{"_id":"61390f188ebc3ee5300260a8","slug":"oxygen-quality-will-be-checked-in-gurugram-s-lab-benefits-will-be-given-on-passing-panipat-news-knl8258256","type":"story","status":"publish","title_hn":"गुरुग्राम की लैब में होगी ऑक्सीजन की गुणवत्ता की जांच, पास होने पर मिलेगा लाभ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गुरुग्राम की लैब में होगी ऑक्सीजन की गुणवत्ता की जांच, पास होने पर मिलेगा लाभ
विज्ञापन
पानीपत। पानीपत सिविल अस्पताल का ऑक्सीजन प्लांट।
- फोटो : Panipat
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संदीप सिंह
पानीपत। सिविल अस्पताल के ऑक्सीजन प्लांट की गुणवत्ता की जांच के लिए ऑक्सीजन के सैंपल गुरुग्राम की लैब में भेजा जाएगा। लैब से सकारात्मक रिपोर्ट मिलने के बाद ही ऑक्सीजन प्लांट मरीजों के लिए शुरू किया जाएगा। कैथल सिविल अस्पताल स्थित ऑक्सीजन प्लांट की ऑक्सीजन की जांच भी यहीं पर हुई है। इसे लेकर पीएमओ की एनएचएआई के साथ बात चल रही है।
कोरोना की तीसरी लहर से पहले ही सिविल अस्पताल पानीपत को प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और आपातकालीन स्थिति निधि से आक्सीजन प्लांट की सौगात मिली। यह प्लांट हवा से 1000 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन तैयार करेगा। 150 बेड को 24 घंटे आपूर्ति की जा सकेगी। प्लांट को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने डिजाइन किया है। प्लांट तैयार हो चुका है।
सिविल अस्पताल प्रबंधन इसी सप्ताह प्लांट का परीक्षण करेगा। इससे पहले अस्पताल में ऑक्सीजन के स्टॉक को बढ़ाया जा रहा है। ट्रायल से पहले मरीजों के हिसाब से ऑक्सीजन उपलब्ध कराई जाएगी, क्योंकि ट्रायल 24 घंटे चलना है। यह जाना जाएगा कि कितने मरीज ऑक्सीजन बेड पर हैं। कितने मरीजों की हालत गंभीर है। इसके बाद परीक्षण किया जाएगा। अस्पताल को जल्द एबीजी मशीन, होरिजोंटल आटोक्लेव, बाइपेप मशीन, एचएफएनसी मशीन भी मिलेगी। साथ ही ईसीजी मशीन और पांच हजार एन-95 मास्क की खरीदारी भी की जाएगी।
विज्ञापन
लार्सन एंड टर्बो (एलएंडटी) कंपनी ने कारपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीसीआर) के तहत यह प्लांट पीएम केयर्स फंड में डोनेट किया है। इसी कंपनी के इंजीनियरों ने जनरेटर, कंप्रेसर, ड्रायर और दो टैंक सहित पूूर्ण प्लांट को स्थापित करने के लिए काम शुरू कर दिया है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने शेड और फाउंडेशन तैयार किया है। अस्पताल प्रशासन ने पीडब्ल्यूडी इलेक्ट्रिक विंग के माध्यम से 250 वाट का डीजल जनरेटर क्रय किया है।
ऐसे बनती है हवा से आक्सीजन
वातावरण से हवा को कंप्रेस किया जाता है। फिल्टर की मदद से इसे शुद्ध कर ठंडा किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में हवा में मौजूद ऑक्सीजन लिक्विड में तबदील हो जाती है। इसे स्टोर किया जाता है। यही मेडिकल आक्सीजन है। कुछ प्लांट लिक्विड में तो कुछ गैस के रूप में आक्सीजन तैयार करते हैं।
हवा में 21 फीसदी आक्सीजन
ऑक्सीजन हवा और पानी दोनों में मौजूद होती है। हवा में 21 फीसदी ऑक्सीजन, 78 फीसदी नाइट्रोजन और एक फीसदी अन्य गैसें जैसे हाइड्रोजन, नियोन, जीनोन, हीलियम और कार्बन डाइऑक्साइड होती हैं।
एक व्यक्ति को चाहिए 550 लीटर आक्सीजन
डॉ. अमित कुमार ने बताया कि एक व्यक्ति को 24 घंटे में करीब 550 लीटर शुद्ध ऑक्सीजन चाहिए। स्वस्थ व्यक्ति एक मिनट में 12 से 20 बार सांस लेता है। स्वस्थ व्यक्ति के ब्लड में ऑक्सीजन का अधिकतम स्तर 95 से 100 फीसदी के बीच होना चाहिए। ऑक्सीजन लेवल 90 से नीचे होने पर उसे कृत्रिम आक्सीजन दी जाती है।
प्लांट तैयार हो चुका है। अब प्लांट का परीक्षण किया जाएगा। प्लांट की ऑक्सीजन के सैंपल गुरुग्राम की लैब में भेजे जाएंगे। सैंपल पास होने के बाद ही इसका लाभ लिया जाएगा। उनकी इस संबंध में एनएचएआई के साथ वार्ता चल रही है।
- डॉ. संजीव ग्रोवर, पीएमओ सिविल अस्पताल
विज्ञापन
पानीपत। सिविल अस्पताल के ऑक्सीजन प्लांट की गुणवत्ता की जांच के लिए ऑक्सीजन के सैंपल गुरुग्राम की लैब में भेजा जाएगा। लैब से सकारात्मक रिपोर्ट मिलने के बाद ही ऑक्सीजन प्लांट मरीजों के लिए शुरू किया जाएगा। कैथल सिविल अस्पताल स्थित ऑक्सीजन प्लांट की ऑक्सीजन की जांच भी यहीं पर हुई है। इसे लेकर पीएमओ की एनएचएआई के साथ बात चल रही है।
कोरोना की तीसरी लहर से पहले ही सिविल अस्पताल पानीपत को प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और आपातकालीन स्थिति निधि से आक्सीजन प्लांट की सौगात मिली। यह प्लांट हवा से 1000 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन तैयार करेगा। 150 बेड को 24 घंटे आपूर्ति की जा सकेगी। प्लांट को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने डिजाइन किया है। प्लांट तैयार हो चुका है।
विज्ञापन
सिविल अस्पताल प्रबंधन इसी सप्ताह प्लांट का परीक्षण करेगा। इससे पहले अस्पताल में ऑक्सीजन के स्टॉक को बढ़ाया जा रहा है। ट्रायल से पहले मरीजों के हिसाब से ऑक्सीजन उपलब्ध कराई जाएगी, क्योंकि ट्रायल 24 घंटे चलना है। यह जाना जाएगा कि कितने मरीज ऑक्सीजन बेड पर हैं। कितने मरीजों की हालत गंभीर है। इसके बाद परीक्षण किया जाएगा। अस्पताल को जल्द एबीजी मशीन, होरिजोंटल आटोक्लेव, बाइपेप मशीन, एचएफएनसी मशीन भी मिलेगी। साथ ही ईसीजी मशीन और पांच हजार एन-95 मास्क की खरीदारी भी की जाएगी।
विज्ञापन
लार्सन एंड टर्बो (एलएंडटी) कंपनी ने कारपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीसीआर) के तहत यह प्लांट पीएम केयर्स फंड में डोनेट किया है। इसी कंपनी के इंजीनियरों ने जनरेटर, कंप्रेसर, ड्रायर और दो टैंक सहित पूूर्ण प्लांट को स्थापित करने के लिए काम शुरू कर दिया है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने शेड और फाउंडेशन तैयार किया है। अस्पताल प्रशासन ने पीडब्ल्यूडी इलेक्ट्रिक विंग के माध्यम से 250 वाट का डीजल जनरेटर क्रय किया है।
ऐसे बनती है हवा से आक्सीजन
वातावरण से हवा को कंप्रेस किया जाता है। फिल्टर की मदद से इसे शुद्ध कर ठंडा किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में हवा में मौजूद ऑक्सीजन लिक्विड में तबदील हो जाती है। इसे स्टोर किया जाता है। यही मेडिकल आक्सीजन है। कुछ प्लांट लिक्विड में तो कुछ गैस के रूप में आक्सीजन तैयार करते हैं।
हवा में 21 फीसदी आक्सीजन
ऑक्सीजन हवा और पानी दोनों में मौजूद होती है। हवा में 21 फीसदी ऑक्सीजन, 78 फीसदी नाइट्रोजन और एक फीसदी अन्य गैसें जैसे हाइड्रोजन, नियोन, जीनोन, हीलियम और कार्बन डाइऑक्साइड होती हैं।
एक व्यक्ति को चाहिए 550 लीटर आक्सीजन
डॉ. अमित कुमार ने बताया कि एक व्यक्ति को 24 घंटे में करीब 550 लीटर शुद्ध ऑक्सीजन चाहिए। स्वस्थ व्यक्ति एक मिनट में 12 से 20 बार सांस लेता है। स्वस्थ व्यक्ति के ब्लड में ऑक्सीजन का अधिकतम स्तर 95 से 100 फीसदी के बीच होना चाहिए। ऑक्सीजन लेवल 90 से नीचे होने पर उसे कृत्रिम आक्सीजन दी जाती है।
प्लांट तैयार हो चुका है। अब प्लांट का परीक्षण किया जाएगा। प्लांट की ऑक्सीजन के सैंपल गुरुग्राम की लैब में भेजे जाएंगे। सैंपल पास होने के बाद ही इसका लाभ लिया जाएगा। उनकी इस संबंध में एनएचएआई के साथ वार्ता चल रही है।
- डॉ. संजीव ग्रोवर, पीएमओ सिविल अस्पताल