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Panipat News: आज ओपीडी बंद, स्वास्थ्य निजी अस्पतालों के जिम्मे
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पानीपत। सरकारी डॉक्टरों ने चार सूत्रीय मांगों के समर्थन में सरकार के खिलाफ संघर्ष का बिगुल बजा दिया है। आज सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को इलाज नहीं मिलेगा। अस्पतालों में महज इमरजेंसी सेवाएं ही जारी रहेंगी।
बुधवार को हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के आह्वान पर डॉक्टरों ने ये फैसला लिया। डॉक्टरों ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर उनकी 28 दिसंबर तक सभी चार सूत्रीय मांगें नहीं मानी गई तो अस्पतालों की सभी आपातकाल सेवाएं बंद कर दी जाएंगी।
ये भी दी चेतावनी
इनमें पोस्टमार्टम सेवाएं, इमरजेंसी सेवाएं, ओपीडी, डिलीवरी और सभी प्रकार की सर्जरी शामिल रहेंगी। डॉक्टर काम करना बंद कर देंगे। जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाएंगी। वो सेवा में नहीं लौटेंगे। बुधवार को सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शन भी किया जाएगा। नागरिक अस्पताल समेत सभी 24 सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में प्रतिदिन 1900-2000 लोगों की ओपीडी होती है।
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डॉक्टरों के साथ हो रहा अन्याय : डाॅ. रिंकू
हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष डॉ. रिंकू सांगवान ने बताया कि डॉक्टरों के साथ सालों से अन्याय हो रहा है। सरकार सीधा सीनियर मेडिकल ऑफिसर की भर्ती करती है। इसलिए मेडिकल ऑफिसर की 18-20 साल तक प्रोमोशन नहीं हो पाता। मेडिकल ऑफिसर के साथ अन्याय हो रहा है। उनकी मांग है कि सीधी एसएमओ की भर्ती पर रोक लगाई जाए।
केंद्र सरकार और बिहार सरकार डॉक्टरों को एसीआर चार-नौ-13 और 20 साल पर लगाती है। जबकि हरियाणा में ये पांच-10 व 15 साल पर लागू है। इसलिए इसको केंद्र की तर्ज पर किया जाए।
बॉन्ड की राशि की जाए कम
उनकी मांग है विशेषज्ञ डॉक्टरों का एक अलग कैडर बनाया जाए। प्रदेश में विशेषज्ञों की कमी को पूरा किया जाए। कैडर के अनुसार विशेषज्ञ ओपीडी के अलावा दूसरा काम नहीं करेंगे। अब विशेषज्ञों को पोस्टमार्टम और इमरजेंसी ड्यूटी भी करनी पड़ती है। ऐसे में उनके मरीजों को बिना इलाज घर लौटते हैं। उनकी चौथी मांग है कि सरकार पीजी करने वाले डॉक्टरों से एक करोड़ रुपये बॉन्ड भरवाती है। ये उनके साथ अन्याय है। उनकी मांग है कि इसको कम करके 50 लाख रुपये किया जाए। वो सरकार को पहले ही मांगे न मानने पर कड़े कदम उठाने की चेतावनी दे चुके हैं लेकिन सरकार ने उनकी मांगे नहीं मानी।
अब एसोसिएशन ने फैसला किया है कि वो 27 दिसंबर को ओपीडी बंद रखेंगे। अगर 28 दिसंबर तक तक उनकी मांगें नहीं मानी तो वो सभी प्रकार की आपात सेवाएं बंद कर देंगे। अस्पताल में पोस्टमार्टम, डिलीवरी, सर्जरी व आपातकाल समेत सभी सेवाएं बंद करेंगे। मरीजों को इससे जो भी परेशानी होगी। इसकी जिम्मेदार सरकार होगी।
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बुधवार को हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के आह्वान पर डॉक्टरों ने ये फैसला लिया। डॉक्टरों ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर उनकी 28 दिसंबर तक सभी चार सूत्रीय मांगें नहीं मानी गई तो अस्पतालों की सभी आपातकाल सेवाएं बंद कर दी जाएंगी।
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ये भी दी चेतावनी
इनमें पोस्टमार्टम सेवाएं, इमरजेंसी सेवाएं, ओपीडी, डिलीवरी और सभी प्रकार की सर्जरी शामिल रहेंगी। डॉक्टर काम करना बंद कर देंगे। जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाएंगी। वो सेवा में नहीं लौटेंगे। बुधवार को सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शन भी किया जाएगा। नागरिक अस्पताल समेत सभी 24 सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में प्रतिदिन 1900-2000 लोगों की ओपीडी होती है।
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डॉक्टरों के साथ हो रहा अन्याय : डाॅ. रिंकू
हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष डॉ. रिंकू सांगवान ने बताया कि डॉक्टरों के साथ सालों से अन्याय हो रहा है। सरकार सीधा सीनियर मेडिकल ऑफिसर की भर्ती करती है। इसलिए मेडिकल ऑफिसर की 18-20 साल तक प्रोमोशन नहीं हो पाता। मेडिकल ऑफिसर के साथ अन्याय हो रहा है। उनकी मांग है कि सीधी एसएमओ की भर्ती पर रोक लगाई जाए।
केंद्र सरकार और बिहार सरकार डॉक्टरों को एसीआर चार-नौ-13 और 20 साल पर लगाती है। जबकि हरियाणा में ये पांच-10 व 15 साल पर लागू है। इसलिए इसको केंद्र की तर्ज पर किया जाए।
बॉन्ड की राशि की जाए कम
उनकी मांग है विशेषज्ञ डॉक्टरों का एक अलग कैडर बनाया जाए। प्रदेश में विशेषज्ञों की कमी को पूरा किया जाए। कैडर के अनुसार विशेषज्ञ ओपीडी के अलावा दूसरा काम नहीं करेंगे। अब विशेषज्ञों को पोस्टमार्टम और इमरजेंसी ड्यूटी भी करनी पड़ती है। ऐसे में उनके मरीजों को बिना इलाज घर लौटते हैं। उनकी चौथी मांग है कि सरकार पीजी करने वाले डॉक्टरों से एक करोड़ रुपये बॉन्ड भरवाती है। ये उनके साथ अन्याय है। उनकी मांग है कि इसको कम करके 50 लाख रुपये किया जाए। वो सरकार को पहले ही मांगे न मानने पर कड़े कदम उठाने की चेतावनी दे चुके हैं लेकिन सरकार ने उनकी मांगे नहीं मानी।
अब एसोसिएशन ने फैसला किया है कि वो 27 दिसंबर को ओपीडी बंद रखेंगे। अगर 28 दिसंबर तक तक उनकी मांगें नहीं मानी तो वो सभी प्रकार की आपात सेवाएं बंद कर देंगे। अस्पताल में पोस्टमार्टम, डिलीवरी, सर्जरी व आपातकाल समेत सभी सेवाएं बंद करेंगे। मरीजों को इससे जो भी परेशानी होगी। इसकी जिम्मेदार सरकार होगी।