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बैंक की लाइन से ऑलाइन की ओर बढ़ रहे लोग
ब्यूरो/अमर उजाला/ पानीपत
Updated Sun, 11 Dec 2016 11:55 PM IST
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पानीपत
- फोटो : bureau
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डिजिटल बैंकिंग की तरफ शहर के लोग बढ़ने लगे हैं। शहर में हर रोज करीब 60 से भी अधिक लोग नेट बैंकिंग से जुुड़ रहे है। नेट बैंकिंग की जानकारी के लिए प्रतिदिन 90 से अधिक लोग बैंकों में संपर्क कर रहे हैं। इन 90 में से 60 से अधिक लोग ऐसे हैं, जो उसी वक्त अपना फार्म भर रहे हैं।
इसके लिए बैंक भी पूरी तरह से तैयार हैं। इस संबंध में जागरूकता लाने की पहल जीटी रोड स्थित एसबीआई बैंक ने की थी। उसने अपने बैंक के मेन गेट पर डिजिटल बैंकिंग की जानकारी देने और नेट बैंकिंग का फॉर्म भरवाने की व्यवस्था की थी। बैंक में स्टाल लगाकर नेट बैंकिंग के बारे में जानकारी दी जा रही है।
नोटबंदी के बाद पहले कैशलेस और अब डिजिटल बैंकिंग का दौर चल रहा है। बैंक उपभोक्ता भी इसको अपनाने लगे हैं। जिले में हजारों की संख्या में उपभोक्ता ही नेट बैंकिंग का उपयोग कर रहे थे। लेकिन, आठ नवंबर के बाद से नेट बैंकिंग की तरफ लोगों का रुझान बढ़ने लगा है।
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इसका ही नतीजा है कि अब जिले में नेट बैंकिंग उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या 25 हजार से ज्यादा हो गई है। यह संख्या लगातार बढ़ रही है। छोटी दुकानों से लेकर बड़े शोरूमों में स्वैप मशीन लगने लगी हैं। इसके साथ ही आम लोग नेट बैंकिंग की ओर बढ़ रहे हैं।
जिले में कुल 43 बैंक हैं। इनकी 243 शाखाएं हैं। इनमें 20 लाख से अधिक उपभोक्ता हैं।
बैंकों में साध रहे संपर्क
कैशलेस ट्रांजेक्शन को लेकर शहर के लोग बैंकों में संपर्क कर रहे हैं। नोटबंदी के बाद अब बैंकों में बड़ी संख्या में खाते खुलने लगे हैं। आठ नवंबर के बाद बैंकों में खुल रहे खाते डिजिटल बैंकिंग के आधार पर खोले जा रहे हैं।
कई बैंकों ने लगाए अलग से काउंटर
जिले के बैंकों ने अपने यहां डिजिटल बैंकिंग की जानकारी देने के लिए अलग से काउंटर ला दिए हैं। इन काउंटर्स पर सभी कार्य डिजिटल तरीके हो रहे हैं। जीटी रोड स्थित एसबीआई बैंक की मेन ब्रांच ने सबसे पहले इस दिशा में कदम उठाया था।
यहां पर बैंक के बाहर नेट बैंकिंग, एसबीआई बडी, एसबीआई पे और एनयूयूपी की जानकारी दी जा रही है। लोगों के तुरंत फोर्म भरकर उन्हें नेट बैंकिंग की सुविधा दी जा रही है।
उपभोक्ताओं को भरना होता है फार्म
उपभोक्ताओं को सामान्य बैंक अकाउंट से नेट बैंकिंग शुरू करने के लिए एक फॉर्म भरकर देना होता है। इस फॉर्म की जानकारी को बैंक कर्मचारी कंप्यूटर में फीड कर देता है। इसके बाद ही उपभोक्ता नेट बैंकिंग शुरू कर सकता है।
खास बात यह है कि अपने खाते की पूरी डिटेल देने के मात्र दस मिनट बाद ही आपकी नेट बैंकिंग शुरू हो जाती है। इसके बाद आपकी पास बुक में एंट्री करवाने की भी जरूरत नहीं है। खाते की सारी डिटेल आप अपने कंप्यूटर या मोबाइल पर ले सकते हैं।
बैंक देता है किट
नेट बैंकिंग शुरू होते ही उपभोक्ताओं को बैंक की और से एक किट दी जाती है। इसमें आईडी और पासवर्ड होता है। इनका उपयोग करने के बाद ही उपभोक्ता नेट बैंकिंग शुरू कर सकता है।
गांवों की पंचायतों को कर रहे जागरूक
जिले के लीड बैंक के अधिकारी और कर्मचारी गांवों में जाकर पंचायत की सहायता से लोगों को नेट बैंकिंग की जानकारी दे रहे हैं। ग्रामीणों समझाया जा रहा है कि वे किस तरह घर बैठे ही अपने पैसे पूरी दुनियां में कहीं भी भेज सकते हैं।
इसके साथ ही पेंशन की जानकारी भी घर बैठे दे सकते हैं। इसके लिए बैंकों में हर रोज धक्के खाने की जरूरत नहीं है।
जिले के बैंक अधिकारी गांवों में जाकर पंचायतों को और गांवों के लोगों को डिजिटल बैंकिंग की जानकारी दे रहे हैं। इसमें सफलता भी मिल रही है। सबसे पहले हमारा काम गांव के सरपंच को हाई टेक करना है। उसके बाद ग्रामीण अपने आप ही डिजिटल बैंकिंग ओर बढ़नरे लगेंगे। हर रोज 60 से भी अधिक लोग नेट बैंकिंग ले रहे हैं।
राकेश वर्मा, एलडीएम, पानीपत।
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इसके लिए बैंक भी पूरी तरह से तैयार हैं। इस संबंध में जागरूकता लाने की पहल जीटी रोड स्थित एसबीआई बैंक ने की थी। उसने अपने बैंक के मेन गेट पर डिजिटल बैंकिंग की जानकारी देने और नेट बैंकिंग का फॉर्म भरवाने की व्यवस्था की थी। बैंक में स्टाल लगाकर नेट बैंकिंग के बारे में जानकारी दी जा रही है।
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नोटबंदी के बाद पहले कैशलेस और अब डिजिटल बैंकिंग का दौर चल रहा है। बैंक उपभोक्ता भी इसको अपनाने लगे हैं। जिले में हजारों की संख्या में उपभोक्ता ही नेट बैंकिंग का उपयोग कर रहे थे। लेकिन, आठ नवंबर के बाद से नेट बैंकिंग की तरफ लोगों का रुझान बढ़ने लगा है।
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इसका ही नतीजा है कि अब जिले में नेट बैंकिंग उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या 25 हजार से ज्यादा हो गई है। यह संख्या लगातार बढ़ रही है। छोटी दुकानों से लेकर बड़े शोरूमों में स्वैप मशीन लगने लगी हैं। इसके साथ ही आम लोग नेट बैंकिंग की ओर बढ़ रहे हैं।
जिले में कुल 43 बैंक हैं। इनकी 243 शाखाएं हैं। इनमें 20 लाख से अधिक उपभोक्ता हैं।
बैंकों में साध रहे संपर्क
कैशलेस ट्रांजेक्शन को लेकर शहर के लोग बैंकों में संपर्क कर रहे हैं। नोटबंदी के बाद अब बैंकों में बड़ी संख्या में खाते खुलने लगे हैं। आठ नवंबर के बाद बैंकों में खुल रहे खाते डिजिटल बैंकिंग के आधार पर खोले जा रहे हैं।
कई बैंकों ने लगाए अलग से काउंटर
जिले के बैंकों ने अपने यहां डिजिटल बैंकिंग की जानकारी देने के लिए अलग से काउंटर ला दिए हैं। इन काउंटर्स पर सभी कार्य डिजिटल तरीके हो रहे हैं। जीटी रोड स्थित एसबीआई बैंक की मेन ब्रांच ने सबसे पहले इस दिशा में कदम उठाया था।
यहां पर बैंक के बाहर नेट बैंकिंग, एसबीआई बडी, एसबीआई पे और एनयूयूपी की जानकारी दी जा रही है। लोगों के तुरंत फोर्म भरकर उन्हें नेट बैंकिंग की सुविधा दी जा रही है।
उपभोक्ताओं को भरना होता है फार्म
उपभोक्ताओं को सामान्य बैंक अकाउंट से नेट बैंकिंग शुरू करने के लिए एक फॉर्म भरकर देना होता है। इस फॉर्म की जानकारी को बैंक कर्मचारी कंप्यूटर में फीड कर देता है। इसके बाद ही उपभोक्ता नेट बैंकिंग शुरू कर सकता है।
खास बात यह है कि अपने खाते की पूरी डिटेल देने के मात्र दस मिनट बाद ही आपकी नेट बैंकिंग शुरू हो जाती है। इसके बाद आपकी पास बुक में एंट्री करवाने की भी जरूरत नहीं है। खाते की सारी डिटेल आप अपने कंप्यूटर या मोबाइल पर ले सकते हैं।
बैंक देता है किट
नेट बैंकिंग शुरू होते ही उपभोक्ताओं को बैंक की और से एक किट दी जाती है। इसमें आईडी और पासवर्ड होता है। इनका उपयोग करने के बाद ही उपभोक्ता नेट बैंकिंग शुरू कर सकता है।
गांवों की पंचायतों को कर रहे जागरूक
जिले के लीड बैंक के अधिकारी और कर्मचारी गांवों में जाकर पंचायत की सहायता से लोगों को नेट बैंकिंग की जानकारी दे रहे हैं। ग्रामीणों समझाया जा रहा है कि वे किस तरह घर बैठे ही अपने पैसे पूरी दुनियां में कहीं भी भेज सकते हैं।
इसके साथ ही पेंशन की जानकारी भी घर बैठे दे सकते हैं। इसके लिए बैंकों में हर रोज धक्के खाने की जरूरत नहीं है।
जिले के बैंक अधिकारी गांवों में जाकर पंचायतों को और गांवों के लोगों को डिजिटल बैंकिंग की जानकारी दे रहे हैं। इसमें सफलता भी मिल रही है। सबसे पहले हमारा काम गांव के सरपंच को हाई टेक करना है। उसके बाद ग्रामीण अपने आप ही डिजिटल बैंकिंग ओर बढ़नरे लगेंगे। हर रोज 60 से भी अधिक लोग नेट बैंकिंग ले रहे हैं।
राकेश वर्मा, एलडीएम, पानीपत।