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बिजली निगम सख्त, लार्ज सप्लाई कनेक्शनों की ऑनलाइन रीडिंग
ब्यूरो/अमर उजाला पानीपत
Updated Sat, 05 Sep 2015 11:52 PM IST
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पानीपत। बिजली चोरी को रोकने के लिए निगम ने लार्ज सप्लाई कनेक्शनों पर शिकंजा कस दिया है। अब इन कनेक्शनों की रीडिंग पंचकूला में ऑनलाइन रिकॉर्ड होगी।
इससे बोगस मीटर रीडिंग और गलत बिल बनने की समस्या से निजात मिलेगी। निगम ने लार्ज सप्लाई (एलएस) के सभी कनेक्शनों पर लगे मीटरों को जीपीएस सिस्टम से जोड़कर सीधा निगम के हेडक्वार्टर पंचकूला से जोड़ दिया है।
अब उन मीटरों की रीडिंग और बिल सीधे हेडक्वार्टर से ही बनकर आएंगे। इसमें गलतियों की गुंजाइश नहीं होगी। निगम अक्तूबर से इस योजना को लागू करने जा रहा है।
इस सिस्टम के लागू होने से एसडीओ और जेई का वर्कलोड कम होगा। वहीं मीटर के जंप करने या बोगस रीडिंग से मीटर में होने वाली गड़बड़ी भी नहीं होगी। यही नहीं यदि इस दौरान मीटर से कोई छेड़छाड़ होगी तो उसकी जानकारी भी सीधे निगम तक पहुंच जाएगी।
निगम की इस योजना से चोरी की मामलों में भी कमी आएगी। हर माह गलत रीडिंग से बिलों में होने वाली गड़बड़ी और मीटर जंप करने से हजारों की संख्या में यूनिट आने से बनने वाले लाखों के बिलों को ठीक करवाने के झंझट से मुक्ति मिलेगी। निगम ने इस योजना को इसी माह से लागू करने का निर्णय लिया है। इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली है।
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पानीपत सर्कल में एलएस के 210 कनेक्शन हैं। इनकी टोटल बिजली कंज्यूमिंग लोड करीब तीन लाख 62 हजार किलोवाट है।
इनसे निगम को हर माह करीब 35 करोड़ रुपये का रेवेन्यू आता है। निगम ने उन उपभोक्ता ओं को बेहतर सुविधा देने के लिए संपूर्ण प्रक्रिया को ऑनलाइन कर जिम्मेदारी ली है। इससे उपभोक्ताओं को अब बिलों में गड़बड़ी से संबधित शिकायत भी न के बराबर होगी।
निगम की ओर से करीब तीन साल पहले वर्ष 2012 में इस योजना की शुरुआत की थी। इसमें 50 किलोवाट से अधिक क्षमता वाले कनेक्शनों पर जीपीएस सिस्टम लगाए थे। लेकिन निगम सिस्टम को ठीक ढंग से मेंटेन नहीं कर पाया था।
इससे कई मीटरों के मॉडम खराब हो गए। निगम ने फिर उन मीटरों की ऑपलाइन मैनुअल रीडिंग लेनी शुरू कर दी थी।
लेकिन निगम अब इस योजना को नए सिरे से शुरू करने जा रहा है। इस बार 20 किलोवाट क्षमता से ऊपर के कनेक्शनों को जीपीएस सिस्टम से जोड़ने की योजना बनाई है। निगम की यह योजना अब आखिरी चरण में है। इसका अगले माह तक शुरू होने की संभावना है।
ऑनलाइन रीडिंग से ये होंगे फायदे
ऑनलाइन रीडिंग होने से बोगस रीडिंग के चांस कम होंगे।
मीटर में गड़बड़ी होते ही निगम और उपभोक्ता को मिलेगी सूचना।
उपभोक्ता मीटर से नहीं कर सकेंगे छेड़छाड़, बिजली चोरी में होगी कमी
बिलों के आने में नहीं होगी देरी, निर्धारित तिथि पर ही उपभोक्ता को मिलेंगे बिल।
मीटर के जंप करने पर भी नहीं बनेंगे गलत बिल, उपभोक्ताओं की परेशानियां होगी कम
बिलों की संपूर्ण प्रक्रिया ऑनलाइन होने से निगम का वर्कलोड कम होगा।
बिजली निगम का यह सराहनीय कदम है। इससे बिलों मेें कोई गड़बड़ी नहीं होगी। एक बार बिल गलत हो जाए तो उसे ठीक करवाने में ही कई महीने लग जाते हैं। जिससे उपभोक्ताओं को परेशानी झेलनी पड़ती है।
चंदन विज उद्योगपति।
बिजली बिलों में सबसे अधिक गड़बड़ी बोगस रीडिंग व मीटर जंप करने की होती है। लेकिन अब संपूर्ण प्रक्रिया ऑनलाइन होने से इस समस्या का समाधान हो जाएगा।
रमेश वर्मा, उद्योगपति।
एलएस कनेक्शनों के जिन मीटरों पर जीपीएस सिस्टम और मॉडम नहीं लगा है, उसका डाटा तैयार किया है। इस माह तक सभी मीटरों को जीपीएस सिस्टम से जोड़ दिया जाएगा। अब 20 से 50 किलोवाट क्षमता के कनेक्शनों को भी जोड़ा जाएगा।
केके गर्ग, कार्यकारी अभियंता एमएंडपी, करनाल सर्कल।
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इससे बोगस मीटर रीडिंग और गलत बिल बनने की समस्या से निजात मिलेगी। निगम ने लार्ज सप्लाई (एलएस) के सभी कनेक्शनों पर लगे मीटरों को जीपीएस सिस्टम से जोड़कर सीधा निगम के हेडक्वार्टर पंचकूला से जोड़ दिया है।
अब उन मीटरों की रीडिंग और बिल सीधे हेडक्वार्टर से ही बनकर आएंगे। इसमें गलतियों की गुंजाइश नहीं होगी। निगम अक्तूबर से इस योजना को लागू करने जा रहा है।
इस सिस्टम के लागू होने से एसडीओ और जेई का वर्कलोड कम होगा। वहीं मीटर के जंप करने या बोगस रीडिंग से मीटर में होने वाली गड़बड़ी भी नहीं होगी। यही नहीं यदि इस दौरान मीटर से कोई छेड़छाड़ होगी तो उसकी जानकारी भी सीधे निगम तक पहुंच जाएगी।
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निगम की इस योजना से चोरी की मामलों में भी कमी आएगी। हर माह गलत रीडिंग से बिलों में होने वाली गड़बड़ी और मीटर जंप करने से हजारों की संख्या में यूनिट आने से बनने वाले लाखों के बिलों को ठीक करवाने के झंझट से मुक्ति मिलेगी। निगम ने इस योजना को इसी माह से लागू करने का निर्णय लिया है। इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली है।
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पानीपत सर्कल में एलएस के 210 कनेक्शन हैं। इनकी टोटल बिजली कंज्यूमिंग लोड करीब तीन लाख 62 हजार किलोवाट है।
इनसे निगम को हर माह करीब 35 करोड़ रुपये का रेवेन्यू आता है। निगम ने उन उपभोक्ता ओं को बेहतर सुविधा देने के लिए संपूर्ण प्रक्रिया को ऑनलाइन कर जिम्मेदारी ली है। इससे उपभोक्ताओं को अब बिलों में गड़बड़ी से संबधित शिकायत भी न के बराबर होगी।
निगम की ओर से करीब तीन साल पहले वर्ष 2012 में इस योजना की शुरुआत की थी। इसमें 50 किलोवाट से अधिक क्षमता वाले कनेक्शनों पर जीपीएस सिस्टम लगाए थे। लेकिन निगम सिस्टम को ठीक ढंग से मेंटेन नहीं कर पाया था।
इससे कई मीटरों के मॉडम खराब हो गए। निगम ने फिर उन मीटरों की ऑपलाइन मैनुअल रीडिंग लेनी शुरू कर दी थी।
लेकिन निगम अब इस योजना को नए सिरे से शुरू करने जा रहा है। इस बार 20 किलोवाट क्षमता से ऊपर के कनेक्शनों को जीपीएस सिस्टम से जोड़ने की योजना बनाई है। निगम की यह योजना अब आखिरी चरण में है। इसका अगले माह तक शुरू होने की संभावना है।
ऑनलाइन रीडिंग से ये होंगे फायदे
ऑनलाइन रीडिंग होने से बोगस रीडिंग के चांस कम होंगे।
मीटर में गड़बड़ी होते ही निगम और उपभोक्ता को मिलेगी सूचना।
उपभोक्ता मीटर से नहीं कर सकेंगे छेड़छाड़, बिजली चोरी में होगी कमी
बिलों के आने में नहीं होगी देरी, निर्धारित तिथि पर ही उपभोक्ता को मिलेंगे बिल।
मीटर के जंप करने पर भी नहीं बनेंगे गलत बिल, उपभोक्ताओं की परेशानियां होगी कम
बिलों की संपूर्ण प्रक्रिया ऑनलाइन होने से निगम का वर्कलोड कम होगा।
बिजली निगम का यह सराहनीय कदम है। इससे बिलों मेें कोई गड़बड़ी नहीं होगी। एक बार बिल गलत हो जाए तो उसे ठीक करवाने में ही कई महीने लग जाते हैं। जिससे उपभोक्ताओं को परेशानी झेलनी पड़ती है।
चंदन विज उद्योगपति।
बिजली बिलों में सबसे अधिक गड़बड़ी बोगस रीडिंग व मीटर जंप करने की होती है। लेकिन अब संपूर्ण प्रक्रिया ऑनलाइन होने से इस समस्या का समाधान हो जाएगा।
रमेश वर्मा, उद्योगपति।
एलएस कनेक्शनों के जिन मीटरों पर जीपीएस सिस्टम और मॉडम नहीं लगा है, उसका डाटा तैयार किया है। इस माह तक सभी मीटरों को जीपीएस सिस्टम से जोड़ दिया जाएगा। अब 20 से 50 किलोवाट क्षमता के कनेक्शनों को भी जोड़ा जाएगा।
केके गर्ग, कार्यकारी अभियंता एमएंडपी, करनाल सर्कल।