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आदेशों के बावजूद नहीं लगाए गए ऑक्सीजन बेड
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समालखा। समालखा स्थित सिविल अस्पताल में ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट लगाने के लिए बनाया गया शेड, जो पड़ा
- फोटो : Panipat
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पानीपत/समालखा। जिले के दो सरकारी अस्पताल, छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 17 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संभावित तीसरी से लड़ने को पूरी तरह से तैयार नहीं दिखते। अगर कोरोना की संभावित तीसरी लहर ने बच्चों को प्रभावित किया तो हालात बेहद गंभीर हो सकते हैं। पानीपत और समालखा के अस्पतालों को छोड़ दें तो सीएचसी-पीएचसी में ऑक्सीजन बेड अभी तक नहीं लगाए जा सके हैं। यह हालात तब हैं जबकि संभावित तीसरी लहर की आशंकाओं के बीच पानीपत में तीन साल का एक बच्चा कोरोना संक्रमित मिल चुका है।
गौरतलब है कि जिले में 18 साल से कम आयु के बच्चों की संख्या करीब 5.39 लाख है लेकिन किसी भी सीएचसी व पीएचसी में बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। महज सिविल अस्पताल में ही दो बाल रोग विशेषज्ञ हैं। इन पर ही जिले के बच्चों के इलाज का जिम्मा है। उधर, कोरोना की संभावित तीसरी लहर को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के एसीएस और डायरेक्टर जनरल ने सभी सिविल सर्जन को आदेश दिया था कि सभी सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर 25-25 ऑक्सीजन बेड लगाए जाएं और ऑक्सीजन कंसट्रेटर का भी इंतजाम किया जाए। इस तरह कुल 575 ऑक्सीजन बेड स्थापित किए जाने हैं, जिससे संक्रमण बढ़ने की स्थिति में ऑक्सीजन बेड के लिए मारामारी नहीं मचे, लेकिन इस दिशा में फिलहाल कुछ हुआ नहीं है।
मौजूदा स्थिति :
गांव नारायणा, बापौली और अहर सीएचसी पर ही पांच-छह ऑक्सीजन बेड लगाए गए हैं। सीएचसी पर जनरेटर की व्यवस्था की गई है, लेकिन तीन सीएचसी पर जनरेटर की व्यवस्था नहीं है। पानीपत सिविल अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट तैयार हो गया है, लेकिन समालखा अस्पताल में प्लांट का शेड तीन माह से तैयार खड़ा है, लेकिन मशीनें नहीं लगाई जा सकी हैं।
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- डॉक्टरों और स्टाफ को ट्रेनिंग दी गई, लेकिन संसाधन नहीं
कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए डॉक्टरों व स्टाफ को ट्रेनिंग दी गई है। स्टाफ को बताया गया है कि मरीजों को कैसे और कितनी मात्रा में ऑक्सीजन देनी है। कैसे मरीजों की देखभाल करनी है, इन सबकी जानकारी दी जा रही है, लेकिन विभाग के पास पर्याप्त संसाधन ही नहीं है। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में महज 31 वेंटिलेटर है, इनमें से 14 ही वेंटिलेटर चल रहे हैं। ऑपरेटर और फिजिशियन ही नहीं हैं।
दो लहरों में 4350 बच्चे संक्रमित हुए, तीन ने गंवाई जान
कोरोना की दोनों लहरों में 4350 बच्चे कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। इनमें तीन बच्चों की मौत भी हो गई थी। कई बच्चे कोरोना से काफी लंबी जंग लड़े। ऐसे में कोरोना की संभावित तीसरी लहर से बच्चों को बचाना सरकार और परिजनों के लिए बड़ी चुनौती होगी।
बच्चों को बचाने के लिए ये है जरूरत
कोरोना संक्रमित बच्चों को हल्के सामान्य और गंभीर श्रेणी में बांटा गया है। हलके लक्षणों वाले बच्चों को अस्पताल में दाखिल करने की जरूरत नहीं है, जबकि सामान्य लक्षण वाले बच्चों को दवाओं और डॉक्टरों की देखरेख की जरूरत होगी। वहीं, गंभीर लक्षण वाले मरीजों को अस्पताल में आईसीयू और वेंटिलेटर तक की जरूरत पड़ती हैै। विशेषज्ञों के मुताबिक, बच्चों के लिए अलग वेंटिलेटर, मॉनीटर और कुशल स्टाफ चाहिए। पीकू (पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट) सबसे जरूरी है।
स्वास्थ्य विभाग की तैयारी
समालखा अस्पताल
सवा तीन लाख लोगों के स्वास्थ्य का जिम्मा महज तीन डॉक्टरों पर है। बाल रोग विशेषज्ञ, सर्जन, आई सर्जन, ईएनटी, मनोरोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ, फिजिशयन नहीं हैं। समालखा अस्पताल दो साल पहले 100 बेड का बना था। इसे बनाने में 35 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं लेकिन अब तक ऑक्सीजन प्लांट बनकर तैयार नहीं हो पाया है। यहां वेंटीलेटर की सुविधा भी नहीं है और एसएनसीयू वार्ड भी नहीं बन पाया है।
नारायणा सीएचसी
गांव नारायणा में बनी 30 बेड की सीएचसी में इंचार्ज सुशील के अलावा कोई डॉक्टर नहीं है। डॉ. सुशील ही मरीजों को देखते है। यहां भी 25 ऑक्सीजन बेड लगने थे, लेकिन सिर्फ आठ ऑक्सीजन बेड ही तैयार हुए हैं। यहां भी एक भी वेंटिलेटर या कंसट्रेटर नहीं है।
अहर सीएचसी
सीएचसी में जनरेटर तक की सुविधा नहीं है। 25 ऑक्सीजन बेड ऑक्सीजन में सिर्फ आठ ही तैयार हो पाए हैं। सीएचसी में मात्र दो ही डॉक्टर है। सीएचसी में वेंटिलेटर, ऑक्सीजन कंसट्रेटर, शिशु रोग विशेषज्ञ तक की कमी बनी है।
मतलौडा सीएचसी
मतलौडा सीएचसी में वैसे तो 30 बेड की व्यवस्था है। 25 में से यहां मात्र चार ऑक्सीजन बेड ही तैयार हो पाए हैं। सीएचसी में ऑक्सीजन कंसट्रेटर, शिशु रोग विशेषज्ञ, जनरेटर, ऑक्सीजन सिलिंडर और अन्य डॉक्टरों की कमी है। पूरी सीएचसी की जिम्मेदारी महज एक डॉक्टर पर है।
बापौली सीएचसी
बापौली सबसे बड़ी सीएचसी है। ये 45 गांवों में मात्र एक सीएचसी है। छह डॉक्टरों की पोस्ट में से चार खाली हैं। यहां 30 बेड में से सिर्फ 10 बेड कोविड के लिए तैयार किए गए हैं। सिर्फ चार ऑक्सीजन सिलिंडर हैं लेकिन 15 ऑक्सीजन कंसट्रेटर की यहां पर व्यवस्था जरूर है।
ददलाना सीएचसी
यहां आठ ऑक्सीजन बेड की व्यवस्था ही की जा सकी है। यहां वेंटीलेटर, ऑक्सीजन कंसट्रेट और ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी है।
खोतपुरा सीएचसी
खोतपुरा सीएचसी में महज दो डॉक्टर हैं जबकि नियमानुसार यहां पर पांच डॉक्टर होने चाहिए। कोविड बेड तैयार नहीं किए गए हैं। सीएचसी में ऑक्सीजन कंसट्रेटर, शिशु रोग विशेषज्ञ, जनरेटर, ऑक्सीजन सिलिंडर और वेंटिलेटर नहीं है।
सिविल अस्पताल
सिविल अस्पताल में 6 बेड का पीआईसीयू (पीडियाट्रिक इंसेंटिव केयर यूनिट) वार्ड तैयार कर दिया गया है। आईसीयू में 14 बेड लगा दिए हैं। अस्पताल में 28 बेड का आइसोलेशन वार्ड तैयार है, कुल 60 बेड का वार्ड बनाना है। 10 एपिड्यूरल इन्फ्यूजन पंप (दवा को सही मात्रा में पहुंचाने का एक सिस्टम), 10 मल्टी पैरामीटर(ब्लड प्रेशर, धड़कन, आक्सीजन लेवल बताने वाला सिस्टम), 30 नेजल प्रान, 16 नेबुलाइजर हैं। सिविल अस्पताल में फिलहाल 31 वेंटिलेटर, जिनमें से फिलहाल 14 रनिंग चल रहे हैं। 75 आक्सीजन कंसंट्रेटर मशीन चल रहे हैं।
हमारे पास संसाधन पर्याप्त, हमारी तैयारी भी पूरी- डॉ. कादियान
सभी सीएचसी व पीएचसी पर हमारी तैयारी पूरी है। सीएचसी व पीएचसी में कंसट्रेटर भेज रहे हैं। डॉक्टरों व स्टाफ को लगातार ट्रेनिंग दी जा रही है। फिजीशयन की डिमांड भेज चुके हैं। -डॉ. जितेंद्र कादियान, सिविल सर्जन पानीपत।
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गौरतलब है कि जिले में 18 साल से कम आयु के बच्चों की संख्या करीब 5.39 लाख है लेकिन किसी भी सीएचसी व पीएचसी में बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। महज सिविल अस्पताल में ही दो बाल रोग विशेषज्ञ हैं। इन पर ही जिले के बच्चों के इलाज का जिम्मा है। उधर, कोरोना की संभावित तीसरी लहर को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के एसीएस और डायरेक्टर जनरल ने सभी सिविल सर्जन को आदेश दिया था कि सभी सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर 25-25 ऑक्सीजन बेड लगाए जाएं और ऑक्सीजन कंसट्रेटर का भी इंतजाम किया जाए। इस तरह कुल 575 ऑक्सीजन बेड स्थापित किए जाने हैं, जिससे संक्रमण बढ़ने की स्थिति में ऑक्सीजन बेड के लिए मारामारी नहीं मचे, लेकिन इस दिशा में फिलहाल कुछ हुआ नहीं है।
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मौजूदा स्थिति :
गांव नारायणा, बापौली और अहर सीएचसी पर ही पांच-छह ऑक्सीजन बेड लगाए गए हैं। सीएचसी पर जनरेटर की व्यवस्था की गई है, लेकिन तीन सीएचसी पर जनरेटर की व्यवस्था नहीं है। पानीपत सिविल अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट तैयार हो गया है, लेकिन समालखा अस्पताल में प्लांट का शेड तीन माह से तैयार खड़ा है, लेकिन मशीनें नहीं लगाई जा सकी हैं।
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- डॉक्टरों और स्टाफ को ट्रेनिंग दी गई, लेकिन संसाधन नहीं
कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए डॉक्टरों व स्टाफ को ट्रेनिंग दी गई है। स्टाफ को बताया गया है कि मरीजों को कैसे और कितनी मात्रा में ऑक्सीजन देनी है। कैसे मरीजों की देखभाल करनी है, इन सबकी जानकारी दी जा रही है, लेकिन विभाग के पास पर्याप्त संसाधन ही नहीं है। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में महज 31 वेंटिलेटर है, इनमें से 14 ही वेंटिलेटर चल रहे हैं। ऑपरेटर और फिजिशियन ही नहीं हैं।
दो लहरों में 4350 बच्चे संक्रमित हुए, तीन ने गंवाई जान
कोरोना की दोनों लहरों में 4350 बच्चे कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। इनमें तीन बच्चों की मौत भी हो गई थी। कई बच्चे कोरोना से काफी लंबी जंग लड़े। ऐसे में कोरोना की संभावित तीसरी लहर से बच्चों को बचाना सरकार और परिजनों के लिए बड़ी चुनौती होगी।
बच्चों को बचाने के लिए ये है जरूरत
कोरोना संक्रमित बच्चों को हल्के सामान्य और गंभीर श्रेणी में बांटा गया है। हलके लक्षणों वाले बच्चों को अस्पताल में दाखिल करने की जरूरत नहीं है, जबकि सामान्य लक्षण वाले बच्चों को दवाओं और डॉक्टरों की देखरेख की जरूरत होगी। वहीं, गंभीर लक्षण वाले मरीजों को अस्पताल में आईसीयू और वेंटिलेटर तक की जरूरत पड़ती हैै। विशेषज्ञों के मुताबिक, बच्चों के लिए अलग वेंटिलेटर, मॉनीटर और कुशल स्टाफ चाहिए। पीकू (पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट) सबसे जरूरी है।
स्वास्थ्य विभाग की तैयारी
समालखा अस्पताल
सवा तीन लाख लोगों के स्वास्थ्य का जिम्मा महज तीन डॉक्टरों पर है। बाल रोग विशेषज्ञ, सर्जन, आई सर्जन, ईएनटी, मनोरोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ, फिजिशयन नहीं हैं। समालखा अस्पताल दो साल पहले 100 बेड का बना था। इसे बनाने में 35 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं लेकिन अब तक ऑक्सीजन प्लांट बनकर तैयार नहीं हो पाया है। यहां वेंटीलेटर की सुविधा भी नहीं है और एसएनसीयू वार्ड भी नहीं बन पाया है।
नारायणा सीएचसी
गांव नारायणा में बनी 30 बेड की सीएचसी में इंचार्ज सुशील के अलावा कोई डॉक्टर नहीं है। डॉ. सुशील ही मरीजों को देखते है। यहां भी 25 ऑक्सीजन बेड लगने थे, लेकिन सिर्फ आठ ऑक्सीजन बेड ही तैयार हुए हैं। यहां भी एक भी वेंटिलेटर या कंसट्रेटर नहीं है।
अहर सीएचसी
सीएचसी में जनरेटर तक की सुविधा नहीं है। 25 ऑक्सीजन बेड ऑक्सीजन में सिर्फ आठ ही तैयार हो पाए हैं। सीएचसी में मात्र दो ही डॉक्टर है। सीएचसी में वेंटिलेटर, ऑक्सीजन कंसट्रेटर, शिशु रोग विशेषज्ञ तक की कमी बनी है।
मतलौडा सीएचसी
मतलौडा सीएचसी में वैसे तो 30 बेड की व्यवस्था है। 25 में से यहां मात्र चार ऑक्सीजन बेड ही तैयार हो पाए हैं। सीएचसी में ऑक्सीजन कंसट्रेटर, शिशु रोग विशेषज्ञ, जनरेटर, ऑक्सीजन सिलिंडर और अन्य डॉक्टरों की कमी है। पूरी सीएचसी की जिम्मेदारी महज एक डॉक्टर पर है।
बापौली सीएचसी
बापौली सबसे बड़ी सीएचसी है। ये 45 गांवों में मात्र एक सीएचसी है। छह डॉक्टरों की पोस्ट में से चार खाली हैं। यहां 30 बेड में से सिर्फ 10 बेड कोविड के लिए तैयार किए गए हैं। सिर्फ चार ऑक्सीजन सिलिंडर हैं लेकिन 15 ऑक्सीजन कंसट्रेटर की यहां पर व्यवस्था जरूर है।
ददलाना सीएचसी
यहां आठ ऑक्सीजन बेड की व्यवस्था ही की जा सकी है। यहां वेंटीलेटर, ऑक्सीजन कंसट्रेट और ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी है।
खोतपुरा सीएचसी
खोतपुरा सीएचसी में महज दो डॉक्टर हैं जबकि नियमानुसार यहां पर पांच डॉक्टर होने चाहिए। कोविड बेड तैयार नहीं किए गए हैं। सीएचसी में ऑक्सीजन कंसट्रेटर, शिशु रोग विशेषज्ञ, जनरेटर, ऑक्सीजन सिलिंडर और वेंटिलेटर नहीं है।
सिविल अस्पताल
सिविल अस्पताल में 6 बेड का पीआईसीयू (पीडियाट्रिक इंसेंटिव केयर यूनिट) वार्ड तैयार कर दिया गया है। आईसीयू में 14 बेड लगा दिए हैं। अस्पताल में 28 बेड का आइसोलेशन वार्ड तैयार है, कुल 60 बेड का वार्ड बनाना है। 10 एपिड्यूरल इन्फ्यूजन पंप (दवा को सही मात्रा में पहुंचाने का एक सिस्टम), 10 मल्टी पैरामीटर(ब्लड प्रेशर, धड़कन, आक्सीजन लेवल बताने वाला सिस्टम), 30 नेजल प्रान, 16 नेबुलाइजर हैं। सिविल अस्पताल में फिलहाल 31 वेंटिलेटर, जिनमें से फिलहाल 14 रनिंग चल रहे हैं। 75 आक्सीजन कंसंट्रेटर मशीन चल रहे हैं।
हमारे पास संसाधन पर्याप्त, हमारी तैयारी भी पूरी- डॉ. कादियान
सभी सीएचसी व पीएचसी पर हमारी तैयारी पूरी है। सीएचसी व पीएचसी में कंसट्रेटर भेज रहे हैं। डॉक्टरों व स्टाफ को लगातार ट्रेनिंग दी जा रही है। फिजीशयन की डिमांड भेज चुके हैं। -डॉ. जितेंद्र कादियान, सिविल सर्जन पानीपत।