्जे में ले लिया और परिजनों के बयान दर्ज किए। भाई रमेश कुमार ने आरोप लगाए कि विजय कुमार लंबे समय से तनाव में रहता था। उसने उसको कई बार पोस्टमास्टर व सहायक पोस्टमास्टर द्वारा परेशान करने की बात कही मगर उन्होंने इसे कार्यालय के कामकाज का हिस्सा मानकर ध्यान नहीं दिया।
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कई माह पहले आया था पानीपत
विजय कुमार मूलरूप से जिले के गांव नामुंडा का रहने वाला था और उसका भाई रमेश कुमार गांव का सरपंच रहा है। विजय कुमार ने 15 साल पहले नामुंडा व फिर समालखा में पोस्टमैन का काम किया और लंबे समय ये मुख्य डाकघर में तैनात था। वह कई माह पहले ही राजीव कालोनी स्थित मकान में आकर रहने लगा था।
एसपी और प्रवर अधीक्षक डाकघर को लिखा सुसाइड नोट
विजय कुमार की जेब में मिले दो सुसाइड नोट में से एक पुलिस अधीक्षक पानीपत के नाम और दूसरा प्रवर अधीक्षक डाकघर करनाल को लिखा है। उसने सुसाइड नोट में पोस्टमास्टर पानीपत व सहायक पोस्टमास्टर पानीपत पर तंग करने के आरोप लगाए हैं। उसने सुसाइड नोट में दोनों अधिकारियों से जल्द से जल्द छुटकारा दिलवाने की बात कही है।
डबल बीट ड्यूटी देने का लगाया आरोप
पोस्टमैन विजय कुमार ने प्रवर अधीक्षक डाकघर करनाल को भेजे सुसाइड नोट में डबल बीट ड्यूटी लेने का आरोप लगाया है। उसने पत्र में दोनों अधिकारियों से जल्द छुटकारा दिलाने की मांग की है।
आरोप लगाया है कि इन्होंने मेरा दिन-रात का अमन चैन इतना खराब कर रखा है कि अटैक जैसी स्थिति बनी हुई है। पोस्टमास्टर हर समय काम न करने पर नौकरी से निकाल देने की धमकी देते थे।
उसने डबल ड्यूटी से हटाने की मांग की, लेकिन उन्होंने उससे इसी तरह काम लेने की बात कही। उन्होंने इस विषय में आपको फोन के माध्यम से भी अवगत कराया और आप की तरफ से डबल बीट कटवाने की बात कही गई, लेकिन दोनों अधिकारियों ने आपके आदेशों को भी अनसुना कर दिया। वे दोनों उसका एसएसपी से फोन कराने की बात पर मजाक उड़ाने लगे। उन्होंने सरेआम उसका धमकाना शुरू कर दिया।
एसपी साहब मेरी प्रार्थना है, सही मिलने पर सजा देना
पोस्टमैन विजय कुमार ने एसपी को लिखे पत्र में पोस्टमास्टर व सहायक पोस्टमास्टर पर जबरन मौत के मुंह में धकेलने का आरोप लगाया है। उसने पत्र में आरोप लगाया कि ये दोनों मुझे हर रोज डाकखाने का कलंक व बोझ कहकर पुकारते हैं।
काम के आधार पर भी मुझे रिकार्ड के मुताबिक सबसे अधिक काम दिया जाता है। मुझे पब्लिक से रुपये लेकर डाक देने के लिए भी प्रताड़ित किया जाता है। मेरे सत्संग के नाम पर मक्कारी व कलंकी कहकर लगातार प्रताड़ित किया जाता है। मेरी आपसे प्रार्थना है कि अगर उपरोक्त बातें अगर इनकी सहीं पाई जाती हैं तो इन्हें जो मर्जी सजा देना अगर नहीं तो क्षमा करना जी।
नहीं तो इनके शब्द मेरे लिए मरने व मारने से कम नहीं होगा। इनके अलावा मेरे किसी घर परिवार का कोई लेना-देना नहीं है। उसने इसी पत्र में परिवार के लोगों को भी कोई विवाद न खड़ा करने की बात कही है और पुलिस अधीक्षक के फैसले को सर्वोपरि मानने की बात कही है।
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उसका शव मुख्य ट्रैक पर बिशनस्वरूप कालोनी के नजदीक मिला। जीआरपी ने सुसाइड नोट को कब्जे में लेकर परिजनों के बयान पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। जीआरपी ने निष्पक्ष जांच कर आरोपियों को जल्द ही काबू करने का दावा किया है।
मंगलवार सुबह करीब साढ़े 10 बजे दिल्ली-अंबाला रेलवे ट्रैक पर बिशनस्वरूप कालोनी के नजदीक एक व्यक्ति का शव मिला। जीआरपी सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची और शव को शव गृह में रखवा दिया।
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जीआरपी ने उसकी शिनाख्त विजय कुमार (35) निवासी राजीव कालोनी के रूप में की और उसके परिजनों को सूचित किया। इसी बीच उसकी जेब से दो सुसाइड नोट मिले।
जीआरपी ने दोनों सुसाइड नोटों को कब्जे में ले लिया और परिजनों के बयान दर्ज किए। भाई रमेश कुमार ने आरोप लगाए कि विजय कुमार लंबे समय से तनाव में रहता था। उसने उसको कई बार पोस्टमास्टर व सहायक पोस्टमास्टर द्वारा परेशान करने की बात कही मगर उन्होंने इसे कार्यालय के कामकाज का हिस्सा मानकर ध्यान नहीं दिया।
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कई माह पहले आया था पानीपत
विजय कुमार मूलरूप से जिले के गांव नामुंडा का रहने वाला था और उसका भाई रमेश कुमार गांव का सरपंच रहा है। विजय कुमार ने 15 साल पहले नामुंडा व फिर समालखा में पोस्टमैन का काम किया और लंबे समय ये मुख्य डाकघर में तैनात था। वह कई माह पहले ही राजीव कालोनी स्थित मकान में आकर रहने लगा था।
एसपी और प्रवर अधीक्षक डाकघर को लिखा सुसाइड नोट
विजय कुमार की जेब में मिले दो सुसाइड नोट में से एक पुलिस अधीक्षक पानीपत के नाम और दूसरा प्रवर अधीक्षक डाकघर करनाल को लिखा है। उसने सुसाइड नोट में पोस्टमास्टर पानीपत व सहायक पोस्टमास्टर पानीपत पर तंग करने के आरोप लगाए हैं। उसने सुसाइड नोट में दोनों अधिकारियों से जल्द से जल्द छुटकारा दिलवाने की बात कही है।
डबल बीट ड्यूटी देने का लगाया आरोप
पोस्टमैन विजय कुमार ने प्रवर अधीक्षक डाकघर करनाल को भेजे सुसाइड नोट में डबल बीट ड्यूटी लेने का आरोप लगाया है। उसने पत्र में दोनों अधिकारियों से जल्द छुटकारा दिलाने की मांग की है।
आरोप लगाया है कि इन्होंने मेरा दिन-रात का अमन चैन इतना खराब कर रखा है कि अटैक जैसी स्थिति बनी हुई है। पोस्टमास्टर हर समय काम न करने पर नौकरी से निकाल देने की धमकी देते थे।
उसने डबल ड्यूटी से हटाने की मांग की, लेकिन उन्होंने उससे इसी तरह काम लेने की बात कही। उन्होंने इस विषय में आपको फोन के माध्यम से भी अवगत कराया और आप की तरफ से डबल बीट कटवाने की बात कही गई, लेकिन दोनों अधिकारियों ने आपके आदेशों को भी अनसुना कर दिया। वे दोनों उसका एसएसपी से फोन कराने की बात पर मजाक उड़ाने लगे। उन्होंने सरेआम उसका धमकाना शुरू कर दिया।
एसपी साहब मेरी प्रार्थना है, सही मिलने पर सजा देना
पोस्टमैन विजय कुमार ने एसपी को लिखे पत्र में पोस्टमास्टर व सहायक पोस्टमास्टर पर जबरन मौत के मुंह में धकेलने का आरोप लगाया है। उसने पत्र में आरोप लगाया कि ये दोनों मुझे हर रोज डाकखाने का कलंक व बोझ कहकर पुकारते हैं।
काम के आधार पर भी मुझे रिकार्ड के मुताबिक सबसे अधिक काम दिया जाता है। मुझे पब्लिक से रुपये लेकर डाक देने के लिए भी प्रताड़ित किया जाता है। मेरे सत्संग के नाम पर मक्कारी व कलंकी कहकर लगातार प्रताड़ित किया जाता है। मेरी आपसे प्रार्थना है कि अगर उपरोक्त बातें अगर इनकी सहीं पाई जाती हैं तो इन्हें जो मर्जी सजा देना अगर नहीं तो क्षमा करना जी।
नहीं तो इनके शब्द मेरे लिए मरने व मारने से कम नहीं होगा। इनके अलावा मेरे किसी घर परिवार का कोई लेना-देना नहीं है। उसने इसी पत्र में परिवार के लोगों को भी कोई विवाद न खड़ा करने की बात कही है और पुलिस अधीक्षक के फैसले को सर्वोपरि मानने की बात कही है।