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Panipat News: उद्योगों के लिए अति आधुनिक दमकल केंद्र, एग्जीबिशन सेंटर की दरकार
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पानीपत। टेक्सटाइल नगरी को अति आधुनिक दमकल केंद्र के साथ एग्जीबिशन सेंटर बड़े मुद्दे हैं। इसके अलावा उद्योगों के लिए सेक्टर और फ्री जोन की भी उद्यमियों की बड़ी मांग है। अति आधुनिक दमकल केंद्र को लेकर उद्यमी पिछले दस साल से मांग उठा रहे हैं। यह अब तक सिरे नहीं चढ़ पाया है। इन सबके चलते उद्यमियों को हर साल अरबों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है। एग्जीबिशन सेंटर न होने से अपने उत्पाद दिल्ली में जाकर दिखाने पड़ते हैं। ऐसे में उद्यमियों का एक बड़ी धनराशि इस पर खर्च करनी होती है। गौरतलब है कि पानीपत का करीब 16 हजार करोड़ का निर्यात और 80 हजार करोड़ का घरेलू बाजार है। यहां के उद्यमी हर साल करोड़ों रुपये का राजस्व सरकार को देते हैं।
-- -- कोट्स फोटो-- --
अति आधुनिक दमकल केंद्र की जरूरत
इंडस्ट्रियल एस्टेट एसोसिएशन सेक्टर-29 के प्रधान श्रीभगवान अग्रवाल ने बताया कि पानीपत बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है। यहां अति आधुनिक दमकल केंद्र की मांग 2015 में उठाई थी। इन 10 सालों में उद्योगों को दमकल केंद्र नहीं मिल पाया है। इसके न होने पर आग की घटनाओं में उद्यमियों को हर साल अरबों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है। इसमें अति आधुनिक सुविधाओं के साथ अनुभवी दमकलकर्मी भी तैनात किए जाने चाहिए।
-- -- कोट्स फोटो-- --
एक विभाग के अंतर्गत हों उद्योग
इंडस्ट्रियल एस्टेट एसोसिएशन सेक्टर-29 के उप प्रधान अतुल मित्तल ने बताया कि औद्योगिक सेक्टर तीन विभागों के अंतर्गत आते हैं इनमें एचएसआईआईडीसी, एचएसवीपी व नगर निगम से जुड़ते हैं। उनको एक काम कराने के लिए तीनों विभागों के पास पहुंचना पड़ता है। ऐसे में किसी भी काम को कराने में बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। यह सब विभाग के अंतर्गत होने चाहिए। इससे काम कराना आसान हो जाता है और एक ही विभाग में जाकर अपना काम करा सकते हैं।
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-- -- कोट्स फोटो-- --
प्रदर्शनी केंद्र होने से मिलेगी नई दिशा
हैंडलूम एक्सपोर्ट मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन के प्रधान रमेश वर्मा ने बताया कि पानीपत जैसे बड़े औद्योगिक शहर में प्रदर्शनी केंद्र नहीं बन पाया है। उद्यमी कई सालों से इसकी मांग उठा रहे हैं। हर सरकार में आश्वासन मिला लेकिन आज तक सिरे नहीं चढ़ पाया है। इन सबके चलते उद्यमियों को अपने उत्पादों की प्रदर्शनी लगाने में मुश्किल आती हैं। उनको दिल्ली या अन्य शहरों में प्रदर्शनी लगानी पड़ती है। जिसके चलते उद्यमियों पर ही बोझ पड़ता है। सरकार को इसका समाधान करना चाहिए।
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सिंगल विंडो सिस्टम होना चाहिए
हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स पानीपत चैप्टर के प्रधान विनोद धमीजा ने बताया कि पानीपत में उद्योगों के लिए अलग से सेक्टर की जरूरत है। डाई हाउस के लिए 2001 में सेक्टर कटने के बाद कोई नया सेक्टर नहीं मिला है। ऐसे में उद्यमियों को शहर से बाहर फैक्ट्री लगानी पड़ रही हैं। यहां पर फ्री जोन में नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में नया उद्योग लगा पाना मुश्किल हो गया है। पहले कुराड़ गांव के आसपास इंडस्ट्री लगाने को जगह थी लेकिन पिछले दिनों उसका भी जोन बदल दिया गया। ऐसे में कई फाइल रिजेक्ट कर दी गई थी। इसके अलावा नए उद्योग लगाने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम होना चाहिए।
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100 किलोवाट तक का ट्रांसफार्मर लगवाए सरकार
उद्यमी अश्वनी शर्मा ने बताया कि प्रदेश में 50 किलोवाट और इससे अधिक का कनेक्शन लेने पर उद्यमी को अपने खर्च पर ट्रांसफार्मर लगवाना पड़ता है। यह काफी महंगा होता है। जबकि दिल्ली समेत अन्य प्रदेशों में 100 किलोवाट तक का कनेक्शन लेने पर ट्रांसफार्मर निगम ही लगाता है। पानीपत व प्रदेश में उद्यमियों को इसकी छूट मिलनी चाहिए। पानीपत का उद्यमी सरकार को हर साल करोड़ों रुपये का राजस्व देता है लेकिन यहां सुविधाओं की दरकार है। इन सबका समाधान करना चाहिए।
कोट्स फोटो-- --
कॉमन बॉयलर की लंबे समय से हो रही मांग
गुलशन मल्होत्रा ने बताया कि कॉमन बॉयलर और जेडएलडी प्रोजेक्ट की लंबे समय से मांग है। इससे उद्यमियों को सुविधा मिलेगी और उनको बॉयलर अलग से नहीं लगाने पड़ेंगे। उद्यमी लंबे समय से इनकी मांग कर रहे हैं लेकिन यह केवल प्रस्ताव बनाने तक ही सिमटकर रह गया है। अब उद्यमियों को अपने स्तर पर बॉयलर लगवाने पड़ते हैं। ऐसे में किसी भी उत्पाद पर लागत बढ़ती है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय मार्केट में उद्यमी चाहकर भी रेट कम नहीं कर सकता। ऐसे में उनको नुकसान उठाना पड़ता है।
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अति आधुनिक दमकल केंद्र की जरूरत
इंडस्ट्रियल एस्टेट एसोसिएशन सेक्टर-29 के प्रधान श्रीभगवान अग्रवाल ने बताया कि पानीपत बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है। यहां अति आधुनिक दमकल केंद्र की मांग 2015 में उठाई थी। इन 10 सालों में उद्योगों को दमकल केंद्र नहीं मिल पाया है। इसके न होने पर आग की घटनाओं में उद्यमियों को हर साल अरबों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है। इसमें अति आधुनिक सुविधाओं के साथ अनुभवी दमकलकर्मी भी तैनात किए जाने चाहिए।
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एक विभाग के अंतर्गत हों उद्योग
इंडस्ट्रियल एस्टेट एसोसिएशन सेक्टर-29 के उप प्रधान अतुल मित्तल ने बताया कि औद्योगिक सेक्टर तीन विभागों के अंतर्गत आते हैं इनमें एचएसआईआईडीसी, एचएसवीपी व नगर निगम से जुड़ते हैं। उनको एक काम कराने के लिए तीनों विभागों के पास पहुंचना पड़ता है। ऐसे में किसी भी काम को कराने में बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। यह सब विभाग के अंतर्गत होने चाहिए। इससे काम कराना आसान हो जाता है और एक ही विभाग में जाकर अपना काम करा सकते हैं।
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प्रदर्शनी केंद्र होने से मिलेगी नई दिशा
हैंडलूम एक्सपोर्ट मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन के प्रधान रमेश वर्मा ने बताया कि पानीपत जैसे बड़े औद्योगिक शहर में प्रदर्शनी केंद्र नहीं बन पाया है। उद्यमी कई सालों से इसकी मांग उठा रहे हैं। हर सरकार में आश्वासन मिला लेकिन आज तक सिरे नहीं चढ़ पाया है। इन सबके चलते उद्यमियों को अपने उत्पादों की प्रदर्शनी लगाने में मुश्किल आती हैं। उनको दिल्ली या अन्य शहरों में प्रदर्शनी लगानी पड़ती है। जिसके चलते उद्यमियों पर ही बोझ पड़ता है। सरकार को इसका समाधान करना चाहिए।
सिंगल विंडो सिस्टम होना चाहिए
हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स पानीपत चैप्टर के प्रधान विनोद धमीजा ने बताया कि पानीपत में उद्योगों के लिए अलग से सेक्टर की जरूरत है। डाई हाउस के लिए 2001 में सेक्टर कटने के बाद कोई नया सेक्टर नहीं मिला है। ऐसे में उद्यमियों को शहर से बाहर फैक्ट्री लगानी पड़ रही हैं। यहां पर फ्री जोन में नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में नया उद्योग लगा पाना मुश्किल हो गया है। पहले कुराड़ गांव के आसपास इंडस्ट्री लगाने को जगह थी लेकिन पिछले दिनों उसका भी जोन बदल दिया गया। ऐसे में कई फाइल रिजेक्ट कर दी गई थी। इसके अलावा नए उद्योग लगाने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम होना चाहिए।
100 किलोवाट तक का ट्रांसफार्मर लगवाए सरकार
उद्यमी अश्वनी शर्मा ने बताया कि प्रदेश में 50 किलोवाट और इससे अधिक का कनेक्शन लेने पर उद्यमी को अपने खर्च पर ट्रांसफार्मर लगवाना पड़ता है। यह काफी महंगा होता है। जबकि दिल्ली समेत अन्य प्रदेशों में 100 किलोवाट तक का कनेक्शन लेने पर ट्रांसफार्मर निगम ही लगाता है। पानीपत व प्रदेश में उद्यमियों को इसकी छूट मिलनी चाहिए। पानीपत का उद्यमी सरकार को हर साल करोड़ों रुपये का राजस्व देता है लेकिन यहां सुविधाओं की दरकार है। इन सबका समाधान करना चाहिए।
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कॉमन बॉयलर की लंबे समय से हो रही मांग
गुलशन मल्होत्रा ने बताया कि कॉमन बॉयलर और जेडएलडी प्रोजेक्ट की लंबे समय से मांग है। इससे उद्यमियों को सुविधा मिलेगी और उनको बॉयलर अलग से नहीं लगाने पड़ेंगे। उद्यमी लंबे समय से इनकी मांग कर रहे हैं लेकिन यह केवल प्रस्ताव बनाने तक ही सिमटकर रह गया है। अब उद्यमियों को अपने स्तर पर बॉयलर लगवाने पड़ते हैं। ऐसे में किसी भी उत्पाद पर लागत बढ़ती है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय मार्केट में उद्यमी चाहकर भी रेट कम नहीं कर सकता। ऐसे में उनको नुकसान उठाना पड़ता है।