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Panipat News: हत्या का आरोपी साढ़े 28 साल बाद गिरफ्तार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 02 Feb 2024 04:05 AM IST
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Murder accused arrested after 28 and a half years
पानीपत। रिफाइनरी के पास झुग्गियों में वर्ष 1995 में जीजा की हत्या के बाद साढ़े 28 साल तक फरार चल रहे दो सगे भाइयों को पानीपत की सीआईए वन टीम ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी छोटा भाई हत्या के बाद दक्षिणी दिल्ली में एक सैन्य अधिकारी के घर पर नौकरी कर रहा था तो बड़ा भाई मथुरा के एक आश्रम में छिपकर रह रहा था। ये दोनों माह में एक दो बार अपने बिहार के पूर्वी चंपारण स्थित घर जाते थे। सूचना पर पुलिस ने इनके गांव में डेरा डाला हुआ था। आरोपी बड़ा भाई मंगलवार रात को परिवार से मिलने आया तो पुलिस ने उसे पकड़ लिया और उसकी निशानदेही पर उसके छोटे भाई को दक्षिणी दिल्ली स्थित सैन्य अधिकारी के घर से गिरफ्तार कर पानीपत लेकर आ गई। यहां पुलिस ने दोनों को एक दिन के रिमांड पर लिया है।
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एएसपी मयंक मिश्रा ने वीरवार को श्रमिक की साढ़े 28 साल पहले की गई हत्या के मामले का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि 1995 में बोहली गांव स्थित रिफाइनरी का निर्माण कार्य चल रहा था। यहां पर बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के गांव रतनापुर का रहने वाला शंभू यादव रिफाइनरी में मजदूरी करता था। उसके बड़े भाई का साला जगत राय व बली राय बेरोजगार थे। शंभू ने दोनों को बिहार से पानीपत रिफाइनरी में मजदूरी के लिए बुला लिया। शंभू यादव का छोटा भाई नगीना भी यहीं पर मजदूरी करता था। ये सभी रिफाइनरी के पास बनी झुग्गियों में रहते थे। 26 जुलाई 1995 को शंभू का 1500 रुपये के लेन-देन में जगत राय व बली राय के साथ विवाद हो गया। रात को जगत राय व बली राय ने शंभू यादव से मारपीट की और चाकू से गला रेतकर उसकी हत्या कर दी। इस पूरी वारदात को शंभू यादव के छोटे भाई नगीना ने देख लिया था, लेकिन वह भाई को नहीं बचा पाया। जगत राय व बली राय दोनों वारदात के बाद फरार हो गए थे। इस मामले में कंपनी के मुंशी मुख्तियार की शिकायत पर केस दर्ज किया था, लेकिन पुलिस आरोपियों को नहीं पकड़ पाई। 1995 से ही दोनों आरोपी फरार थे। अब साढ़े 28 साल पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया है।
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केस की फाइल तक फट चुकी थी पर पुलिस ने आरोपियों को ढूंढ निकाला
सीआईए-वन के प्रभारी इंस्पेक्टर दीपक कुमार ने बताया कि साढ़े 28 साल से दोनों आरोपी भाई फरार चल रहे थे। इस केस की फाइल भी फट चुकी थी। फाइल की स्याही भी फैल गई थी। शिकायतकर्ता आरोपी व मृतक के नाम व इनके घर के पते भी मिट चुके थे। उनके पास आरोपियों के फोटो तक नहीं थे। कोर्ट से मामले की फाइल निकलवाई। इस फाइल में सभी के नाम व पते मिले। दिसंबर 2023 में सीआईए वन की आठ सदस्यीय टीम एएसआई कृपाल के नेतृत्व में बिहार गई और यहां शिकायतकर्ता मुख्तियार की तलाश की, लेकिन पता नहीं लगा। फिर पुलिस मृतक शंभू यादव की पत्नी के पास उसके रतनपुर गांव में गई। यहां से भी कुछ सुराग हाथ नहीं लगा। पुलिस आरोपी जगत राय के घर गई। यहां उसके परिजन मिले, लेकिन उन्होंने भी आरोपी के बारे में जानकारी होने से इंकार कर दिया। पिछले सप्ताह टीम दोबारा आरोपी जगत राव व बली राय के पूर्व चंपारण स्थित गांव में गई। यहां से पुलिस को पता चला कि जगत राय माह में एक या दो बार घर पर आता है। इस पर पुलिस ने गांव में ही डेरा डाल लिया और जगत राय के घर पर नजर रखने लगी। मंगलवार रात को जैसे ही जगत राय घर पर आया पुलिस ने उसे पकड़ लिया।
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18 साल बाद मिले दोनों भाई फूट फूटकर रोए-

2005 के बाद से ही जगत राय व बली राय एक दूसरे से नहीं मिले। जब जगत राय को पुलिस ने पकड़ा तो उसने पुलिस के सामने ये कबूल करने से इंकार कर दिया कि वह जगत राय नहीं है। बाद में ग्रामीणों ने उसकी पहचान की। फिर पुलिस जगत राय की निशानदेही पर दक्षिणी दिल्ली में सैन्य अधिकारी के घर पहुंची और यहां से बली राय को गिरफ्तार कर लिया। इस दौरान दोनों भाई एक दूसरे को देखकर भावुक हो गए और गले लगकर रोए।
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