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नैफ्था क्रेकर के एक धमाके से आसपास के ग्रामीणों दहशत
ब्यूरो/अमर उजाला,पानीपत
Updated Tue, 26 Jul 2016 12:08 AM IST
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नैफ्था क्रेकर
- फोटो : ब्यूरो
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पानीपत/थर्मल। नैफ्था क्रेकर के स्विंग यूनिट में हाईड्रो कार्बन लीकेज के चलते धमाके के बाद आसपास के गांवों में दहशत का माहौल बना हुआ है। दूर-दूर स्थित गांवों के लोगों को भी अपने जान व माल की चिंता सताने लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह के धमाकों से नुकसान दूर तक जाता है। वहीं एक धमाके में प्लांट को भी लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। हालांकि अधिकारी नुकसान के बारे में खुलकर नहीं बोल पा रहे हैं।
पानीपत रिफाइनरी के साथ करीब तीन सौ एकड़ में नैफ्था क्रेकर प्लांट कई सालों से चल रहा है। इसमें प्लास्टिक का दाना बनता है और देश के कई हिस्सों में दाना सप्लाई होता है। सोमवार को हुए धमाके से आस-पास के गांवों के लोग दहशत में आ गए हैं। प्लांट के आसपास बाल जाटान, सिंहपुरा, सिठाना, बोहली, न्यू बोहली गांव स्थित हैं। यहीं नहीं प्लांट से कुछ ही दूरी पर रिफाइनरी का तेल के टैंक है। प्लांट से किसी तरह का बड़ा धमाका रिफाइनरी के टैंकों तक आकर आसपास के गांवों तक को आंच पहुंचा सकता था। इसी के चलते रिफाइनरी व प्लांट के आला अधिकारियों ने मौका मुआयना किया।
एक धमाके से लाखों का नुकसान
स्विंग यूनिट में धमाके से एक हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। वहीं पाइप लाइन में चल रही सामग्री भी खराब हो गई। इससे करीब 80 लाख रुपये या इससे अधिक का नुकसान होने का अनुमान है। हालांकि अधिकारी नुकसान को लेकर खुलकर नहीं बोल रहे, लेकिन प्लांट के जानकार इस बात की पूरी पुष्टि कर रहे हैं।
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मॉक ड्रिल से जांची जाती है कार्यक्षमता
रिफाइलरी व नैफ्था क्रेकर प्लांट द्वारा समय-समय पर मॉक ड्रिली की जाती है। जिसमें विभिन्न यूनिटों की कार्यक्षमता व तीव्रता दोनों को जांचा जाता है। अधिकारी हर बार मॉक ड्रिल को सफल बताते हैं। हालांकि सोमवार को भी धमाके के तुरंत बाद दमकल कर्मी पहुंच गए थे, लेकिन आधे घंटे से पौने घंटे में आग पर काबू पाना बड़ा सवाल है। ऐसे में आग फैल कर दूसरी यूनिटों में चली जाती तो परिणाम गंभीर हो सकते थे।
ठेका कर्मियों की देखभाल करने वाला नहीं मिला
नैफ्था क्रेकर प्लांट में अधिकतर काम ठेकेदार के अंतर्गत होता है। सोमवार को धमाके के बाद कई ठेका कर्मी झुलस गए और कई भगदड़ में घायल हो गए। प्लांट में मची भगदड़ में हुए घायलों की देखभाल करने वाला कोई नहीं मिला। प्लांट के सुरक्षाकर्मियों ने सभी को बाहर निकाल दिया गया। ऐसे में कर्मी कुछ देर बाहर की बैठे रह गए। ठेका कर्मियों में इसको लेकर रोष व्याप्त रहा।
वर्जन :::::::::::
नैफ्था क्रेकर प्लांट में हाईड्रो कार्बन गैस का रिसाव हुआ है। इसमें इतना ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। वे मामले की जांच कर रहे हैं। किसी तरह की लापरवाही मिलने पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
एसके बोस, जीएम, नैफ्था क्रेकर, पानीपत।
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पानीपत रिफाइनरी के साथ करीब तीन सौ एकड़ में नैफ्था क्रेकर प्लांट कई सालों से चल रहा है। इसमें प्लास्टिक का दाना बनता है और देश के कई हिस्सों में दाना सप्लाई होता है। सोमवार को हुए धमाके से आस-पास के गांवों के लोग दहशत में आ गए हैं। प्लांट के आसपास बाल जाटान, सिंहपुरा, सिठाना, बोहली, न्यू बोहली गांव स्थित हैं। यहीं नहीं प्लांट से कुछ ही दूरी पर रिफाइनरी का तेल के टैंक है। प्लांट से किसी तरह का बड़ा धमाका रिफाइनरी के टैंकों तक आकर आसपास के गांवों तक को आंच पहुंचा सकता था। इसी के चलते रिफाइनरी व प्लांट के आला अधिकारियों ने मौका मुआयना किया।
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एक धमाके से लाखों का नुकसान
स्विंग यूनिट में धमाके से एक हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। वहीं पाइप लाइन में चल रही सामग्री भी खराब हो गई। इससे करीब 80 लाख रुपये या इससे अधिक का नुकसान होने का अनुमान है। हालांकि अधिकारी नुकसान को लेकर खुलकर नहीं बोल रहे, लेकिन प्लांट के जानकार इस बात की पूरी पुष्टि कर रहे हैं।
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मॉक ड्रिल से जांची जाती है कार्यक्षमता
रिफाइलरी व नैफ्था क्रेकर प्लांट द्वारा समय-समय पर मॉक ड्रिली की जाती है। जिसमें विभिन्न यूनिटों की कार्यक्षमता व तीव्रता दोनों को जांचा जाता है। अधिकारी हर बार मॉक ड्रिल को सफल बताते हैं। हालांकि सोमवार को भी धमाके के तुरंत बाद दमकल कर्मी पहुंच गए थे, लेकिन आधे घंटे से पौने घंटे में आग पर काबू पाना बड़ा सवाल है। ऐसे में आग फैल कर दूसरी यूनिटों में चली जाती तो परिणाम गंभीर हो सकते थे।
ठेका कर्मियों की देखभाल करने वाला नहीं मिला
नैफ्था क्रेकर प्लांट में अधिकतर काम ठेकेदार के अंतर्गत होता है। सोमवार को धमाके के बाद कई ठेका कर्मी झुलस गए और कई भगदड़ में घायल हो गए। प्लांट में मची भगदड़ में हुए घायलों की देखभाल करने वाला कोई नहीं मिला। प्लांट के सुरक्षाकर्मियों ने सभी को बाहर निकाल दिया गया। ऐसे में कर्मी कुछ देर बाहर की बैठे रह गए। ठेका कर्मियों में इसको लेकर रोष व्याप्त रहा।
वर्जन :::::::::::
नैफ्था क्रेकर प्लांट में हाईड्रो कार्बन गैस का रिसाव हुआ है। इसमें इतना ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। वे मामले की जांच कर रहे हैं। किसी तरह की लापरवाही मिलने पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
एसके बोस, जीएम, नैफ्था क्रेकर, पानीपत।