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Panipat News: अब सरकारी इमारतों का भी होगा स्व सत्यापन
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जितेंद्र नरवाल
पानीपत। शहरी क्षेत्र की संपत्तियों के स्वयं सत्यापन को लेकर सरकार अब सख्त हो चुकी है ताकि सभी संपत्तियों के असल मालिकों की पहचान के साथ सभी संपत्तियों का सटीक डाटा सरकार के पास रिकॉर्ड में रह सके। इसे लेकर सरकार ने निगम अधिकारियों को शहरवासियों के साथ सरकारी इमारतों का भी स्व सत्यापन करवाने के आदेश दिए हैं।
इनमें निगम अपनी इमारतों, कार्यालय, रिहायशी भवनों का भी सत्यापन करेगा। इसके अलावा क्षेत्र में जिस भी विभाग की सरकारी इमारत होंगी, उनके मुखियाओं से उनका भी रिकॉर्ड अपडेट करवाना होगा। इसे लेकर निगम अधिकारियों ने सरकारी संपत्तियों के मुखियों को नोटिस तक भिजवा दिए हैं।
स्वयं सत्यापन के बाद सरकारी विभागों से भी निगम उनकी संपत्तियों का कर वसूलेगा। इसके अलावा शहर में काफी सारी संपत्तियां ऐसी हैं जिनका रिकॉर्ड निगम के पास भी नहीं है। निगम अधिकारियों को अब इनके मालिकों के नाम, पता ओर मोबाइल नंबर भी पोर्टल पर अपडेट करवाने होंगे।
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इसके लिए निगम अधिकारियों को सरकार ने 29 फरवरी तक का समय दिया है। इस काम में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा भी की जा सकती है।
शहरी स्थानीय निकाय ने पहले फेज में नियमित 211 कॉलोनियों का डाटा एनडीसी और जीआईएस पोर्टल पर लाइव कर दिया है। दूसरे चरण की 193 नियमित की गई कॉलोनियों में कुछ निकायों ने विकास शुल्क को कॉलोनियों के साथ अपडेट नहीं किया है। इनमें अंसध, इंद्री, एलानाबाद और गुरुग्राम तक शामिल हैं। सरकार ने दो दिन में इन निकायों को संपत्तियों के विकास शुल्क को अपडेट करने के निर्देश दिए हैं।
शहरी स्थानीय निकाय ने नियमित कॉलोनियों, एचएसवीपी, एचएसआईडीसी, हाउसिंग बोर्ड, नगर सुधार मंडल, सरकारी कॉलोनी, लाइसेंसशुदा मंजूर कॉलोनी समेत लाल डोर, पुरानी देह आबादी का एरिया का डाटा पोर्टल पर अपलोड किया गया है। इनकी बांउड्री के बाहर की अवैध कॉलोनियों और संपत्तियों पर अधिकारियों को अब अवैध का टैग लगाना होगा। ताकि अनियमित कॉलोनियों को अलग से पोर्टल पर मैप किया जा सके।
खेती योग्य जमीन को रखना होगा अलग
खेतों की जमीन पर शहरों में सबसे ज्यादा अवैध कॉलोनियों विकसित हो जाती हैं। इनको अलग करने के लिए सरकार ने खेतीबाड़ी की एक अलग श्रेणी तक तैयार कर दी है। अब निगम अधिकारियों को ऐसी जमीन को खेतीबाड़ी की जमीन के लिए ही पोर्टल पर टैग करना होगा। ताकि इनकी पहचान अलग रह सके।
शहरवासियों के लिए आए दिन कैंप लगाकर संपत्तियों के स्वयं सत्यापन का काम कराया जा रहा है। वहीं, सरकार की ओर से जारी किए निर्देशों का पालन किया जाएगा। सरकारी विभागों को भी उनकी संपत्तियों के स्वयं सत्यापन को लेकर नोटिस जारी किए गए हैं। - कुलदीप राणा, क्षेत्रीय कराधान अधिकारी, नगर निगम।
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पानीपत। शहरी क्षेत्र की संपत्तियों के स्वयं सत्यापन को लेकर सरकार अब सख्त हो चुकी है ताकि सभी संपत्तियों के असल मालिकों की पहचान के साथ सभी संपत्तियों का सटीक डाटा सरकार के पास रिकॉर्ड में रह सके। इसे लेकर सरकार ने निगम अधिकारियों को शहरवासियों के साथ सरकारी इमारतों का भी स्व सत्यापन करवाने के आदेश दिए हैं।
इनमें निगम अपनी इमारतों, कार्यालय, रिहायशी भवनों का भी सत्यापन करेगा। इसके अलावा क्षेत्र में जिस भी विभाग की सरकारी इमारत होंगी, उनके मुखियाओं से उनका भी रिकॉर्ड अपडेट करवाना होगा। इसे लेकर निगम अधिकारियों ने सरकारी संपत्तियों के मुखियों को नोटिस तक भिजवा दिए हैं।
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स्वयं सत्यापन के बाद सरकारी विभागों से भी निगम उनकी संपत्तियों का कर वसूलेगा। इसके अलावा शहर में काफी सारी संपत्तियां ऐसी हैं जिनका रिकॉर्ड निगम के पास भी नहीं है। निगम अधिकारियों को अब इनके मालिकों के नाम, पता ओर मोबाइल नंबर भी पोर्टल पर अपडेट करवाने होंगे।
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इसके लिए निगम अधिकारियों को सरकार ने 29 फरवरी तक का समय दिया है। इस काम में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा भी की जा सकती है।
शहरी स्थानीय निकाय ने पहले फेज में नियमित 211 कॉलोनियों का डाटा एनडीसी और जीआईएस पोर्टल पर लाइव कर दिया है। दूसरे चरण की 193 नियमित की गई कॉलोनियों में कुछ निकायों ने विकास शुल्क को कॉलोनियों के साथ अपडेट नहीं किया है। इनमें अंसध, इंद्री, एलानाबाद और गुरुग्राम तक शामिल हैं। सरकार ने दो दिन में इन निकायों को संपत्तियों के विकास शुल्क को अपडेट करने के निर्देश दिए हैं।
शहरी स्थानीय निकाय ने नियमित कॉलोनियों, एचएसवीपी, एचएसआईडीसी, हाउसिंग बोर्ड, नगर सुधार मंडल, सरकारी कॉलोनी, लाइसेंसशुदा मंजूर कॉलोनी समेत लाल डोर, पुरानी देह आबादी का एरिया का डाटा पोर्टल पर अपलोड किया गया है। इनकी बांउड्री के बाहर की अवैध कॉलोनियों और संपत्तियों पर अधिकारियों को अब अवैध का टैग लगाना होगा। ताकि अनियमित कॉलोनियों को अलग से पोर्टल पर मैप किया जा सके।
खेती योग्य जमीन को रखना होगा अलग
खेतों की जमीन पर शहरों में सबसे ज्यादा अवैध कॉलोनियों विकसित हो जाती हैं। इनको अलग करने के लिए सरकार ने खेतीबाड़ी की एक अलग श्रेणी तक तैयार कर दी है। अब निगम अधिकारियों को ऐसी जमीन को खेतीबाड़ी की जमीन के लिए ही पोर्टल पर टैग करना होगा। ताकि इनकी पहचान अलग रह सके।
शहरवासियों के लिए आए दिन कैंप लगाकर संपत्तियों के स्वयं सत्यापन का काम कराया जा रहा है। वहीं, सरकार की ओर से जारी किए निर्देशों का पालन किया जाएगा। सरकारी विभागों को भी उनकी संपत्तियों के स्वयं सत्यापन को लेकर नोटिस जारी किए गए हैं। - कुलदीप राणा, क्षेत्रीय कराधान अधिकारी, नगर निगम।