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माकपा, भाकपा ने नोटबंदी के विरोध में फूंका सरकार का पुतला
ब्यूरो/अमर उजाला/ पानीपत
Updated Tue, 29 Nov 2016 12:37 AM IST
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पानीपत
- फोटो : bureau
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वामपंथी पार्टी माकपा और भाकपा ने नोटबंदी के विरोध में लघु सचिवालय के बाहर केंद्र सरकार का पुतला फूंका। इस दौरान उन्होंने सरकार के इस फैसले को जनता विरोधी करार दिया।
वामपंथी पार्टियों ने सोमवार को लघु सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को जनता की परेशानियों के बारे में बताया।
माकपा के जिला सचिव कामरेड सुनील दत्त और भाकपा के जिला कार्यकारी सचिव सेवाराम मलिक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर को 500 और एक हजार के पुराने नोटों का प्रचलन बंद कर दिया।
लेकिन, सरकार ने इसके लिए कोई व्यवस्था नहीं की। इसका जनता को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। कहा कि इसकी वैकल्पिक स्थायी व्यवस्था होने तक रोजमर्रा के जरूरी कार्यों के लिए पुराने नोटों का चलन जारी रखा जाए।
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किसानों का कर्ज माफ किया जाए। दोहरी कर प्रणाली वाली संधियों को खत्म किया जाए। नोटबंदी के चलते मारे गए लोगों के आश्रित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए।
इससे पहले माकपा और भाकपा के कार्यकर्ता गीता कॉलोनी स्थित कार्यालय पर एकत्रित हुए। यहां से प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। इस मौके पर जिला कमेटी सदस्य आनंद ज्वारा, राजेंद्र राणा, मामचंद, जमशेद राणा आदि मौजूद रहे।
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वामपंथी पार्टियों ने सोमवार को लघु सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को जनता की परेशानियों के बारे में बताया।
माकपा के जिला सचिव कामरेड सुनील दत्त और भाकपा के जिला कार्यकारी सचिव सेवाराम मलिक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर को 500 और एक हजार के पुराने नोटों का प्रचलन बंद कर दिया।
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लेकिन, सरकार ने इसके लिए कोई व्यवस्था नहीं की। इसका जनता को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। कहा कि इसकी वैकल्पिक स्थायी व्यवस्था होने तक रोजमर्रा के जरूरी कार्यों के लिए पुराने नोटों का चलन जारी रखा जाए।
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किसानों का कर्ज माफ किया जाए। दोहरी कर प्रणाली वाली संधियों को खत्म किया जाए। नोटबंदी के चलते मारे गए लोगों के आश्रित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए।
इससे पहले माकपा और भाकपा के कार्यकर्ता गीता कॉलोनी स्थित कार्यालय पर एकत्रित हुए। यहां से प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। इस मौके पर जिला कमेटी सदस्य आनंद ज्वारा, राजेंद्र राणा, मामचंद, जमशेद राणा आदि मौजूद रहे।