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फल भोगे बिना कोई नहीं बचता : अरुण चंद्र

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 31 Jul 2025 02:47 AM IST
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No one survives without reaping the benefits: Arun Chandra
माई सिटी रिपोर्टर
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पानीपत। अग्रवाल मंडी स्थित जैन स्थानक में आयोजित धर्मसभा में मुनि अरुण चंद्र महाराज ने जीवन के उतार-चढ़ाव, पाप-पुण्य और आत्मा की शुद्धि को प्रभावशाली शब्दों में समझाया। जिनको सुनकर हर कोई गदगद हो गया।

मुनि अरुणचंद्र महाराज यहां चातुर्मास में ठहरे हुए हैं। उनके साथ पाठ पर उनके शिष्य अभिषेक मुनि व अभिनंदन मुनि भी विराजमान हैं। अरुणचंद्र मुनि महाराज ने श्रद्धालुओं को प्रतिक्रमण विषय पर एक अत्यंत भावप्रवण और आत्ममंथन करा देने वाला प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि अनुकूलता और प्रतिकूलता के बीच में यह जीव झूलता रहता है। पुण्य अगर प्रबल हो तो पाप को ढक सकता है लेकिन फल भोगे बिना कोई नहीं बचता। पाप का ऋण चुकाना ही पड़ेगा। उन्होंने जैन धर्म की छह आवश्यक साधनाओं में से प्रतिक्रमण को आत्मा की ओर लौटने की सबसे महत्वपूर्ण साधना बताया। उन्होंने तीन कारण (कर्म करना, करवाना, अनुमोदन करना) और तीन योग (मन, वचन, काया) के माध्यम से होने वाले पापों की चर्चा की और बताया कि पाप केवल क्रिया नहीं सोच भी है। उसका प्रायश्चित प्रतिक्रमण से ही संभव है।
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