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कोहनी पर लगी चोट के कारण डेढ़ साल तक जैवलिन से दूर रहे नीरज, ओलंपिक स्वर्ण के प्रबल दावेदार
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वर्ष 2019 में कोहनी में चोट लगने के कारण जैवलिन थ्रोअर एथलीट नीरज चोपड़ा मैदान से डेढ़ साल तक दूर रहे, लेकिन इतने कम वक्त में उन्होंने अपनी चोट पर पार पा ली। मेहनत के बलबूते वह टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक के प्रबल दावेदार रहैं। पानीपत के गांव खंडरा के रहने वाले नीरज चोपड़ा भारत और यूरोप में कुछ दिन अभ्यास करने में बाद अब टोक्यो पहुंच चुके हैं। पूरे देश को ओलंपिक में उनसे स्वर्ण पदक की आस है। नीरज ने लगभग 20 दिन यूरोप में रहकर ही तैयारी करने के बाद अब ओलंपिक में दम दिखाएंगे। महज 22 साल के एथलीट नीरज चोपड़ा चोट लगने के दौरान आईएएएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप, डायमंड लीग और एशियन चैंपियनशिप में भाग लेने से वंचित रह गए थे। चोट से पहले उनकी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता 2018 जकार्ता एशियाई खेल थी। वहां उन्होंने 88.06 मीटर के राष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता था। चोट के लगभग डेढ़ साल बाद उन्होंने अपने चौथे प्रयास में 85 मीटर तक भाला फेंककर ओलंपिक क्वालिफाई मार्क हासिल किया और इस अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में टॉप पर रहे। उन्होंने शुरुआत 81.76 मीटर से की, दूसरे प्रयास में 82 मीटर और तीसरे प्रयास में 82.57 मीटर दूर जैवलिन फेंका और स्वर्ण के दावेदार बन गए।
शिवाजी स्टेडियम में नीरज ने पहली बार जैवलिन छुआ था
पानीपत के शिवाजी स्टेडियम में नीरज ने पहली बार जैवलिन को छुआ था। नीरज चोपड़ा ने बताया कि उन्होंने उस समय यह नहीं सोचा था कि वह कभी ओलंपिक भी खेलेंगे। जिला स्तरीय प्रतियोगिताएं जीतने के बाद राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में गोल्ड लाने के साथ ही ओलंपिक का सपना देखा। जिसके लिए वह पिछले पांच साल से तैयारी कर रहे हैं। नीरज का कहना है कि उनकी प्रेरणा माता-पिता और परिवार है।
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शिवाजी स्टेडियम में नीरज ने पहली बार जैवलिन छुआ था
पानीपत के शिवाजी स्टेडियम में नीरज ने पहली बार जैवलिन को छुआ था। नीरज चोपड़ा ने बताया कि उन्होंने उस समय यह नहीं सोचा था कि वह कभी ओलंपिक भी खेलेंगे। जिला स्तरीय प्रतियोगिताएं जीतने के बाद राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में गोल्ड लाने के साथ ही ओलंपिक का सपना देखा। जिसके लिए वह पिछले पांच साल से तैयारी कर रहे हैं। नीरज का कहना है कि उनकी प्रेरणा माता-पिता और परिवार है।
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