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Panipat News: बारिश से ढेरियों में रखा धान भीगा खेतों में फसल को 20% तक नुकसान
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माई सिटी रिपोर्टरपानीपत। धान कटाई के चल रहे पीक सीजन के बीच मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। रविवार देर रात और सोमवार तड़के करीब पांच बजे हुई बारिश से अनाज मंडियों में ढेरियों में लगा धान भीग गया है। करीब एक हजार एमटी धान भीगने का अनुमान है। इसके साथ खेतों में धान को करीब 20 प्रतिशत तक नुकसान का अनुमान है।
दूसरी ओर किसानों की खेतों से लेकर मंडी तक चिंता बनी हुई है। अनाज मंडी में ढेरियों को फैलाने के लिए घर से ट्रैक्टर मंगवाना पड़ा है। ढेरियों को पलटने पर नीचे धान भीगा हुआ मिल रहा है। ऐसे में पूरी मंडी की फड़ों पर धान फैला पड़ा है।
जिले की छह मंडियों में धान खरीद कार्य चल रहा है। पीआर के साथ 1509 और 1121 की धान की किस्म भी आ रही है। पीआर धान की खरीद और उठान नहीं हो पा रहा है। धान खरीद न होने पर किसानों को दिन-रात अपनी ढेरी के पास रहना पड़ रहा है। वहीं खरीद के बाद उठान न होने पर किसानों को रकम नहीं मिल पा रही है।
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इस बीच रविवार आधी रात के बाद और सोमवार तड़के हल्की से मध्यम बारिश हुई। मतलौडा खंड में सबसे अधिक छह एमएम बारिश हुई। इसके अलावा पानीपत और इसराना खंड में पांच-पांच और समालखा खंड में दो एमएम बारिश दर्ज की गई है। बारिश से जहां एक ओर तापमान में कमी आई है, वहीं दूसरी तरफ किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं।
किसानों का कहना है कि मंडियों में परेशानी बहुत हैं। मंडी में रात के समय मच्छर काटते हैं। पानी तक नहीं मिलता।
मंडी में पीआर धान की खरीद और उठान नहीं है। प्रशासन ने पहले किशनुपरा का नाला मंडी के साथ जोड़ दिया। नालों और सीवर की सफाई नहीं की गई है। थोड़ी सी बारिश पानी जमा हो जाता है। -धर्मबीर मलिक, जिला प्रधान आढ़ती एसोसिएशन
मंडी में किसानों के लिए पर्याप्त सुविधा हैं। खरीद भी लगातार की जा रही है। उठान न होने पर धान को शेड के नीचे रखा गया है। किसान खुद व आढ़ती के तिरपाल प्रयोग कर रहे हैं। -आशा देवी, सचिव, मार्केट कमेटी।
परेशानी किसानों की जुबानी
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डाहर गांव के सूबे सिंह ने बताया कि पांच दिन पहले दो एकड़ की पीआर धान लेकर आए थे। पहले नमी बताई और फिर एजेंसी खरीद के लिए नहीं आई है। मंडी में रात के समय मच्छर काटते हैं। किसान कैंटीन का किसानों को कोई सुख नहीं है। उनको घर से रोटी मंगवाकर खानी पड़ती हैं। यहां पेयजल तक के प्रबंध नहीं हैं।
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डाहर गांव के राजपाल ने बताया कि चार दिन पहले धान की 70 बोरी लेकर आए थे। दो ढेरी बनाई थी। धान की 1692 किस्म की ढेरी का रेट 3700 और दूसरी का 3971 रुपये लगाया। उन्होंने एक ढेरी बेच दी थी। दूसरी ढेरी का रेट कम होने पर रोक ली थी। इसके बाद मंडी में धान खरीदी नहीं गई है। चोरी का डर बना है।
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दूसरी ओर किसानों की खेतों से लेकर मंडी तक चिंता बनी हुई है। अनाज मंडी में ढेरियों को फैलाने के लिए घर से ट्रैक्टर मंगवाना पड़ा है। ढेरियों को पलटने पर नीचे धान भीगा हुआ मिल रहा है। ऐसे में पूरी मंडी की फड़ों पर धान फैला पड़ा है।
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जिले की छह मंडियों में धान खरीद कार्य चल रहा है। पीआर के साथ 1509 और 1121 की धान की किस्म भी आ रही है। पीआर धान की खरीद और उठान नहीं हो पा रहा है। धान खरीद न होने पर किसानों को दिन-रात अपनी ढेरी के पास रहना पड़ रहा है। वहीं खरीद के बाद उठान न होने पर किसानों को रकम नहीं मिल पा रही है।
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इस बीच रविवार आधी रात के बाद और सोमवार तड़के हल्की से मध्यम बारिश हुई। मतलौडा खंड में सबसे अधिक छह एमएम बारिश हुई। इसके अलावा पानीपत और इसराना खंड में पांच-पांच और समालखा खंड में दो एमएम बारिश दर्ज की गई है। बारिश से जहां एक ओर तापमान में कमी आई है, वहीं दूसरी तरफ किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं।
किसानों का कहना है कि मंडियों में परेशानी बहुत हैं। मंडी में रात के समय मच्छर काटते हैं। पानी तक नहीं मिलता।
मंडी में पीआर धान की खरीद और उठान नहीं है। प्रशासन ने पहले किशनुपरा का नाला मंडी के साथ जोड़ दिया। नालों और सीवर की सफाई नहीं की गई है। थोड़ी सी बारिश पानी जमा हो जाता है। -धर्मबीर मलिक, जिला प्रधान आढ़ती एसोसिएशन
मंडी में किसानों के लिए पर्याप्त सुविधा हैं। खरीद भी लगातार की जा रही है। उठान न होने पर धान को शेड के नीचे रखा गया है। किसान खुद व आढ़ती के तिरपाल प्रयोग कर रहे हैं। -आशा देवी, सचिव, मार्केट कमेटी।
परेशानी किसानों की जुबानी
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डाहर गांव के सूबे सिंह ने बताया कि पांच दिन पहले दो एकड़ की पीआर धान लेकर आए थे। पहले नमी बताई और फिर एजेंसी खरीद के लिए नहीं आई है। मंडी में रात के समय मच्छर काटते हैं। किसान कैंटीन का किसानों को कोई सुख नहीं है। उनको घर से रोटी मंगवाकर खानी पड़ती हैं। यहां पेयजल तक के प्रबंध नहीं हैं।
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डाहर गांव के राजपाल ने बताया कि चार दिन पहले धान की 70 बोरी लेकर आए थे। दो ढेरी बनाई थी। धान की 1692 किस्म की ढेरी का रेट 3700 और दूसरी का 3971 रुपये लगाया। उन्होंने एक ढेरी बेच दी थी। दूसरी ढेरी का रेट कम होने पर रोक ली थी। इसके बाद मंडी में धान खरीदी नहीं गई है। चोरी का डर बना है।