{"_id":"69a74ec645de4cd53f021efa","slug":"no-concrete-evidence-was-given-for-the-delay-in-filing-the-claim-the-petition-was-dismissed-panipat-news-c-244-1-pnp1001-153198-2026-03-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panipat News: दावा करने में देरी का नहीं दिया ठोस प्रमाण, खारिज की याचिका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Panipat News: दावा करने में देरी का नहीं दिया ठोस प्रमाण, खारिज की याचिका
विज्ञापन
पानीपत। ऋण जमा करने के लिए बीमा कंपनी के खिलाफ की गई शिकायत को जिला उपभोक्ता आयोग ने खारिज कर दिया। आयोग ने कहा कि एक बार दावा वापस लेने के 139 दिन बाद फिर दावा किया गया। इसमें देरी का कोई ठोस प्रमाण नहीं दिया गया।
पानीपत की एकक महिला ने शिकायत देकर बताता था कि उनके पति ने आदित्य बिरला हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी से बीमा पॉलिसी ली थी। जिसकी अवधि अगस्त 2022 से 22 अगस्त 2027 की अवधि तक थी। वर्ष 2022 में एचडीएफसी बैंक से 10,25,698 रुपये का ऋण लेकर एक्सयूवी-300 कार खरीदी थी। अक्टूबर 2022 में उनकी तबीयत खराब हुई और उन्हें पहले पानीपत के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाद में हिसार के अस्पताल में भर्ती रहे। 30 नवंबर 2022 को उनकी अचानक मृत्यु हो गई।
जिस समय उनकी मृत्यु हुई तो उस समय करीब 7,96,613 रुपये का ऋण शेष था। जिसकी भरपाई करने के लिए बीमा कंपनी को आवेदन दिया गया। कई बार आग्रह किया, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। साथ ही आरोप लगाया कि बैंक ने 14 सितंबर 2023 को 4,80,000 रुपये जबरन वसूल लिए।
विज्ञापन
मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष डॉ. आरके डोगरा की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। सुनवाई के दौरान पाया कि बीमा अवधि 23 अगस्त 2022 से 22 अगस्त 2027 तक थी। इससे पहले 2 जनवरी 2025 को एक शिकायत दायर की गई थी, जिसे 19 नवंबर 2025 को तकनीकी आधार पर वापस ले लिया गया। वर्तमान शिकायत 18 फरवरी 2026 को दायर की गई। आयोग ने कहा कि पिछली शिकायत वापस लेने के बाद 139 दिन की देरी से दोबारा याचिका दायर की गई, लेकिन देरी के समर्थन में कोई ठोस दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया। जिस कारण दावे को खारिज कर दिया।
विज्ञापन
पानीपत की एकक महिला ने शिकायत देकर बताता था कि उनके पति ने आदित्य बिरला हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी से बीमा पॉलिसी ली थी। जिसकी अवधि अगस्त 2022 से 22 अगस्त 2027 की अवधि तक थी। वर्ष 2022 में एचडीएफसी बैंक से 10,25,698 रुपये का ऋण लेकर एक्सयूवी-300 कार खरीदी थी। अक्टूबर 2022 में उनकी तबीयत खराब हुई और उन्हें पहले पानीपत के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाद में हिसार के अस्पताल में भर्ती रहे। 30 नवंबर 2022 को उनकी अचानक मृत्यु हो गई।
विज्ञापन
जिस समय उनकी मृत्यु हुई तो उस समय करीब 7,96,613 रुपये का ऋण शेष था। जिसकी भरपाई करने के लिए बीमा कंपनी को आवेदन दिया गया। कई बार आग्रह किया, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। साथ ही आरोप लगाया कि बैंक ने 14 सितंबर 2023 को 4,80,000 रुपये जबरन वसूल लिए।
विज्ञापन
मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष डॉ. आरके डोगरा की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। सुनवाई के दौरान पाया कि बीमा अवधि 23 अगस्त 2022 से 22 अगस्त 2027 तक थी। इससे पहले 2 जनवरी 2025 को एक शिकायत दायर की गई थी, जिसे 19 नवंबर 2025 को तकनीकी आधार पर वापस ले लिया गया। वर्तमान शिकायत 18 फरवरी 2026 को दायर की गई। आयोग ने कहा कि पिछली शिकायत वापस लेने के बाद 139 दिन की देरी से दोबारा याचिका दायर की गई, लेकिन देरी के समर्थन में कोई ठोस दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया। जिस कारण दावे को खारिज कर दिया।