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Panipat News: तीरंदाजी में छा रहे म्हारे बेटा-बेटी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 30 Jun 2024 06:24 AM IST
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My sons and daughters are excelling in archery
पानीपत। तीरंदाजी का इस्तेमाल शिकार और युद्ध के लिए किया जाता रहा है। आधुनिक समय में यह मुख्य रूप से एक प्रतिस्पर्धी खेल और मनोरंजक गतिविधि बन गई। युवा इसमें अपनी प्रतिभा निखारने के लिए आगे आ रहे हैं। ऐतिहासिक नगरी पानीपत के बेटे और बेटियां तीरंंदाजी में अपनी प्रतिभा दिखाकर राज्य व राष्ट्र स्तर पर लोहा मनवा रहे हैं। कई तीरंदाज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं।
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युवा शिमला मौलाना रोड स्थित जीडीआर कॉलेज स्थित एनवी तीरंदाजी अकादमी में लगातार अभ्यास कर रहे हैं। यह अकादमी पिछले छह साल से चल रही है। सेक्टर-6 निवासी कोच नागेश्वर वशिष्ठ की देखरेख में तीरंदाज राष्ट्रीय स्तर 52 पदक जीत चुके हैं और 120 बच्चे प्रदेश स्तर पर भाग ले चुके हैं। इनमें से 102 बच्चों ने पदक जीते हैं। 13 बच्चे सेना और पुलिस में भर्ती हो चुके हैं। इसके अलावा साई में चयन हो चुका है। यहां तीन से 35 वर्ष तक के खिलाड़ी अभ्यास कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी को सुबह छह से 11 और राज्य स्तर के लिए शाम को तीन से साढ़े सात बजे तक अभ्यास कराया जाता है।
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खिलाड़ी बोले :
ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने का लक्ष्य
कोट्स फोटो 13

मैं सामान्य खेलों से हटकर खेलना चाहता था। इसके लिए एनवी तीरंदाजी में तीन साल पहले अभ्यास शुरू किया। मैं अब 12वीं कक्षा में पढ़ता हूं। मैंने गोवा में आयोजित सीनियर नेशनल में स्वर्ण पदक जीता है। सीबीएसई की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। मैं अभ्यास में ज्यादा से ज्यादा ध्यान देता हूं। मेरा ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने का लक्ष्य है।
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सितांशु, मॉडल टाउन।



कोट्स फोटो 5
तीरंदाजी में आगे आने का लिया फैसला
गांवों में सब कबड्डी और कुश्ती समेत अन्य खेलों में आगे आते थे। मैंने तीरंदाजी में आगे आने का फैसला लिया। में 12वीं कक्षा में पढ़ता हूं। स्कूली प्रतियोगिता में प्रदेश स्तर पर रजत पदक जीता है। एसजीएफआई में राष्ट्रीय स्तर पर भाग लिया है। मेरा सपना राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतना है। मैं इसके लिए लगातार अभ्यास कर रहा हूं।
हर्षित, राजा खेड़ी।




कोट्स फोटो 6
तीरंदाजी में देखा भविष्य
मैं 22 वर्ष की हूं। मैंने पांच साल पहले तीरंदाजी में अभ्यास शुरू किया था। मैंने नेशनल थर्मल पावर कारपोरेशन (एनटीपीसी) की सीनियर नेशनल में स्वर्ण पदक जीता है। ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी में कांस्य पदक जीता है। मैं अब चंडीगढ़ पुलिस में सिपाही के पद पर हूं। मैंने तीरंदाजी में अपना भविष्य देखा। मैं अब भी तीरंदाजी में अभ्यास कर रही हूं।
हिमांशी, एल्डिको।

कोट्स फोटो 8
राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने का सपना

मैंने छह साल पहले तीरंदाजी का अभ्यास शुरू किया था। मैं अपने गांव से हर रोज अकादमी में अभ्यास करने आती हूं। मैं इंटर कॉलेज में रजत पदक जीत चुकी हूं और ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी में कांस्य पदक जीता है। पारिवारिक कारणों के चलते तीरंदाजी बीच में छोड़ना पड़ा। अब लगातार अभ्यास कर रही हूं। मेरा सपना राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने का सपना है।
कोमल, बड़ौली।



कोट्स फोटो 12
कोच का मिल रहा मार्गदर्शन

मैंने चार साल पहले तीरंदाजी का अभ्यास शुरू किया था। मैं लगातार अभ्यास कर रहा हूं। एसजीएफआई और स्कूली प्रतियोगिता में राष्ट्रीय स्तर पर रजत पदक जीता है। मेरा सपना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतना है। मैं इसको लेकर लगातार अभ्यास कर रहा हूं। परिवार के सदस्य पूरा साथ दे रहे हैं और कोच का भी मार्गदर्शन मिल रहा है।

प्रत्युष, खिलाड़ी।


कोट्स फोटो 7
सीनियर गेम्स में जीता स्वर्णपदक

मैंने सामान्य खेलों की बजाय तीरंदाजी को अपनाया। मैं अब आर्य पीजी कॉलेज में पढ़ता हूं। गोवा में आयोजित नेशनल तीरंदाजी चैंपियनशिप में हरियाणा के प्रतिनिधि रहे। यहां सीनियर गेम्स में स्वर्ण पदक जीता है। सीबीएसई स्कूल की प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में रजत पदक जीता है। मेरा सपना तीरंदाजी में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम चमकाना है।
कार्तिक, काबड़ी।


बेटा तीरंदाजी में निखार रहा है प्रतिभा

कोट्स फोटो 14
मेरा बेटा सितांशु तीरंदाजी सीखना चाहता था। मैंने इसका नाम पहले कभी मुख्य खेलों में नहीं सुना था। इस बारे में सोशल मीडिया पर जाना और फिर कोच से बात की। इसके बाद बेटे को तीरंदाजी अकादमी में भेजा। मैं शुरुआत में कई बार बेटे के साथ अकादमी में गया। यहां उनको और बाकी तीरंदाजों को अभ्यास करते देखा। आज बेटा तीरंदाजी में अपनी प्रतिभा चमका रहा है।

सुशील कुमार, अभिभावक।




कोट्स फोटो 11
बेटी को तीरंदाजी के लिए लेकर आगे आई

मेरी बेटी कोमल खेलना चाहती थी। गांवों में सामान्य खेलों पर अधिक ध्यान रहता है। हमने कोमल के लिए तीरंदाजी की सलाह दी। वह इसके लिए तैयार हो गई। कोमल ने ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी तक पदक जीते। उसको एक कारण के चलते बीच में अभ्यास छोड़ना पड़ा। मैं उसको फिर से तीरंदाजी के लिए आगे लेकर आई।

पूनम, अभिभावक,




कोट्स फोटो 15
बेटा लगातार हो रहा सफल

मेरे बेटे कार्तिक ने तीरंदाजी खेल में आगे आने की बात की। मैंने परिवार के सदस्यों से चर्चा की। बेटे को तीरंदाजी में लेकर आई। इस खेल में दूसरे खेलों की तरह मेहनत है। इसमें शरीर की बजाय ध्यान लगाना पड़ता है। सटीक निशाना लगाने के लिए पूरे शरीर को नियंत्रण में करना पड़ता है। बेटा आज लगातार सफलता पा रहा है।

कुसुम यादव, अभिभावक।




कोट्स फोटो 4
बेटा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम करेगा रोशन

मैं अपने बेटे हर्षित को खेलों में आगे लाना चाहता था। इसके लिए कई खेलों को देखा और मैंने हर्षित को तीरंदाजी में आगे लाने का फैसला किया। बेटे ने शुरुआत में ही अच्छा निशाना साधा। उसको अपने बेटे पर भरोसा है और वह एक दिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करेगा।

बोधराज, अभिभावक।





कोट्स फोटो 10
जिले में तैयार कर चुका हूं 200 बच्चे

मैंने तीरंदाजी में अपना भविष्य देखा और अपने स्कूल व कॉलेज के समय लगातार पदक जीते। ऑल इंंडिया यूनिवसिर्टी में रजत पदक प्राप्त हैं। मैं तीरंदाजी में जिले का पहले खिलाड़ी रहा हूं। मैं गुरुग्राम व काेलकाता तीरंदाजी सीखने जाता था। साईं से कोच की मान्यता प्राप्त की। इसके बाद मेडल आने शुरू कर दिए। पानीपत में 200 बच्चे तैयार कर चुका हूं।
नागेश्वर वशिष्ठ, कोच।
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