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प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए नीदरलैंड की संस्था देगी टिप्स, लगाएगी लैब
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पानीपत। मीटिंग के दौरान मौजूद उद्यागपति अधिकारी व अन्य।
- फोटो : Panipat
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पानीपत। पानीपत के बढ़ते प्रदूषण स्तर को लेकर एनजीटी, सीपीसीबी व एचएसपीसीबी चिंतित है। उद्यमी भी पुरानी तकनीक से प्रदूषण को नियंत्रित नहीं कर पा रहे हैं। तकनीकी ज्ञान न होने से उद्यमियों को उत्पादों के उत्पादन पर भारी खर्च करना पड़ रहा है। शहर के प्रदूषण स्तर को कंट्रोल के करने के लिए नीदरलैंड की सॉलिडारीदाद एशिया एनजीओ की टीम मंगलवार को पानीपत पहुंची। एनजीओ के एमडी व तकनीकी सलाहकारों ने उद्यमियों को प्रदूषण को कंट्रोल करने व एनजीओ के प्रपोजल के बारे में गहनता से जानकारी दी। एनजीओ की ओर से तीन घंटे की प्रेजेंटेशन भी प्रस्तुत की गई।
उद्यमियों का कहना है कि अगर एनजीओ के साथ डील फाइनल होती है तो उन्हें लाभ होने की उम्मीद है। इससे प्रदूषण पर भी अंकुश लगाया जा सकेगा। एनजीओ के एडवाइजर संजय हरारे ने उद्यमियों को बताया कि चीन पानीपत के लिए बड़ी चुनौती है। चीन कम लागत में बेहतरीन प्रोडक्ट प्रस्तुत कर रहा है। हमारे पास तकनीक की कमी है। हमें अपने उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाने की जरूरत है। हमें केमिकल व पानी के कम इस्तेमाल करने की जरूरत है।
उद्योग हर रोज अरबों लीटर पानी का दोहन कर रहे हैं, क्योंकि हमें पानी के सही इस्तेमाल का उचित ज्ञान नहीं है। हमें पानीपत में केमिकल मैनेजमेंट सिस्टम को डेवलेप करने की जरूरत है। अगर हमारी पानीपत के साथ डील फाइनल होती है कि संस्था हर उद्योग में इन्वायरमेंटल सेल की स्थापना करेगी, जो पर्यावरण की स्वच्छता पर नजर रखेगी। हम उद्यमियों को नई टेक्नॉलॉजी देंगे, उच्च तकनीक की मशीनें देंगे। उद्योगों में पानी का इस्तेमाल कैसे व कितना करें, केमिकल का प्रयोग कैसे करें। प्रदूषण को कैसे कंट्रोल करें ये तकनीक सॉलिडारीदाद एशिया एनजीओ देगी। प्रेजेंटेशन में भीम राणा,ताथीर जायदी, राजेश वाकडे, शिव प्रताप, जगदीश जैन व रिजनल ऑफिसर कमलजीत सिंह मौजद रहे।
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प्रदूषण को कंट्रोल करना बड़ी चुनौती
प्रदूषण को कंट्रोल करना बड़ी चुनौती है। दिन प्रतिदिन आबो हवा खराब हो रही है। हमें उच्च तकनीक का प्रयोग कर प्रदूषण को कंट्रोल करना होगा। हमारे सामने तमाम प्रकार की चुनौतियां हैं। हमें भू जल बचाने के लिए भी काम करना है। उद्यमियों से अपील है कि वो प्रतिबंधित फ्यूल का प्रयोग न करें।
कमलजीत सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, एचएसपीसीबी
अगर एनजीओ से डील होती है तो फायदा होगा
प्रदूषण को कंट्रोल करने की बड़ी चुनौती है, लेकिन प्रदूषण के लिए अकेले उद्योगों को जिम्मेदार ठहराना गलत होगा। अगर हमारी संस्था के साथ डील होती है तो बेहतर होगा। हमें नई तकनीक व मशीनें मिलेगी। केमिकल व पानी के उचित प्रयोग की जानकारी मिलेगी।
भीम राणा, प्रधान डायर्स एसोसिएशन
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उद्यमियों का कहना है कि अगर एनजीओ के साथ डील फाइनल होती है तो उन्हें लाभ होने की उम्मीद है। इससे प्रदूषण पर भी अंकुश लगाया जा सकेगा। एनजीओ के एडवाइजर संजय हरारे ने उद्यमियों को बताया कि चीन पानीपत के लिए बड़ी चुनौती है। चीन कम लागत में बेहतरीन प्रोडक्ट प्रस्तुत कर रहा है। हमारे पास तकनीक की कमी है। हमें अपने उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाने की जरूरत है। हमें केमिकल व पानी के कम इस्तेमाल करने की जरूरत है।
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उद्योग हर रोज अरबों लीटर पानी का दोहन कर रहे हैं, क्योंकि हमें पानी के सही इस्तेमाल का उचित ज्ञान नहीं है। हमें पानीपत में केमिकल मैनेजमेंट सिस्टम को डेवलेप करने की जरूरत है। अगर हमारी पानीपत के साथ डील फाइनल होती है कि संस्था हर उद्योग में इन्वायरमेंटल सेल की स्थापना करेगी, जो पर्यावरण की स्वच्छता पर नजर रखेगी। हम उद्यमियों को नई टेक्नॉलॉजी देंगे, उच्च तकनीक की मशीनें देंगे। उद्योगों में पानी का इस्तेमाल कैसे व कितना करें, केमिकल का प्रयोग कैसे करें। प्रदूषण को कैसे कंट्रोल करें ये तकनीक सॉलिडारीदाद एशिया एनजीओ देगी। प्रेजेंटेशन में भीम राणा,ताथीर जायदी, राजेश वाकडे, शिव प्रताप, जगदीश जैन व रिजनल ऑफिसर कमलजीत सिंह मौजद रहे।
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प्रदूषण को कंट्रोल करना बड़ी चुनौती
प्रदूषण को कंट्रोल करना बड़ी चुनौती है। दिन प्रतिदिन आबो हवा खराब हो रही है। हमें उच्च तकनीक का प्रयोग कर प्रदूषण को कंट्रोल करना होगा। हमारे सामने तमाम प्रकार की चुनौतियां हैं। हमें भू जल बचाने के लिए भी काम करना है। उद्यमियों से अपील है कि वो प्रतिबंधित फ्यूल का प्रयोग न करें।
कमलजीत सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, एचएसपीसीबी
अगर एनजीओ से डील होती है तो फायदा होगा
प्रदूषण को कंट्रोल करने की बड़ी चुनौती है, लेकिन प्रदूषण के लिए अकेले उद्योगों को जिम्मेदार ठहराना गलत होगा। अगर हमारी संस्था के साथ डील होती है तो बेहतर होगा। हमें नई तकनीक व मशीनें मिलेगी। केमिकल व पानी के उचित प्रयोग की जानकारी मिलेगी।
भीम राणा, प्रधान डायर्स एसोसिएशन