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डीसी और एसपी के पीए सांसद प्रतिनिधि तक का फोन नहीं उठाते, उठाते हैं तो देना होता है परिचय
अमर उजाला ब्यूरो/पानीपत
Updated Thu, 03 Mar 2016 12:28 AM IST
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जाट आरक्षण आंदोलन के बाद लोगों की नजरों में चढ़े प्रशासनिक और विभागीय अधिकारी सांसद अश्विनी चोपड़ा की कार्यकर्ता मीटिंग में भी नहीं पहुंचे।
कार्यकर्ताओं ने सांसद के सामने अधिकारियों पर अनदेखी बरतने का आरोप लगाया। कार्यकर्ताओं ने यहां तक कह दिया कि डीसी और एसपी के पीए सांसद के प्रतिनिधि तक का भी फोन नहीं उठाते।
अगर उठाते हैं तो उनको प्रतिनिधि ने अपना परिचय देना पड़ता है। भाजपा को लोगों की नजरों में बना रहना है तो अफसरशाही पर लगाम लगानी होगी।
जिलाध्यक्ष प्रमोद विज ने भी कार्यकर्ताओं की बातों का समर्थन किया। हुआ यूं कि सांसद अश्विनी चोपड़ा बुधवार को सरकारी विश्राम गृह में कार्यकर्ताओं की मीटिंग लेने पहुंचे थे।
यहां पर पहले से ही नाममात्र के कार्यकर्ता रहे। उन्होंने भी अपनी भड़ास निकालनी शुरू कर दी। हालांकि मंच से जाट आरक्षण आंदोलन को लेकर किसी के बारे में किसी तरह की बात न कहने की अपील भी की गई।
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कार्यकर्ता राजेश खैंची ने कहा कि वह अपने एक काम को लेकर 20 बार सांसद के प्रतिनिधि के पास आया है। वे डीसी व एसपी को फोन करते हैं तो उनका फोन तक नहीं पिक करते।
डीसी के पीए फोन उठाते हैं तो सांसद प्रतिनिधि को अपना परिचय देना पड़ता है। इसके बाद भी उसका छोटा सा काम नहीं हो पाया है।
जिले समेत प्रदेश की अफसरशाही बेलगाम हो चुकी है। अफसरों के चलते ही प्रदेश में आरक्षण की आग बारुद की तरह फटी है। उन्होंने सांसद से गांवों में जाकर लोगों की समस्याओं को सुनने की मांग की।
कार्यकर्ता की बातों को सुनकर जिलाध्यक्ष प्रमोद विज फिर से मंच पर आए। उन्होंने अफसरों का इस तरह का व्यवहार ठीक नहीं है। सांसद के प्रतिनिधि को अपना परिचय पीए को देना पड़े तो चिंता का विषय है। अधिकारियों को अपना व्यवहार नम्र करना होगा। वे सांसद के साथ गांवों में दौरा करेंगे।
सुनील सोनी ने कहा कि आरक्षण आंदोलन के बाद समाज बिरादरियों में बंट गया है। यह चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि मंत्री की कोठी में आगजनी और तोड़फोड़ में डकैती की धारा लगा दी, बाकी कई लोगों की शिकायत तक नहीं ली जा रही। प्रशासन को इस मामले में सभी मामलों में एक जैसी धारा लगनी चाहिए। सरकार दोषियों को सामने लेकर आएं।
सुलतान बोहत ने कहा कि आरक्षण आंदोलन में दोषियों को सामने लाकर सजा दी जाए। इससे लोगों का गुस्सा शांत होगा।
सुभाष मनचंदा ने कहा कि प्रशासन पूरे मामले में मूक दर्शक बना रहा। आईएएस, आईपीएस व थाना प्रभारियों के सामने लोगों ने हथियार लहराए, लेकिन किसी तरह की कार्रवाई नहीं की जा सकी।
जगबीर बबैल ने कहा कि रेल बजट में पानीपत-मेरठ रेलवे लाइन की उम्मीद लगा रहे थे, लेकिन बजट में इस बारे किसी तरह का जिक्र नहीं किया गया। उन्होंने बस स्टैंड की समस्या के समाधान की मांग की।
सांसद बोले गड़बड़ करने वाले अधिकारियों पर कसेंगे नकेल
सांसद अश्विनी चोपड़ा ने कहा कि गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों पर नकेल कसी जाएगी। वे इसको लेकर गंभीर हैं और मुख्यमंत्री से इस विषय में बात करेंगे। उन्होंने गत दिनों ट्यूबवेल लगाने के खेल में एक्सईएन पर कार्रवाई की है। सांसद इस मामले में बड़ी मछलियों के हाथ से निकलने पर कुछ शांत रहे। उन्होंने कहा कि उन्होंने संसद में पानीपत-मेरठ रेलवे लाइन की बात को उठाया है। वे व्यक्तिगत रूप से भी रेल मंत्री से इस विषय में मिले हैं।
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कार्यकर्ताओं ने सांसद के सामने अधिकारियों पर अनदेखी बरतने का आरोप लगाया। कार्यकर्ताओं ने यहां तक कह दिया कि डीसी और एसपी के पीए सांसद के प्रतिनिधि तक का भी फोन नहीं उठाते।
अगर उठाते हैं तो उनको प्रतिनिधि ने अपना परिचय देना पड़ता है। भाजपा को लोगों की नजरों में बना रहना है तो अफसरशाही पर लगाम लगानी होगी।
जिलाध्यक्ष प्रमोद विज ने भी कार्यकर्ताओं की बातों का समर्थन किया। हुआ यूं कि सांसद अश्विनी चोपड़ा बुधवार को सरकारी विश्राम गृह में कार्यकर्ताओं की मीटिंग लेने पहुंचे थे।
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यहां पर पहले से ही नाममात्र के कार्यकर्ता रहे। उन्होंने भी अपनी भड़ास निकालनी शुरू कर दी। हालांकि मंच से जाट आरक्षण आंदोलन को लेकर किसी के बारे में किसी तरह की बात न कहने की अपील भी की गई।
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कार्यकर्ता राजेश खैंची ने कहा कि वह अपने एक काम को लेकर 20 बार सांसद के प्रतिनिधि के पास आया है। वे डीसी व एसपी को फोन करते हैं तो उनका फोन तक नहीं पिक करते।
डीसी के पीए फोन उठाते हैं तो सांसद प्रतिनिधि को अपना परिचय देना पड़ता है। इसके बाद भी उसका छोटा सा काम नहीं हो पाया है।
जिले समेत प्रदेश की अफसरशाही बेलगाम हो चुकी है। अफसरों के चलते ही प्रदेश में आरक्षण की आग बारुद की तरह फटी है। उन्होंने सांसद से गांवों में जाकर लोगों की समस्याओं को सुनने की मांग की।
कार्यकर्ता की बातों को सुनकर जिलाध्यक्ष प्रमोद विज फिर से मंच पर आए। उन्होंने अफसरों का इस तरह का व्यवहार ठीक नहीं है। सांसद के प्रतिनिधि को अपना परिचय पीए को देना पड़े तो चिंता का विषय है। अधिकारियों को अपना व्यवहार नम्र करना होगा। वे सांसद के साथ गांवों में दौरा करेंगे।
सुनील सोनी ने कहा कि आरक्षण आंदोलन के बाद समाज बिरादरियों में बंट गया है। यह चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि मंत्री की कोठी में आगजनी और तोड़फोड़ में डकैती की धारा लगा दी, बाकी कई लोगों की शिकायत तक नहीं ली जा रही। प्रशासन को इस मामले में सभी मामलों में एक जैसी धारा लगनी चाहिए। सरकार दोषियों को सामने लेकर आएं।
सुलतान बोहत ने कहा कि आरक्षण आंदोलन में दोषियों को सामने लाकर सजा दी जाए। इससे लोगों का गुस्सा शांत होगा।
सुभाष मनचंदा ने कहा कि प्रशासन पूरे मामले में मूक दर्शक बना रहा। आईएएस, आईपीएस व थाना प्रभारियों के सामने लोगों ने हथियार लहराए, लेकिन किसी तरह की कार्रवाई नहीं की जा सकी।
जगबीर बबैल ने कहा कि रेल बजट में पानीपत-मेरठ रेलवे लाइन की उम्मीद लगा रहे थे, लेकिन बजट में इस बारे किसी तरह का जिक्र नहीं किया गया। उन्होंने बस स्टैंड की समस्या के समाधान की मांग की।
सांसद बोले गड़बड़ करने वाले अधिकारियों पर कसेंगे नकेल
सांसद अश्विनी चोपड़ा ने कहा कि गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों पर नकेल कसी जाएगी। वे इसको लेकर गंभीर हैं और मुख्यमंत्री से इस विषय में बात करेंगे। उन्होंने गत दिनों ट्यूबवेल लगाने के खेल में एक्सईएन पर कार्रवाई की है। सांसद इस मामले में बड़ी मछलियों के हाथ से निकलने पर कुछ शांत रहे। उन्होंने कहा कि उन्होंने संसद में पानीपत-मेरठ रेलवे लाइन की बात को उठाया है। वे व्यक्तिगत रूप से भी रेल मंत्री से इस विषय में मिले हैं।