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अब निगम ठेकेदार सुधरेंगे और विकास कार्यों में भी होगा सुधार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 28 Nov 2021 01:48 AM IST
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Now corporation contractors will improve and development works will also improve
पानीपत। नगर निगम द्वारा 40 प्रतिशत तक घाटे में लिए जाने वाले टेंडर को रद्द करने और इनकी ईएमडी जब्त करने का अब सकारात्मक परिणाम निकला है। निगम ने ज्यादा घाटे वाले सभी टेंडर को रद्द करने के बाद इनको दोबारा लगाया था। अब इनके रेट महज 10 प्रतिशत तक ही घाटे में निकले हैं। इससे होड़ के चक्कर में ज्यादा घाटे में टेंडर लेने वाले ठेकेदारों में भी सुधार हुआ है और विकास कार्यों की गुणवत्ता में भी सुधार होने की गुंजाइश बनी है।
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विदित हो कि कि नगर निगम के ग्रामीण विधानसभा एरिया में करीब 21 करोड़ रुपये के 44 टेंडर 17 से 44 प्रतिशत तक के घाटे में लिए गए थे। इससे संबंधित विकास कार्यों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठने लगे थे। इन खबरों को ‘अमर उजाला’ ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद निगम ने कार्रवाई करते हुए ज्यादा घाटे वाले टेंडर के ठेकेदारों को नोटिस भेज उनसे स्पष्टीकरण मांगा। इसमें एजेंसी और ठेकेदार फेल हो गए।
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इसके बाद निगम ने कार्रवाई करते हुए इन सभी टेंडर की ईएमडी को जब्त कर लिया और टेंडर को रद्द कर दिया। इन टेंडर से करीब 17 लाख रुपये की ईएमडी की बचत भी हुई। फिर निगम ने नए सिरे से सभी टेंडर को लगाया। अब ये टेंडर 10 प्रतिशत तक के घाटे में निकले हैं। जिससे निगम और ठेकेदारों में तालमेल भी सही बना है और विकास कार्यों की गुणवत्ता पर उठने वाले सवाल भी सुलझ गए हैं।
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बनी थी भ्रष्टाचार की आशंका-
40 प्रतिशत तक मानइस में टेंडर लेने वाले ठेकेदारों का 18 प्रतिशत कार्यालय खर्च, 10 प्रतिशत मुनाफा और 7 प्रतिशत टैक्स जोड़ा जाए तो करीब 75 प्रतिशत बनता है। इसमें से महज 25 प्रतिशत में ठेकेदारों को काम करना था। अब 25 पैसे लागत में कोई भी विकास कार्य गुणवत्ता पूर्वक करने पर सवाल उठाए जाने लगे। कई पार्षदों ने भी इसका विरोध करते हुए कहा कि वे इतने घाटे वाले टेंडर से अपने वार्डों में विकास कार्य नहीं करवाएंगे। इसके बाद निगम ने इन टेंडरों को रद्द करते हुए इनकी ईएमडी भी जब्त कर ली थी।
काम भी पूरा नहीं और गुणवत्ता भी नहीं होनी थी-
नगर निगम के कनिष्ठ अभियंता अजय छौक्कर ने बताया कि ज्यादा घाटे वाले टेंडर में ठेकेदार या एजेंसी के लिए काम करना काफी मुश्किल हो जाता है। ठेकेदारों ने रेट तो भर दिए लेकिन काम करना उनके लिए भी चुनौती थी। कुछ ठेकेदारों ने अपने स्पष्टीकरण में भी कहा था कि वे इन रेट पर काम नहीं कर पाएंगे। इसलिए सभी टेंडर को रद्द किया गया था।

अब अनुकूल हैं रेट
टेंडर को रद्द करने के बाद नए टेंडर लगाए गए थे। अब इनके रेट अनुकूल आ रहे हैं। इनमें 10 प्रतिशत तक के घाटे वाले टेंडर के ही वर्क ऑर्डर जारी किए जा रहे हैं। जिससे विकास कार्यों में गुणवत्ता आ सके। किसी भी शर्त पर विकास कार्यों में गुणवत्ता से समझौता नहीं होने दिया जाएगा।
प्रदीप कल्याण, एक्सईएन, नगर निगम, पानीपत।
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