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पानीपत से दिल्ली-एनसीआर को मिलेगी प्रदूषण आजादी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 11 Aug 2022 02:21 AM IST
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Panipat and Delhi-NCR will get freedom from pollution
पानीपत। आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में 2जी एथेनॉल प्लांट बनने से पानीपत समेत दिल्ली-एनसीआर को हर वर्ष स्मॉग की वजह से बनने वाली आपात स्थिति से आजादी मिलने की उम्मीद है। अक्तूबर और नवंबर के दौरान गेहूं एवं आलू की फसल की बुआई के पहले खेत साफ करने के लिए धान के अवशेषों के किसान जला देते हैं। एक तरह यह किसानों की मजबूरी भी है। नतीजा इस दौरान कोहरे में पराली जलाने से उठने वाला धुआं मिलकर स्मॉग बना देता और दिल्ली-एनसीआर का दम घुटने लगता है। अब इससे राहत मिलेगी, क्योंकि किसान पराली को जलाने के बजाय बेच सकेंगे, जिससे एथनॉल बनाया जाएगा।
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वर्ष 2021 में 1644 स्थानों पर जलाई गई थी पराली
हरियाणा अंतरिक्ष उपयोग केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2021 में पराली जलाने के 1644 मामले रिपोर्ट किए हैं। रेवाड़ी, गुरुग्राम, फरीदाबाद, चरखीदादरी, भिवानी, पंचकूला, रोहतक, झज्जर, नूंह और महेंद्रगढ़ में पराली जलाने का कोई मामला सामने नहीं आया था। सबसे अधिक पराली जलाने के मामले जीटी बेल्ट में करनाल, कैथल और कुरुक्षेत्र में सामने आए।
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पिछले वर्ष जीटी बेल्ट में सबसे ज्यादा जली पराली
जिला मामले
कैथल 454
करनाल 516
कुरुक्षेत्र 293
पानीपत 20
वर्ष 2021 में 34 दिन पानीपत रेड जोन में रहा, उद्योग थे बंद
वर्ष 2021 की 25 अक्तूबर को पानीपत ग्रीन जोन में था, जिसके बाद प्रदूषण की स्थिति गंभीर होती गई। एक दिसंबर 2021 को 34 दिन बाद पानीपत ग्रीन जोन में आ सका था। यह भी तब संभव हो सका क्योंकि बारिश हुई अन्यथा प्रदूषित हवा में सांस लेना जारी रहता। उद्योगों को सप्ताह में दो दिन बंद रखने का निर्देश दिया गया वहीं कोयला संचालित उद्योगों को नौ दिन के लिए बंद किया गया था। इसकी वजह से इस दौरान लगभग दो हजार करोड़ का नुकसान हुआ।
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दिल्ली-एनसीआर एवं पूरे हरियाणा में प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी : प्रधानमंत्री
हरियाणा समेत पूरे देश के किसानों के लिए अहम है। इस प्लांट की वजह से दिल्ली-एनसीआर एवं पूरे हरियाणा में प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी। जैव ईंधन प्रकृति की रक्षा का ही पर्याय है। अधिकतर किसान पराली का सही प्रयोग करना जानते हैं, लेकिन यह भी सच है कि हरियाणा जैसे क्षेत्र में जहां धान एवं गेहूं की फसल ज्यादा है, पराली का सही इस्तेमाल नहीं हो पाता है। जो मजबूरी में पराली में जलाते थे, जिन्हें इस वजह से बदनाम कर दिया गया था। उन्हें गर्व होगा कि वह राष्ट्र निर्माण में मदद कर रहे हैं।
- नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री ( प्रदूषण को लेकर उनके भाषण का अंश)
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