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Panipat News: दाखिला संख्या न बढ़ाने स्कूलों को जारी होगा नोटिस
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पानीपत। जिले में शिक्षा विभाग की ओर से सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए प्रवेश उत्सव कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके तहत शिक्षक घर-घर दस्तक दे रहे हैं। प्रवेश उत्सव के तहत शिक्षकों को स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ानी होगी। वहीं, कम छात्र संख्या वाले स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या नहीं बढ़ी तो मुखियाओं को कारण बताओ (शोकाॅज) नोटिस जारी किए जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि जिले में करीब दो दर्जन ऐसे स्कूल हैं जहां विद्यार्थियों की संख्या बहुत कम है। जिला शिक्षा अधिकारी राकेश बूरा ने बैठक कर सभी खंड शिक्षा अधिकारियों, स्कूल प्रमुखों व शिक्षकों को छात्र संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए थे। साथ ही, नामांकन बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है। गौरतलब है कि जिले को ड्रॉपआउट मुक्त बनाने के उद्देश्य से निजी स्कूलों की तर्ज पर विशेष नामांकन अभियान चलाया जा रहा है। स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षक घर-घर दस्तक दे रहे हैं। इस दौरान शिक्षकों द्वारा राजकीय स्कूलों की वर्ष भर की उपलब्धियां व गतिविधियां बताई जा रही हैं ताकि अभिभावकों को प्रेरित करते हुए वे उनके बच्चों का दाखिला अपने विद्यालय में करा सकें।
जागरूकता रैली निकालकर भी अभिभावकों को जागरूक किया जा रहा है। नुक्कड़ सभाओं के माध्यम से जिला शिक्षा अधिकारी भी विभाग की विभिन्न योजनाओं एवं बच्चों को मिलने वाली प्रोत्साहन योजनाओं की जानकारी दे रहे हैं। साथ ही, प्रतिभाशाली छात्रों द्वारा भी ग्रामवासियों को सरकारी विद्यालयों में नामांकन कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। शिक्षा विभाग ने पिछले साल की तुलना में नामांकन संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।राजकीय स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ाने के लिए माता-पिता की जागरूकता अनिवार्य है। हालांकि माता-पिता की सरकारी शिक्षा प्रणाली के प्रति जागरूकता की कमी भी दाखिला संख्या को प्रभावित कर सकती है। वहीं, आसपास के क्षेत्र में निजी स्कूलों की संख्या, निजी स्कूलों की सुविधाएं और सरकारी स्कूलों की प्रतिष्ठा आदि भी दाखिला संख्या को प्रभावित कर सकती है।
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सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षा विभाग ने पंचायतों का सहयोग मांगा है। विभाग ने इस मुहिम में पंचायतों से भी शामिल होने का आह्वान किया है। शिक्षा विभाग की पहल के बाद ग्रामीण भी आगे आए हैं और निजी स्कूल की बजाय सरकारी स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाने का फैसला लिया है।
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क्या है शोकाॅज नोटिस
शोकाॅज नोटिस एक औपचारिक दस्तावेज है जो स्कूल के प्रधानाचार्य या संबंधित अधिकारियों को जारी किया जाता है। इसका मतलब है कि अगर किसी सरकारी स्कूल में बच्चों के दाखिले की संख्या में अपेक्षित वृद्धि नहीं होती है, तो स्कूल के प्रधानाचार्य या संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा, जिसमें उन्हें यह बताना होगा कि ऐसा क्यों हुआ है और वे इस समस्या का समाधान कैसे करेंगे। सरकारी स्कूलों में दाखिला संख्या बढ़ाने का मुख्य उद्देश्य बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना और सरकारी शिक्षा प्रणाली में अधिक बच्चों को शामिल करना है। कारण बताओ नोटिस में अधिकारियों को अपनी बात स्पष्ट करने और समस्या के समाधान के लिए उठाए गए कदमों को बताना होता है। अगर अधिकारियों द्वारा संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता है या दाखिला संख्या में वृद्धि नहीं होती है, तो स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
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नामांकन बढ़ाने के तय किए लक्ष्य
जिला शिक्षा विभाग ने नामांकन बढ़ाने का लक्ष्य भी तय किया है। जिले में 418 राजकीय विद्यालय हैं। प्रत्येक स्कूल को कम से कम 10 प्रतिशत नामांकन बढ़ाने का लक्ष्य दिया गया है। 10 प्रतिशत से अधिक नामांकन करने पर संबंधित स्कूल व शिक्षकों को सम्मानित भी किया जाएगा। 30 प्रतिशत नामांकन बढ़ाने पर स्वर्ण पदक व प्रशस्ति-पत्र, 20 से 30 प्रतिशत पर रजत पदक तथा 15 से 20 प्रतिशत नामांकन बढ़ाने पर संबंधित स्कूल व शिक्षक को कांस्य पदक व प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।
वर्जन-
राजकीय स्कूलों में प्रवेश उत्सव कार्यक्रम के तहत शिक्षक घर-घर जाकर अभिभावकों को जागरूक कर रहे हैं। कम छात्र संख्या वाले स्कूलों में छात्र संख्या न बढ़ी तो संबंधित स्कूल मुखियाओं को शोकॉज नोटिस जारी किया जाएगा। ऐसे स्कूलों को विशेष हिदायत दी गई है। वहीं, शिक्षकों व स्कूलों को लक्ष्य भी दिया गया है। उम्मीद है कि नामांकन बढ़ाने में जिला प्रदेश में रिकार्ड तोड़ेगा।
- राकेश बूरा, जिला शिक्षा अधिकारी, पानीपत।
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उल्लेखनीय है कि जिले में करीब दो दर्जन ऐसे स्कूल हैं जहां विद्यार्थियों की संख्या बहुत कम है। जिला शिक्षा अधिकारी राकेश बूरा ने बैठक कर सभी खंड शिक्षा अधिकारियों, स्कूल प्रमुखों व शिक्षकों को छात्र संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए थे। साथ ही, नामांकन बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है। गौरतलब है कि जिले को ड्रॉपआउट मुक्त बनाने के उद्देश्य से निजी स्कूलों की तर्ज पर विशेष नामांकन अभियान चलाया जा रहा है। स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षक घर-घर दस्तक दे रहे हैं। इस दौरान शिक्षकों द्वारा राजकीय स्कूलों की वर्ष भर की उपलब्धियां व गतिविधियां बताई जा रही हैं ताकि अभिभावकों को प्रेरित करते हुए वे उनके बच्चों का दाखिला अपने विद्यालय में करा सकें।
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जागरूकता रैली निकालकर भी अभिभावकों को जागरूक किया जा रहा है। नुक्कड़ सभाओं के माध्यम से जिला शिक्षा अधिकारी भी विभाग की विभिन्न योजनाओं एवं बच्चों को मिलने वाली प्रोत्साहन योजनाओं की जानकारी दे रहे हैं। साथ ही, प्रतिभाशाली छात्रों द्वारा भी ग्रामवासियों को सरकारी विद्यालयों में नामांकन कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। शिक्षा विभाग ने पिछले साल की तुलना में नामांकन संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।राजकीय स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ाने के लिए माता-पिता की जागरूकता अनिवार्य है। हालांकि माता-पिता की सरकारी शिक्षा प्रणाली के प्रति जागरूकता की कमी भी दाखिला संख्या को प्रभावित कर सकती है। वहीं, आसपास के क्षेत्र में निजी स्कूलों की संख्या, निजी स्कूलों की सुविधाएं और सरकारी स्कूलों की प्रतिष्ठा आदि भी दाखिला संख्या को प्रभावित कर सकती है।
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सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षा विभाग ने पंचायतों का सहयोग मांगा है। विभाग ने इस मुहिम में पंचायतों से भी शामिल होने का आह्वान किया है। शिक्षा विभाग की पहल के बाद ग्रामीण भी आगे आए हैं और निजी स्कूल की बजाय सरकारी स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाने का फैसला लिया है।
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क्या है शोकाॅज नोटिस
शोकाॅज नोटिस एक औपचारिक दस्तावेज है जो स्कूल के प्रधानाचार्य या संबंधित अधिकारियों को जारी किया जाता है। इसका मतलब है कि अगर किसी सरकारी स्कूल में बच्चों के दाखिले की संख्या में अपेक्षित वृद्धि नहीं होती है, तो स्कूल के प्रधानाचार्य या संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा, जिसमें उन्हें यह बताना होगा कि ऐसा क्यों हुआ है और वे इस समस्या का समाधान कैसे करेंगे। सरकारी स्कूलों में दाखिला संख्या बढ़ाने का मुख्य उद्देश्य बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना और सरकारी शिक्षा प्रणाली में अधिक बच्चों को शामिल करना है। कारण बताओ नोटिस में अधिकारियों को अपनी बात स्पष्ट करने और समस्या के समाधान के लिए उठाए गए कदमों को बताना होता है। अगर अधिकारियों द्वारा संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता है या दाखिला संख्या में वृद्धि नहीं होती है, तो स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
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नामांकन बढ़ाने के तय किए लक्ष्य
जिला शिक्षा विभाग ने नामांकन बढ़ाने का लक्ष्य भी तय किया है। जिले में 418 राजकीय विद्यालय हैं। प्रत्येक स्कूल को कम से कम 10 प्रतिशत नामांकन बढ़ाने का लक्ष्य दिया गया है। 10 प्रतिशत से अधिक नामांकन करने पर संबंधित स्कूल व शिक्षकों को सम्मानित भी किया जाएगा। 30 प्रतिशत नामांकन बढ़ाने पर स्वर्ण पदक व प्रशस्ति-पत्र, 20 से 30 प्रतिशत पर रजत पदक तथा 15 से 20 प्रतिशत नामांकन बढ़ाने पर संबंधित स्कूल व शिक्षक को कांस्य पदक व प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।
वर्जन-
राजकीय स्कूलों में प्रवेश उत्सव कार्यक्रम के तहत शिक्षक घर-घर जाकर अभिभावकों को जागरूक कर रहे हैं। कम छात्र संख्या वाले स्कूलों में छात्र संख्या न बढ़ी तो संबंधित स्कूल मुखियाओं को शोकॉज नोटिस जारी किया जाएगा। ऐसे स्कूलों को विशेष हिदायत दी गई है। वहीं, शिक्षकों व स्कूलों को लक्ष्य भी दिया गया है। उम्मीद है कि नामांकन बढ़ाने में जिला प्रदेश में रिकार्ड तोड़ेगा।
- राकेश बूरा, जिला शिक्षा अधिकारी, पानीपत।