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डेंगू : एक की मौत, जागा विभाग, फॉगिंग तेज
ब्यूरो/अमर उजाला पानीपत
Updated Wed, 16 Sep 2015 11:44 PM IST
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स्वास्थ्य विभाग डेंगू फैलने के बाद जाग गया है और फॉगिंग तेज कर दी है।
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शहर की खादी कॉलोनी में एक व्यक्ति की संदिग्ध डेंगू से मौत हो गई।
उसे शहर के कई प्राइवेट अस्पतालों के बाद रोहतक में इलाज को ले जाया जा रहा था। जिले में इस तरह से मरने वालों की संख्या आठ हो गई है। स्वास्थ्य विभाग अब भी डेंगू से किसी की मौत होने से इनकार कर रहा है।
स्वास्थ्य विभाग ने साफ शब्दों में डेंगू के हौवे को कुछ प्राइवेट अस्पताल संचालक डॉक्टरों की देन बताया है। विभाग ने मॉडल टाउन स्थित एक प्राइवेट अस्पताल और सरकारी अस्पताल की मरीजों की लैब रिपोर्ट को भी सार्वजनिक किया है।
प्रदेश में डेंगू फैलने के बाद स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारी हरकत में आ गए। विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेट्री और डायरेक्टर डीपी लोहचन ने वीडियो कांफ्रेंस से सीएमओ और डिप्टी सीएमओ से सीधी बात की।
अधिकारियों ने डेंगू और दूसरी बीमारियों को तुरंत कंट्रोल करने के आदेश दिए और बजट की मांग को तुरंत मंजूर कर दिया।
शहर की खादी कॉलोनी में संदिग्ध डेंगू के चलते एक व्यक्ति की मौत हो गई। परिजनों के अनुसार सुनील को दो-तीन से बुखार था और उसको शहर के कई अस्पतालों में दाखिल कराया।
अस्पतालों में उसे डेंगू से पीड़ित बताया था। बुधवार को 35 वर्षीय सुनील की तबीयत बिगड़ गई और उसको रेफर कर दिया। वे उसे रोहतक ले गए थे।
जहां उसकी मौत हो गई। लोगों ने बताया कि उसकी एक लड़की और एक लड़का है और वह फैक्ट्री में नौकरी कर गुजारा कर रहा था। सुनील की मौत के बाद जिले में इस तरह से मरने वालों का आंकड़ा आठ पहुंच है। बीते दिन जाटल रोड पर एक छात्र की मौत हो गई थी। उसको भी डेंगू से पीड़ित बताया था।
स्वास्थ्य विभाग ने फॉगिंग कार्य को तेज कर दिया है। पांच छोटी मशीनों के साथ एक बड़ी मशीन भी शुरू कर दी है। अधिकारियों का दावा है कि बड़ी मशीन तीन दिन में पूरे शहर को कवर कर देगी और समालखा कस्बे और खंड के कई गांवों में भी इस बीच फॉगिंग कराई जाएगी।
निदेशालय की ओर से वेक्टर कंट्रोल एक्ट के तहत साढ़े छह लाख का बजट मंजूर कर दिया है। जिला प्रशासन ने नगर निगम के माध्यम फॉगिंग के तेल खर्च के लिए एक लाख रुपये दिए हैं। अब शहर समेत पूरे जिले में आसानी के साथ फॉगिंग का कार्य बेरोकटोक चलेगा।
मरीज का नाम प्राइवेट लैब सरकारी लैब
बबली 41,000 59,000
धर्म सिंह 24,000 40,000
संधु 33,000 60,000
मनोज 60,000 98,000
पिंकी 32,000 70,000
इंद्र 26,000 64,000
निर्मला 2,14,000 2,10,000
कमलेश 70,000 90,000
नोट: मरीजों के प्लेटलेट्स का प्राइवेट और सरकारी लैब का अंतर स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार है।
निजी अस्पताल में इलाज और जांच के रेट फिक्स होने की पॉलिसी नहीं है। कुछ अस्पताल संचालक इसका फायदा उठाकर मनमाने ढंग से पैसे कमा रहे हैं।
एक अधिकारी ने बताया कि जल्द ही अस्पतालों का नया एक्ट बनकर आ जाएगा। इसके बाद सब अस्पताल पूरी तरह से सीएमओ के अधीन होंगे और किसी तरह की लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की जा सकेगी।
स्वास्थ्य विभाग के पास टेक्नीकल मैलाथियोन पर्याप्त नहीं थी। यह प्राथमिक स्तर पर 50 किलोग्राम थी। विभागीय अधिकारी भी इसको पर्याप्त मानकर चल रहे थे लेकिन डेंगू के पांव पसारने के बाद विभाग ने 40 किलोग्राम और दवा मंगा ली है।
जिले के डेंगू से संभावित मरीजों का करनाल के बजाय अपने जिले की रेडक्रॉस में जांच होंगी। यहीं से जरूरत पड़ने पर प्लेटलेट्स दिए जाएंगे। इसको लेकर पूना से किट मंगवाई जाएंगी। विभागीय अधिकारियों ने किट जल्द ही पहुंच जाने का दावा किया है।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने दावा किया कि सिविल अस्पताल में किसी बीमारी का दूध का दूध और पानी का पानी किया जाता है।
यहां पर डॉ. जोगेंद्र दूहन और डॉ. दीपांशु अच्छे फिजिशियन हैं। लोग किसी तरह का फीवर होने पर सिविल अस्पताल पहुंचें और अपना इलाज कराएं। उनको यहां पर पूरी सुविधा दी जाएगी और डेंगू के संभावित मरीजों का अलग से वार्ड में इलाज किया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग ने जिले में दस टीमों का गठन किया है। इससे पहले छह टीम जिले में नियमित रूप से काम कर रही हैं। इन टीमों का एमपीएचडब्ल्यू नेतृत्व करेगा। इसमें एक वर्कर और एक एएनएम भी होगी।
स्वास्थ्य विभाग निजी अस्पतालों के साथ लोगों के साथ भी सख्ती से निपटने का फैसला लिया है। डिप्टी सीएमओ डॉ. शशि गर्ग ने बताया कि मकान और दुकान में पानी जमा हो जाता है।
लोग उसको साफ नहीं करते और यहां पर डेंगू का लारवा बन जाता है। स्वास्थ्य विभाग मकानों और दुकानों में पहुंचकर जांच करेगा और किसी तरह का लारवा मिलने पर संबंधित व्यक्ति को नोटिस जारी किया जाएगा। इसमें दो सौ से दो हजार रुपये तक जुर्माना होगा।
कूलर का पानी रोजाना बदलें और हफ्ते में एक दिन सुखाएं।
पानी की टंकियों पर ढक्कन रखें या फिर अच्छी तरह से कपड़ा बांधे।
मकान या दुकानों की छतों पर बेकार का सामान, टायर और खाली बोतल में पानी जमा न होने दें।
फ्रिज की ट्रे में पानी जमा न होने दें। इसको समय-समय पर खाली करना चाहिए।
व्यक्ति पूरे बाजू के कपड़े पहनें।
व्यक्ति मच्छरदानी या मच्छरमार क्वाइल का दिन के वक्त भी इस्तेमाल करें।
कुछ प्राइवेट अस्पताल संचालक डॉक्टर अपनी जेब भरने के लिए उल्टी सीधी रिपोर्ट बना रहे हैं। ऐसे डॉक्टरों को चेतावनी दी है। निजी अस्पताल की ओर से लैब जारी रिपोर्ट के लोगों का सिविल अस्पताल की लैब में जांच कर मिलान किया। इसमें काफी अंतर पाया गया। स्वास्थ्य विभाग ने अपने स्तर पर भी फॉगिंग शुरू कर दी है। लोगों को इस तरह की बीमारी से घबराने के बजाय जागरूकता लानी चाहिए। वे बुखार को डेंगू न समझे और सिविल अस्पताल में अपना इलाज कराएं।
डॉ. इंद्रजीत धनखड़, सीएमओ, पानीपत
उसे शहर के कई प्राइवेट अस्पतालों के बाद रोहतक में इलाज को ले जाया जा रहा था। जिले में इस तरह से मरने वालों की संख्या आठ हो गई है। स्वास्थ्य विभाग अब भी डेंगू से किसी की मौत होने से इनकार कर रहा है।
स्वास्थ्य विभाग ने साफ शब्दों में डेंगू के हौवे को कुछ प्राइवेट अस्पताल संचालक डॉक्टरों की देन बताया है। विभाग ने मॉडल टाउन स्थित एक प्राइवेट अस्पताल और सरकारी अस्पताल की मरीजों की लैब रिपोर्ट को भी सार्वजनिक किया है।
प्रदेश में डेंगू फैलने के बाद स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारी हरकत में आ गए। विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेट्री और डायरेक्टर डीपी लोहचन ने वीडियो कांफ्रेंस से सीएमओ और डिप्टी सीएमओ से सीधी बात की।
अधिकारियों ने डेंगू और दूसरी बीमारियों को तुरंत कंट्रोल करने के आदेश दिए और बजट की मांग को तुरंत मंजूर कर दिया।
शहर की खादी कॉलोनी में संदिग्ध डेंगू के चलते एक व्यक्ति की मौत हो गई। परिजनों के अनुसार सुनील को दो-तीन से बुखार था और उसको शहर के कई अस्पतालों में दाखिल कराया।
अस्पतालों में उसे डेंगू से पीड़ित बताया था। बुधवार को 35 वर्षीय सुनील की तबीयत बिगड़ गई और उसको रेफर कर दिया। वे उसे रोहतक ले गए थे।
जहां उसकी मौत हो गई। लोगों ने बताया कि उसकी एक लड़की और एक लड़का है और वह फैक्ट्री में नौकरी कर गुजारा कर रहा था। सुनील की मौत के बाद जिले में इस तरह से मरने वालों का आंकड़ा आठ पहुंच है। बीते दिन जाटल रोड पर एक छात्र की मौत हो गई थी। उसको भी डेंगू से पीड़ित बताया था।
स्वास्थ्य विभाग ने फॉगिंग कार्य को तेज कर दिया है। पांच छोटी मशीनों के साथ एक बड़ी मशीन भी शुरू कर दी है। अधिकारियों का दावा है कि बड़ी मशीन तीन दिन में पूरे शहर को कवर कर देगी और समालखा कस्बे और खंड के कई गांवों में भी इस बीच फॉगिंग कराई जाएगी।
निदेशालय की ओर से वेक्टर कंट्रोल एक्ट के तहत साढ़े छह लाख का बजट मंजूर कर दिया है। जिला प्रशासन ने नगर निगम के माध्यम फॉगिंग के तेल खर्च के लिए एक लाख रुपये दिए हैं। अब शहर समेत पूरे जिले में आसानी के साथ फॉगिंग का कार्य बेरोकटोक चलेगा।
मरीज का नाम प्राइवेट लैब सरकारी लैब
बबली 41,000 59,000
धर्म सिंह 24,000 40,000
संधु 33,000 60,000
मनोज 60,000 98,000
पिंकी 32,000 70,000
इंद्र 26,000 64,000
निर्मला 2,14,000 2,10,000
कमलेश 70,000 90,000
नोट: मरीजों के प्लेटलेट्स का प्राइवेट और सरकारी लैब का अंतर स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार है।
निजी अस्पताल में इलाज और जांच के रेट फिक्स होने की पॉलिसी नहीं है। कुछ अस्पताल संचालक इसका फायदा उठाकर मनमाने ढंग से पैसे कमा रहे हैं।
एक अधिकारी ने बताया कि जल्द ही अस्पतालों का नया एक्ट बनकर आ जाएगा। इसके बाद सब अस्पताल पूरी तरह से सीएमओ के अधीन होंगे और किसी तरह की लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की जा सकेगी।
स्वास्थ्य विभाग के पास टेक्नीकल मैलाथियोन पर्याप्त नहीं थी। यह प्राथमिक स्तर पर 50 किलोग्राम थी। विभागीय अधिकारी भी इसको पर्याप्त मानकर चल रहे थे लेकिन डेंगू के पांव पसारने के बाद विभाग ने 40 किलोग्राम और दवा मंगा ली है।
जिले के डेंगू से संभावित मरीजों का करनाल के बजाय अपने जिले की रेडक्रॉस में जांच होंगी। यहीं से जरूरत पड़ने पर प्लेटलेट्स दिए जाएंगे। इसको लेकर पूना से किट मंगवाई जाएंगी। विभागीय अधिकारियों ने किट जल्द ही पहुंच जाने का दावा किया है।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने दावा किया कि सिविल अस्पताल में किसी बीमारी का दूध का दूध और पानी का पानी किया जाता है।
यहां पर डॉ. जोगेंद्र दूहन और डॉ. दीपांशु अच्छे फिजिशियन हैं। लोग किसी तरह का फीवर होने पर सिविल अस्पताल पहुंचें और अपना इलाज कराएं। उनको यहां पर पूरी सुविधा दी जाएगी और डेंगू के संभावित मरीजों का अलग से वार्ड में इलाज किया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग ने जिले में दस टीमों का गठन किया है। इससे पहले छह टीम जिले में नियमित रूप से काम कर रही हैं। इन टीमों का एमपीएचडब्ल्यू नेतृत्व करेगा। इसमें एक वर्कर और एक एएनएम भी होगी।
स्वास्थ्य विभाग निजी अस्पतालों के साथ लोगों के साथ भी सख्ती से निपटने का फैसला लिया है। डिप्टी सीएमओ डॉ. शशि गर्ग ने बताया कि मकान और दुकान में पानी जमा हो जाता है।
लोग उसको साफ नहीं करते और यहां पर डेंगू का लारवा बन जाता है। स्वास्थ्य विभाग मकानों और दुकानों में पहुंचकर जांच करेगा और किसी तरह का लारवा मिलने पर संबंधित व्यक्ति को नोटिस जारी किया जाएगा। इसमें दो सौ से दो हजार रुपये तक जुर्माना होगा।
कूलर का पानी रोजाना बदलें और हफ्ते में एक दिन सुखाएं।
पानी की टंकियों पर ढक्कन रखें या फिर अच्छी तरह से कपड़ा बांधे।
मकान या दुकानों की छतों पर बेकार का सामान, टायर और खाली बोतल में पानी जमा न होने दें।
फ्रिज की ट्रे में पानी जमा न होने दें। इसको समय-समय पर खाली करना चाहिए।
व्यक्ति पूरे बाजू के कपड़े पहनें।
व्यक्ति मच्छरदानी या मच्छरमार क्वाइल का दिन के वक्त भी इस्तेमाल करें।
कुछ प्राइवेट अस्पताल संचालक डॉक्टर अपनी जेब भरने के लिए उल्टी सीधी रिपोर्ट बना रहे हैं। ऐसे डॉक्टरों को चेतावनी दी है। निजी अस्पताल की ओर से लैब जारी रिपोर्ट के लोगों का सिविल अस्पताल की लैब में जांच कर मिलान किया। इसमें काफी अंतर पाया गया। स्वास्थ्य विभाग ने अपने स्तर पर भी फॉगिंग शुरू कर दी है। लोगों को इस तरह की बीमारी से घबराने के बजाय जागरूकता लानी चाहिए। वे बुखार को डेंगू न समझे और सिविल अस्पताल में अपना इलाज कराएं।
डॉ. इंद्रजीत धनखड़, सीएमओ, पानीपत