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Panipat News: गोबर प्रबंधन पर बनेगी नई रणनीति, वैज्ञानिक तकनीक से करेंगे निपटान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 05 Oct 2024 05:57 AM IST
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New strategy will be made on cow dung management
पानीपत। नगर निगम शहर में गोबर प्रबंधन के लिए नई रणनीति तैयार कर रहा है। नगर निगम के अधिकारियों ने इसकी प्लानिंग पर काम शुरू कर दिया है। इसके तहत शहर की डेयरियों से निकलने वाले गोबर की वजह से अब नाले, नालियां या सीवरेज सिस्टम जाम नहीं होंगे। इस गोबर से बॉयोगैस बनाए जाएंगे। जिनका इस्तेमाल ईंधन के तौर पर किया जा सकेगा। नगर निगम शहर में कई बॉयोगैस प्लांट लगाएगा। यहां गोबर को स्टोर करने के बाद इससे मीथेन गैस बनाई जाएगी।
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उल्लेखनीय है कि पहले चरण में नगर निगम आवंटित प्लांटों पर डेयरियों को शिफ्ट करने की योजना बनाएगा। इसके बाद बची हुई डेयरियों से गोबर लेने का प्रावधान किया जाएगा। अधिकारियों ने गोबर प्रबंधन नीति का नाम कैटल डंग मैनेजमेंट पॉलिसी रखा है। इस नीति के अनुसार आगामी कार्रवाई को अमली जामा पहनाया जाएगा। गौरतलब है कि नगर निगम की ये योजना करीब दो साल से लंबित है। जिसे अब नए सिरे से चालू कराया जाएगा। इसके लिए निगम सबसे पहले शहर का सर्वे करवाएगा। जिसमें डेयरियों और इनमें रखे जाने वाले पशुओं का आंकड़ा तैयार करेगा। इसके बाद इन डेयरियों का निगम में पंजीकरण करवाएगा। डेयरी संचालकों की सुविधा के लिए हेल्पलाइन नंबर और ई-मेल तक उपलबध कराई जाएगी। सभी तैयारी करने के बाद निगम के पास इकट्ठा हुए सटीक आंकड़े पर शहर में अलग अलग जगहों पर बायोगैस प्लांट तैयार किए जाएंगे। यहां गोबार से मीथेन गैस बनेगी और गुटके तैयार किए जाएंगे। निगम अधिकारियों का तर्क है कि डेयरियों से निकलने वाले गोबर की वजह से नालियां व सीवर जाम हो जातेे हैं। दूसरी ओर सीवर लाइन में गोबर जाने की वजह से इसमें मीथेन गैस बनने लगती है, जोकि सफाई कर्मचारियों के लिए जानलेवा साबित होती है।
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डेयरी संचालकों को तय सीमा में करवाना होगा पंजीकरण
निगम अधिकारियों का कहना है कि योजना के अनुसार निगम डेयरी संचालकों को सपोर्ट करेगा। इसके बावजूद लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। नीति के अनुसार डेयरी संचालकों को एक तय सीमा में अपनी डेयरी का पंजीकरण करवाना होगा। जब गोबर उठान का काम शुरू होगा, इसके बाद कोई भी डेयरी संचालक नालियों या सीवर या खुले में गोबर नहीं डालेगा। इसके अलावा डेयरी संचालकों को अपनी संपत्ति परिसर में डेयरी चलाने के लिए अपने बकाया टैक्स का भुगतान करना भी अनिवार्य होगा। ऐसा न करने वालों को निगम पहले नोटिस देगा फिर कार्रवाई करेगा।
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वर्जन-

अबकी बार नए सिरे से नई तकनीक के साथ गोबर प्रबंधन नीति को लागू करने की योजना है। इससे गोबर से होने वाली परेशानियों से भी लोगों को राहत मिलेगी। दूसरी ओर गोबर का वैज्ञानिक तरीके से निपटान कर इससे गैस और गुटके बनाएं जाएंगे। इसकी प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की जा रही है। जिसे जल्द ही पूरा कर लागू किया जाएगा।
राहुल पूनिया, एक्सईएन, नगर निगम।
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