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बिजली निगम कार्यालय पर ठेकेदारों का कब्जा!
अमर उजाला ब्यूरो/पानीपत
Updated Fri, 16 May 2014 12:22 AM IST
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उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम के पानीपत सर्कल कार्यालय पर आजकल ठेकेदारों का कब्जा है। यहां पर कार्यालयों में बिजली कर्मचारियों की बजाय कुछ ठेकेदार और दलाल ज्यादा चक्कर काटते नजर आएंगे।
ये ठेकेदार अपने निजी कार्य निपटाने के साथ-साथ विभाग के कई कार्यों में रुचि लेते देखे जा सकते हैं। दिनभर कार्यालय में ठेकेदाराें के रहने के कारण सरकारी कामकाज प्रभावित हो रहे हैं।
इससे कर्मचारियों और उपभोक्ताओं को परेशानी होती है। अधिकारी इससे वाकिफ होने के बाद भी ठोस कदम नहीं उठा रहे।
दो सौ मीटर दूर होने चाहिए ठेकेदाराें के कार्यालय
नियमानुसार ठेकेदारों के अपने निजी कार्यालय सरकारी कार्यालय से करीब दो सौ मीटर दूर होने चाहिए, जबकि पानीपत सर्कल कार्यालय मेेें ऐसा नहीं है।
यहां पर तो सरकारी कार्यालय को ही अपना कार्यालय मानकर कई ठेकेदार मौज कर रहे हैं। न तो किसी ठेकेदार को कार्यालय के किराए की चिंता सताती है और न ही अपने कार्यालय से सरकारी कार्यालय तक आने का झंझट।
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निगम कर्मचारियों के आसपास बैठकर ही निपटाते हैं अपने काम
ठेकेदाराें के हौसले यहीं कम नहीं होते। कार्यालय में दिनभर रहने वाले कई ठेकेदार यहीं पर ही सरकारी कर्मचारियों की बगल में बैठकर अपने काम निपटाते हैं।
यह गोरखधंधा सरेआम चल रहा है। ठेकेदार दिनभर कार्यालय में रहने के कारण सरकारी काम तो प्रभावित होता है ही साथ ही उपभोक्ताओं को भी दिनभर परेशानी होती है।
दलाली में जुटे हैं कई ठेकेदार
चर्चा है कि कई ठेकेदार दलाली मेें भी जुटे रहते हैं। ये ऐसे उपभोक्ताओं की तलाश में रहते हैं, जिन्हें नया कनेक्शन लगावाना है, अपना खराब मीटर बदलवाना है, खेतों मेेें ट्रांसफार्मर रखवाना है।
ऐसे उपभोक्ताओं के मिलने पर सेटिंग कर खूब चांदी कूट रहे हैं। निगम कार्यालय में यह कथित गोरखधंधा कई अधिकारियों की मिलीभगत के कारण ही चल रहा है। बिना अधिकारियों के शह परये ठेेकदार कार्यालय में दिनभर नहीं रह सकते।
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ये ठेकेदार अपने निजी कार्य निपटाने के साथ-साथ विभाग के कई कार्यों में रुचि लेते देखे जा सकते हैं। दिनभर कार्यालय में ठेकेदाराें के रहने के कारण सरकारी कामकाज प्रभावित हो रहे हैं।
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इससे कर्मचारियों और उपभोक्ताओं को परेशानी होती है। अधिकारी इससे वाकिफ होने के बाद भी ठोस कदम नहीं उठा रहे।
दो सौ मीटर दूर होने चाहिए ठेकेदाराें के कार्यालय
नियमानुसार ठेकेदारों के अपने निजी कार्यालय सरकारी कार्यालय से करीब दो सौ मीटर दूर होने चाहिए, जबकि पानीपत सर्कल कार्यालय मेेें ऐसा नहीं है।
यहां पर तो सरकारी कार्यालय को ही अपना कार्यालय मानकर कई ठेकेदार मौज कर रहे हैं। न तो किसी ठेकेदार को कार्यालय के किराए की चिंता सताती है और न ही अपने कार्यालय से सरकारी कार्यालय तक आने का झंझट।
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निगम कर्मचारियों के आसपास बैठकर ही निपटाते हैं अपने काम
ठेकेदाराें के हौसले यहीं कम नहीं होते। कार्यालय में दिनभर रहने वाले कई ठेकेदार यहीं पर ही सरकारी कर्मचारियों की बगल में बैठकर अपने काम निपटाते हैं।
यह गोरखधंधा सरेआम चल रहा है। ठेकेदार दिनभर कार्यालय में रहने के कारण सरकारी काम तो प्रभावित होता है ही साथ ही उपभोक्ताओं को भी दिनभर परेशानी होती है।
दलाली में जुटे हैं कई ठेकेदार
चर्चा है कि कई ठेकेदार दलाली मेें भी जुटे रहते हैं। ये ऐसे उपभोक्ताओं की तलाश में रहते हैं, जिन्हें नया कनेक्शन लगावाना है, अपना खराब मीटर बदलवाना है, खेतों मेेें ट्रांसफार्मर रखवाना है।
ऐसे उपभोक्ताओं के मिलने पर सेटिंग कर खूब चांदी कूट रहे हैं। निगम कार्यालय में यह कथित गोरखधंधा कई अधिकारियों की मिलीभगत के कारण ही चल रहा है। बिना अधिकारियों के शह परये ठेेकदार कार्यालय में दिनभर नहीं रह सकते।