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Panipat News: उरलाना गांव में बंद रहीं भिट्ठयां पर जांच के लिए टीम नहीं पहुंची

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 16 Sep 2026 02:39 AM IST
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No team arrived to inspect the blocked *bhittiyan* (earthen embankments/bunds) in Urlana village.
जगमहेंद्र सरोहापानीपत/मतलौडा। जिले के आखिरी छोर पर बसे उरलाना कलां और उरलाना खुर्द गांव में इन दिनों नकली दूध, मावा और पनीर के काले कारोबार को लेकर माहौल बेहद गरमा गया है। शिकायतों के बावजूद अब तक वहां जांच के लिए कोई टीम नहीं पहुंची लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान ज्यादातर भट्ठी और दुकानें बंद दिखीं।
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मिठाई का काम इतना फैला नजर आया कि गांव के हर पांचवें घर में मावे की भट्ठी और हर सातवें घर में मिठाई की दुकान खुली नजर आई। किसान संगठनों ने यहां 150 से 200 भट्ठी होने का दावा किया है। यहां दूध से दही और दूध से बनने वाली कोई भी मिठाई थोक में ले सकते हैं। पशुपालकों और किसान संगठनों द्वारा नकली मिठाई बनाने और गांव से दूध न खरीदने के विरोध के बाद मंगलवार को कार्रवाई और छापेमारी के डर से गांव की अधिकांश भट्ठियों के शटर दिनभर बंद रहे। 300 से 400 गज के तीन मंजिला मकानों में चल रही इन आधुनिक भट्ठियों पर ताले लटके नजर आए। हालांकि देर शाम होते ही कुछ स्थानों पर भट्ठियां दोबारा सुलगने लगीं।
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आठ हजार लीटर दूध की आपूर्ति का रहस्य और पशुपालकों का विरोध : ग्रामीणों और पशुपालकों ने बताया कि गांव की भट्ठियों पर हर रोज लगभग 10 हजार लीटर दूध की खपत होती है। इसके विपरीत, पूरे उरलाना गांव के पशुपालकों से प्रतिदिन केवल 1500 से 2000 लीटर दूध ही खरीदा जाता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बाकी का आठ हजार लीटर दूध कहां से आ रहा है? पशुपालकों का सीधा आरोप है कि भट्ठी संचालक गांव के दूध को खरीदने के बजाय बाहर से मिलने वाले केमिकल, पाउडर और अन्य संदिग्ध विकल्पों का इस्तेमाल कर नकली मावा और पनीर तैयार कर रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर पशुपालकों और किसान यूनियनों ने मोर्चा खोल रखा है।
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दूध के दामों पर बिगड़ी बात, भाटिया भवन में हुई पंचायत
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मामला तूल पकड़ने के बाद भट्ठी संचालकों और दूध सप्लायरों ने मंगलवार को गांव के भाटिया भवन में एक आपातकालीन पंचायत बुलाई। पंचायत की अध्यक्षता पूर्व सरपंच कृष्ण भट्ठी के पिता महाबीर और संदीप विर्क ने की। संजय भाटिया और बलबीर सिंह ने पंचायत में पशुपालकों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि पहले वीटा के रेट के हिसाब से दूध खरीदा जाता था। पशुपालक अचानक दूध के दाम बढ़ाकर 100 रुपये प्रति किलो करने की मांग कर रहे थे, जबकि संचालक इसे धीरे-धीरे बढ़ाने के पक्ष में थे। इसी बात पर सहमति नहीं बन सकी। भट्ठी संचालकों ने कहा कि यदि किसी को लगता है कि वे जहर बेच रहे हैं, तो प्रशासन किसी भी समय आकर उनके खाद्य पदार्थों के नमूने ले सकता है। यदि कमी पाई जाती है तो वे कार्रवाई भुगतने को तैयार हैं।

60 साल पुराना काम, उत्तर प्रदेश तक फैला नेटवर्क
उरलाना गांव में 60 साल पहले रामलुभाया द्वारा शुरू किया गया मावे की बर्फी का काम आज करोड़ों के टर्नओवर वाले विशाल उद्योग का रूप ले चुका है। यहां आधुनिक बॉयलरों से भट्ठी चलती हैं। यहां तैयार होने वाले मावे, पनीर, दही और मिठाइयों (विशेषकर रसगुल्लों) की आपूर्ति पानीपत शहर से लेकर उत्तर प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली तक बड़े पैमाने पर की जाती है। आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए गांव में बड़े स्तर पर मिठाइयों का निर्माण करने की तैयारी की जा रही है।


त्योहारी सीजन में नकली मावे और मिठाइयों के संभावित खतरे को देखते हुए खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग भी सतर्क हो गया है। उरलाना गांव में फिलहाल मिठाई और मावे के सैंपल लेने के लिए विशेष टीम जल्द ही गांव में छापेमारी करेगी। यदि जांच के दौरान किसी भी भट्ठी या दुकान पर मिलावट या घटिया सामग्री पाई जाती है, तो संचालकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. बीरेंद्र यादव, जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी।
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