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Panipat News: तीन दिन पहले टैक्स भरा, फिर जुड़ा लाखों का बकाया
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पानीपत। नगर निगम की पुरानी प्रॉपर्टी आईडी से नई आईडी को मर्ज करवाना लोगों के लिए अब सुविधा की बजाय दुविधा बन गया है। तीन दिन पहले विकास शुल्क के नाम पर हजारों रुपये का निगम में टैक्स भरा गया। निगम से नो ड्यूज सर्टिफिकेट भी लिया गया। इसके बाद पीड़ित जब तहसील में रजिस्ट्री करवाने पहुंचा तो उनकी संपत्ति पर निगम का 5.76 लाख रुपये विकास शुल्क समेत करीब 6.78 लाख रुपये बकाया दिखाया गया।
मामला वार्ड 18 की मुखीजा कॉलोनी का है। सुशील अपनी शिकायत लेकर नगर निगम पहुंचा। सुशील ने बताया कि तहसील में रजिस्ट्री करवाने पहुंचा तो उनकी संपत्ति पर निगम का 5.76 लाख रुपये विकास शुल्क बकाया दिखाया गया। इसके अलावा 87 हजार का संपत्ति कर, 14400 रुपये का ठोस अवशेष शुल्क भी बकाया मिला है। इस तरह उस पर करीब 6.78 लाख रुपये दिखाया गया। वहीं संपत्ति कर पर यह भी लिखा गया कि अगर आवेदक इस टैक्स को 31 मार्च से पहले भरता है तो उसे 18 हजार रुपये की छूट भी मिल सकती है। इससे उसकी रजिस्ट्री रुक गई और उसे फिर से निगम में चक्कर काटना पड़ा।
गौरतलब है कि अधिकारियों ने इसे ठीक करने की बजाय फिर से आपत्ति दर्ज करने की सलाह दे दी। सुशील ने कहा कि पहले प्रॉपर्टी आईडी और एनडीसी के लिए कई माह चक्कर काट चुका है। मामले की पड़ताल की गई तो पता चला कि उसकी संपत्ति कर आईडी में निगम ने दो दिन में ही दूसरी आईडी को मर्ज कर दिया है। सुशील ने बताया कि उसका 150 गज का प्लाट है। इसका बकाया विकास शुल्क तीन दिन पहले जमा करवाया। इसके लिए निगम में ऑनलाइन पोर्टल पर आपत्ति दर्ज की गई। अधिकारियों ने लेवल-1 और 2 पास किए। विकास शुल्क भरने के बाद एनडीसी दी गई थी।
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बता दें कि इससे पहले भी मुखीजा और न्यू मुखीजा कॉलोनी के ऐसे कई केस सामने आ चुके हैं। जिनमें प्रॉपर्टी आईडी गलत जोड़ने की वजह से लोगों की संपत्तियों पर करोड़ों रुपये का टैक्स बकाया दिखाया जा रहा है। शुगर मिल की प्रॉपर्टी आईडी को लोगों के खाली प्लाटों से जोड़कर उन पर करोड़ों रुपये का टैक्स बन चुका है।
त्रुटियों को ठीक कराया जाएगा
यह समस्या गंभीर है। ऐसे मामले पहले भी आ चुके हैं। इसको लेकर निगम अधिकारियों के साथ बैठक की जाएगी। इन त्रुटियों को ठीक करने के लिए प्लानिंग बनाई जाएगी।
दुष्यंत भट्ट, सीनियर डिप्टी मेयर।
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मामला वार्ड 18 की मुखीजा कॉलोनी का है। सुशील अपनी शिकायत लेकर नगर निगम पहुंचा। सुशील ने बताया कि तहसील में रजिस्ट्री करवाने पहुंचा तो उनकी संपत्ति पर निगम का 5.76 लाख रुपये विकास शुल्क बकाया दिखाया गया। इसके अलावा 87 हजार का संपत्ति कर, 14400 रुपये का ठोस अवशेष शुल्क भी बकाया मिला है। इस तरह उस पर करीब 6.78 लाख रुपये दिखाया गया। वहीं संपत्ति कर पर यह भी लिखा गया कि अगर आवेदक इस टैक्स को 31 मार्च से पहले भरता है तो उसे 18 हजार रुपये की छूट भी मिल सकती है। इससे उसकी रजिस्ट्री रुक गई और उसे फिर से निगम में चक्कर काटना पड़ा।
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गौरतलब है कि अधिकारियों ने इसे ठीक करने की बजाय फिर से आपत्ति दर्ज करने की सलाह दे दी। सुशील ने कहा कि पहले प्रॉपर्टी आईडी और एनडीसी के लिए कई माह चक्कर काट चुका है। मामले की पड़ताल की गई तो पता चला कि उसकी संपत्ति कर आईडी में निगम ने दो दिन में ही दूसरी आईडी को मर्ज कर दिया है। सुशील ने बताया कि उसका 150 गज का प्लाट है। इसका बकाया विकास शुल्क तीन दिन पहले जमा करवाया। इसके लिए निगम में ऑनलाइन पोर्टल पर आपत्ति दर्ज की गई। अधिकारियों ने लेवल-1 और 2 पास किए। विकास शुल्क भरने के बाद एनडीसी दी गई थी।
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बता दें कि इससे पहले भी मुखीजा और न्यू मुखीजा कॉलोनी के ऐसे कई केस सामने आ चुके हैं। जिनमें प्रॉपर्टी आईडी गलत जोड़ने की वजह से लोगों की संपत्तियों पर करोड़ों रुपये का टैक्स बकाया दिखाया जा रहा है। शुगर मिल की प्रॉपर्टी आईडी को लोगों के खाली प्लाटों से जोड़कर उन पर करोड़ों रुपये का टैक्स बन चुका है।
त्रुटियों को ठीक कराया जाएगा
यह समस्या गंभीर है। ऐसे मामले पहले भी आ चुके हैं। इसको लेकर निगम अधिकारियों के साथ बैठक की जाएगी। इन त्रुटियों को ठीक करने के लिए प्लानिंग बनाई जाएगी।
दुष्यंत भट्ट, सीनियर डिप्टी मेयर।