{"_id":"614cdcab8ebc3e0de87bfd6d","slug":"officials-will-not-be-able-to-extend-the-budget-and-duration-of-development-work-more-than-the-fixed-fund-panipat-news-knl84212059","type":"story","status":"publish","title_hn":"तय फंड से अधिक विकास कार्य का बजट और मियाद नहीं बढ़ा पाएंगे अधिकारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तय फंड से अधिक विकास कार्य का बजट और मियाद नहीं बढ़ा पाएंगे अधिकारी
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पानीपत। अब किसी भी विकास कार्य या सफाई के काम पर लगने वाले बजट को निगम अधिकारी अपनी इच्छानुसार बार-बार बढ़ा नहीं सकेंगे। न ही टेंडर की अवधि को घटा या बढ़ाकर बजट पास कर पाएंगे। इसी प्रकार किसी भी एक विकास कार्य को कई भागों में बांटकर अलग-अलग टेंडर भी नहीं लगाए जा सकेंगे। सरकार ने भ्रष्टचार पर लगाम लगाने की दिशा में यह कदम उठाया है। हर विकास कार्य के खर्च पर पैनी नजर रखी जाएगी।
नए आदेश के तहत सरकार ने निगम, पालिका और परिषदों को अपने स्तर पर टेंडर निकालकर खर्च करने की शक्ति दी है, लेकिन शर्तें लगाकर अपना नियंत्रण भी रखा है। जिस अधिकारी के पास वित्तीय शक्ति रहेगी, उसे निर्धारित दायरे में ही काम करना होगा। ऐसा नहीं करने पर अधिकारी पर कार्रवाई की सकती है। सरकार ने प्रदेश के सभी नगर निगम, पालिका और परिषदों समेत इनके प्रतिनिधियों को भी हिदायतें जारी कर दी हैं।
जानिए क्यों किया गया बदलाव
सरकार ने कुछ समय पहले नगर निगम, पालिका और परिषदों समेत निगम आयुक्त और उप निगम आयुक्त की वित्तीय बजट की शक्ति को बढ़ाया था। आयुक्त को किसी एक विकास कार्य के लिए एक करोड़ रुपये तक खर्च करने की शक्ति दी गई थी। अर्थात अगर किसी टेंडर की कीमत एक करोड़ रुपये तक की है तो उसके लिए सरकार से अनुमति लेने की जरूरत नहीं थी।
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अब तक हो यह रहा था कि एक विकास कार्य को कई भागों में बांटकर अलग-अलग टेंडर लगाकर उसकी लागत बढ़ाई जा रही थी। मान लीजिए कि किसी एक विकास कार्य को चार भागों में बांट कर चार टेंडर लगाए। अब एक ही विकास कार्य के लिए एक-एक करोड़ के चार टेंडर लगाकर लागत चार करोड़ रुपये कर दी जाती थी। इस कमी का फायदा उठाया जाता रहा था। अब किसी भी विकास कार्य को बांटा नहीं जा सकेगा, एक ही टेंडर लगेगा। अलग-अलग टेंडर निकाले जाने की वजह से विकास कार्य के पूरा होने का वक्त भी बढ़ जाता था। अब यह भी नहीं हो सकेगा। यानी एक विकास कार्य का एक ही टेंडर होगा।
इन पर सरकार लेगी फैसला
मैनपावर की आपूर्ति के लिए जिन टेंडरों का सालाना बजट निगम, पालिका या परिषद को दी गई वित्तीय शक्ति से बाहर, उस पर सरकार फैसला लेगी। इसके लिए निगम अधिकारी प्रस्ताव बनाकर भेजेंगे और उसके बाद सरकार अनुमति देगी।
किसकी कितनी वित्तीय शक्ति निर्धारित
नगर निगम
नगर निगम सदन की वित्तीय शक्ति को एक करोड़ से ढाई करोड़ कर दिया गया है। वहीं, आयुक्त के पास केवल एक करोड़ तक के खर्च की वित्तीय शक्ति रहेगी।
नगर परिषद
नगर परिषद में चेयरमैन की शक्ति 25 से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दी गई है। जबकि परिषद सदन को 25 लाख रुपये तक की शक्ति प्रशासकीय अनुमति और 25 लाख रुपये की वित्तीय शक्ति टेंडर की अनुमति के लिए दी गई है। हालांकि दोनों की दरें सीलिंग रेट के अंतर्गत होनी चाहिए।
नगर पालिका
नगर पालिका में जिला निगम आयुक्त की शक्ति 15 से बढ़ाकर 50 लाख रुपये तक के विकास कार्यों की वित्तीय शक्ति दी गई है। जबकि पालिका को 15 लाख तक की वित्तीय शक्ति प्रशासकीय अनुमति और 15 लाख तक के टेंडर की अनुमति दी है।
आदेशानुसार ही होगा काम: एक्सईएन
जो भी सरकार के आदेश हैं, उसकी के मुताबिक काम किया जा रहा है। आगे भी सरकार के दिशानिर्देश का कड़ाई से पालन करते हुए ही काम होगा।
- प्रदीप कल्याण, एक्सईएन, नगर निगम
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नए आदेश के तहत सरकार ने निगम, पालिका और परिषदों को अपने स्तर पर टेंडर निकालकर खर्च करने की शक्ति दी है, लेकिन शर्तें लगाकर अपना नियंत्रण भी रखा है। जिस अधिकारी के पास वित्तीय शक्ति रहेगी, उसे निर्धारित दायरे में ही काम करना होगा। ऐसा नहीं करने पर अधिकारी पर कार्रवाई की सकती है। सरकार ने प्रदेश के सभी नगर निगम, पालिका और परिषदों समेत इनके प्रतिनिधियों को भी हिदायतें जारी कर दी हैं।
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जानिए क्यों किया गया बदलाव
सरकार ने कुछ समय पहले नगर निगम, पालिका और परिषदों समेत निगम आयुक्त और उप निगम आयुक्त की वित्तीय बजट की शक्ति को बढ़ाया था। आयुक्त को किसी एक विकास कार्य के लिए एक करोड़ रुपये तक खर्च करने की शक्ति दी गई थी। अर्थात अगर किसी टेंडर की कीमत एक करोड़ रुपये तक की है तो उसके लिए सरकार से अनुमति लेने की जरूरत नहीं थी।
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अब तक हो यह रहा था कि एक विकास कार्य को कई भागों में बांटकर अलग-अलग टेंडर लगाकर उसकी लागत बढ़ाई जा रही थी। मान लीजिए कि किसी एक विकास कार्य को चार भागों में बांट कर चार टेंडर लगाए। अब एक ही विकास कार्य के लिए एक-एक करोड़ के चार टेंडर लगाकर लागत चार करोड़ रुपये कर दी जाती थी। इस कमी का फायदा उठाया जाता रहा था। अब किसी भी विकास कार्य को बांटा नहीं जा सकेगा, एक ही टेंडर लगेगा। अलग-अलग टेंडर निकाले जाने की वजह से विकास कार्य के पूरा होने का वक्त भी बढ़ जाता था। अब यह भी नहीं हो सकेगा। यानी एक विकास कार्य का एक ही टेंडर होगा।
इन पर सरकार लेगी फैसला
मैनपावर की आपूर्ति के लिए जिन टेंडरों का सालाना बजट निगम, पालिका या परिषद को दी गई वित्तीय शक्ति से बाहर, उस पर सरकार फैसला लेगी। इसके लिए निगम अधिकारी प्रस्ताव बनाकर भेजेंगे और उसके बाद सरकार अनुमति देगी।
किसकी कितनी वित्तीय शक्ति निर्धारित
नगर निगम
नगर निगम सदन की वित्तीय शक्ति को एक करोड़ से ढाई करोड़ कर दिया गया है। वहीं, आयुक्त के पास केवल एक करोड़ तक के खर्च की वित्तीय शक्ति रहेगी।
नगर परिषद
नगर परिषद में चेयरमैन की शक्ति 25 से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दी गई है। जबकि परिषद सदन को 25 लाख रुपये तक की शक्ति प्रशासकीय अनुमति और 25 लाख रुपये की वित्तीय शक्ति टेंडर की अनुमति के लिए दी गई है। हालांकि दोनों की दरें सीलिंग रेट के अंतर्गत होनी चाहिए।
नगर पालिका
नगर पालिका में जिला निगम आयुक्त की शक्ति 15 से बढ़ाकर 50 लाख रुपये तक के विकास कार्यों की वित्तीय शक्ति दी गई है। जबकि पालिका को 15 लाख तक की वित्तीय शक्ति प्रशासकीय अनुमति और 15 लाख तक के टेंडर की अनुमति दी है।
आदेशानुसार ही होगा काम: एक्सईएन
जो भी सरकार के आदेश हैं, उसकी के मुताबिक काम किया जा रहा है। आगे भी सरकार के दिशानिर्देश का कड़ाई से पालन करते हुए ही काम होगा।
- प्रदीप कल्याण, एक्सईएन, नगर निगम