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कर्ज में डूबे पवन कुमार ने की आत्महत्या
अमर उजाला ब्यूरो/पानीपत
Updated Sun, 02 Aug 2015 12:23 AM IST
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कर्ज में डूबे एक पात्र अध्यापक ने शुक्रवार की रात जहर निगल कर जीवनलीला समाप्त कर ली।
पुलिस को उसकी जेब से एक सुसाइड नोट मिला। इसमें नौ लोगों के नाम लिखे थे, मृतक ने उन लोगों को ही अपनी मौत का जिम्मेदार बताया है।
जिला जींद के गांव छैतर निवासी पवन कुमार (32) अपने बड़े भाई सतपाल के पास गांव उझा में रहता था। शुक्रवार की रात वह घर पर नहीं पहुंचा। इसका अगले दिन गांव के खेतों में शव मिला। उसकी जेब में एक सुसाइड नोट भी था।
इसमें उसके पैतृक गांव छैतर के ही नौ लोगों के नाम लिखे थे। इसमें सुरेश और उसकी पत्नी दर्शना देवी, उसकी बेटी बबीता, बलवंत और उसके चार पुत्र जयबीर, रामबीर और शिवकेश का नाम है। इसके अतिरिक्त दो सगे भाइयों राजेश और शिवकेश का नाम भी है।
इनके साथ कुछ वर्ष पहले पवन ने एक स्कूल खोला था। कारणवश स्कूूल के बंद होने से उन पर लाखों का कर्ज हो गया। इसे चुकता करने के लिए पवन दिन में चौकीदारी और शाम को ट्यूशन पढ़ाता था। लेकिन कर्ज के लिए बार-बार परेशान करने पर उसने शुक्रवार की रात जहरीला पदार्थ निगलकर जीवन लीला समाप्त कर ली।
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पुलिस ने सुसाइड नोट में लिखे गए नामों के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने का मुकदमा दर्ज कर उनकी धरपकड़ शुरू कर दी है।
पवन हमेशा हर जंग में शिक्षा को हथियार बनाकर लड़ने की बात कहता था। कई साल पहले पिता की मृत्यु होने पर पवन ने रातदिन कठिन परिश्रम कर वर्ष 2013 में जेबीटी की पढ़ाई पूरी की थी तथा वर्ष 2014 में हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा (एचटेट) भी पास किया था।
नौकरी के लिए किए तमाम प्रयास विफल रहने के बाद अब वह सेक्टर-24 की एक फैक्ट्री में दिन के समय चौकीदारी करता था, तथा शाम को बच्चों केे ट्यूशन पढ़ाकर अपनी जरूरत पूरी करता था।
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पुलिस को उसकी जेब से एक सुसाइड नोट मिला। इसमें नौ लोगों के नाम लिखे थे, मृतक ने उन लोगों को ही अपनी मौत का जिम्मेदार बताया है।
जिला जींद के गांव छैतर निवासी पवन कुमार (32) अपने बड़े भाई सतपाल के पास गांव उझा में रहता था। शुक्रवार की रात वह घर पर नहीं पहुंचा। इसका अगले दिन गांव के खेतों में शव मिला। उसकी जेब में एक सुसाइड नोट भी था।
इसमें उसके पैतृक गांव छैतर के ही नौ लोगों के नाम लिखे थे। इसमें सुरेश और उसकी पत्नी दर्शना देवी, उसकी बेटी बबीता, बलवंत और उसके चार पुत्र जयबीर, रामबीर और शिवकेश का नाम है। इसके अतिरिक्त दो सगे भाइयों राजेश और शिवकेश का नाम भी है।
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इनके साथ कुछ वर्ष पहले पवन ने एक स्कूल खोला था। कारणवश स्कूूल के बंद होने से उन पर लाखों का कर्ज हो गया। इसे चुकता करने के लिए पवन दिन में चौकीदारी और शाम को ट्यूशन पढ़ाता था। लेकिन कर्ज के लिए बार-बार परेशान करने पर उसने शुक्रवार की रात जहरीला पदार्थ निगलकर जीवन लीला समाप्त कर ली।
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पुलिस ने सुसाइड नोट में लिखे गए नामों के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने का मुकदमा दर्ज कर उनकी धरपकड़ शुरू कर दी है।
पवन हमेशा हर जंग में शिक्षा को हथियार बनाकर लड़ने की बात कहता था। कई साल पहले पिता की मृत्यु होने पर पवन ने रातदिन कठिन परिश्रम कर वर्ष 2013 में जेबीटी की पढ़ाई पूरी की थी तथा वर्ष 2014 में हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा (एचटेट) भी पास किया था।
नौकरी के लिए किए तमाम प्रयास विफल रहने के बाद अब वह सेक्टर-24 की एक फैक्ट्री में दिन के समय चौकीदारी करता था, तथा शाम को बच्चों केे ट्यूशन पढ़ाकर अपनी जरूरत पूरी करता था।