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पानीपत: निगम में अब नई प्रॉपर्टी आईडी बनाने का भी काम हुआ बंद
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पानीपत। निगम अधिकारियों की मनमानी अब शहरवासियों के लिए परेशानी बनती जा रही है। नगर निगम की प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच ने अब नई प्रॉपर्टी आईडी बनाने का काम भी बंद कर दिया है। आरोप है कि सिफारिशों पर ही कुछ फाइलों को निपटाया जा रहा है, लेकिन आम लोग परेशान हैं। पिछले तीन दिनों में करीब 350 नई प्रॉपर्टी आईडी की फाइलें निगम में जमा हो गईं हैं।
अधिकारियों का कहना है कि जब तक याशी का सर्वे लागू नहीं होता, तब तक नई आईडी नहीं बनेगी। याशी का सर्वे लागू होने का अभी इंतजार है और जीआईएस के पुराने सर्वे के अनुसार अधिकारी प्रॉपर्टी आईडी अब बना नहीं रहे। इससे शहरवासियों के सामने विकट परिस्थितियां बनती जा रही हैं। लोगों को निगम कार्यालय के चक्कर काटने पड़ते हैं, क्योंकि प्रॉपर्टी आईडी बनने के बाद ही उसकी एनडीसी बनेगी, जिसका शुल्क भरने के बाद ही संपत्ति की रजिस्टरी कराई जा सकती है।
निगम अफसर खुद मानते हैं कि याशी के सर्वे का डेटा 70 प्रतिशत ही इंटीग्रेटेड है, 30 प्रतिशत नहीं। यह डेटा डबल हो सकता है। वैकेंट प्लाट का हो सकता है और फर्जी भी। इसके बाद भी निकाय को डेटा के सही होने का सर्टिफिकेट देने की कोशिश की जा रही है ताकि याशी एजेंसी को उनके सर्वे का निगम से भुगतान हो सके। इससे सीधे तौर पर दो नुकसान होंगे। निगम को याशी कंपनी को लाखों करोड़ों का भुगतान करना पड़ेगा, जबकि शहरवासियों के लिए नए सर्वे से फिर से आईडी बनवानी होगी। चूंकि पुरानी आईडी जीआईएस सर्वे की थी। इसलिए उसे रद्द समझा जाएगा।
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निगम अधिकारियों की इस मनमर्जी पर शहरवासियों का कहना है कि वे निगम को प्रॉपर्टी टैक्स दे रहे हैं। विकास शुल्क भी सरकार के खाते में जमा कराया जा रहा है। बावजूद इसके वे धक्के खाने को मजबूर हैं। अधिकारी केवल सिफारिशी फाइलों पर हस्ताक्षर कर रहे हैं। केवल रसूखदारों के काम हो रहे हैं। आम लोगों को बैरंग लौटाया जा रहा है। सर्वे याशी का हो या जीआईएस का, उन्हें अपनी प्रॉपर्टी आईडी और एनडीसी से मतलब है। वे भी नहीं बनाए जा रहे।
वर्जन-
सर्वे लागू होने तक करना होगा इंतजार : निगम
शहरवासियों को याशी के सर्वे के लागू होने का इंतजार करना पड़ेगा। तब तक के लिए नई आईडी बनाने पर रोक लगाई गई है। अभी तक निगम में नई आईडी से संबंधित करीब 350 फाइलें लंबित हैं।
- समयपाल सिंह, जेडटीओ, नगर निगम।
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अधिकारियों का कहना है कि जब तक याशी का सर्वे लागू नहीं होता, तब तक नई आईडी नहीं बनेगी। याशी का सर्वे लागू होने का अभी इंतजार है और जीआईएस के पुराने सर्वे के अनुसार अधिकारी प्रॉपर्टी आईडी अब बना नहीं रहे। इससे शहरवासियों के सामने विकट परिस्थितियां बनती जा रही हैं। लोगों को निगम कार्यालय के चक्कर काटने पड़ते हैं, क्योंकि प्रॉपर्टी आईडी बनने के बाद ही उसकी एनडीसी बनेगी, जिसका शुल्क भरने के बाद ही संपत्ति की रजिस्टरी कराई जा सकती है।
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निगम अफसर खुद मानते हैं कि याशी के सर्वे का डेटा 70 प्रतिशत ही इंटीग्रेटेड है, 30 प्रतिशत नहीं। यह डेटा डबल हो सकता है। वैकेंट प्लाट का हो सकता है और फर्जी भी। इसके बाद भी निकाय को डेटा के सही होने का सर्टिफिकेट देने की कोशिश की जा रही है ताकि याशी एजेंसी को उनके सर्वे का निगम से भुगतान हो सके। इससे सीधे तौर पर दो नुकसान होंगे। निगम को याशी कंपनी को लाखों करोड़ों का भुगतान करना पड़ेगा, जबकि शहरवासियों के लिए नए सर्वे से फिर से आईडी बनवानी होगी। चूंकि पुरानी आईडी जीआईएस सर्वे की थी। इसलिए उसे रद्द समझा जाएगा।
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निगम अधिकारियों की इस मनमर्जी पर शहरवासियों का कहना है कि वे निगम को प्रॉपर्टी टैक्स दे रहे हैं। विकास शुल्क भी सरकार के खाते में जमा कराया जा रहा है। बावजूद इसके वे धक्के खाने को मजबूर हैं। अधिकारी केवल सिफारिशी फाइलों पर हस्ताक्षर कर रहे हैं। केवल रसूखदारों के काम हो रहे हैं। आम लोगों को बैरंग लौटाया जा रहा है। सर्वे याशी का हो या जीआईएस का, उन्हें अपनी प्रॉपर्टी आईडी और एनडीसी से मतलब है। वे भी नहीं बनाए जा रहे।
वर्जन-
सर्वे लागू होने तक करना होगा इंतजार : निगम
शहरवासियों को याशी के सर्वे के लागू होने का इंतजार करना पड़ेगा। तब तक के लिए नई आईडी बनाने पर रोक लगाई गई है। अभी तक निगम में नई आईडी से संबंधित करीब 350 फाइलें लंबित हैं।
- समयपाल सिंह, जेडटीओ, नगर निगम।