पानीपत। श्री 1008 आदिनाथ दिगंबर जैन जिनालय में मुनि श्री 108 विश्वानंद महाराज का 83वां जन्म जयंती महोत्सव मनाया गया। महोत्सव में का शुभारंभ प्रभु अभिषेक व शांतिधारा के साथ हुआ। इंद्र-इंद्राणियों ने भक्ति भाव के साथ भगवान की पूजा, भक्ति व नृत्य किया। महोत्सव में मंच संचालन श्री दिगंबर जैन पंचायत के सचिव मनोज जैन ने किया।जैन समाज के अध्यक्ष सुनील जैन ने बताया कि मुनि श्री 108 विश्वानंद का जन्म पानीपत में हुआ और उन्होंने जैन धर्म की सर्वोत्तम साधना की और मुनि पद को ग्रहण किया। जैन धर्म के सर्वोच्च तीर्थ तीर्थराज सम्मेद शिखर में महाराज का समाधि मरण हुआ। श्री दिगंबर जैन पंचायत के प्रबंधक पुनीत जैन ने बताया कि कोल्हापुर में विराजमान नंदिनी जैन मठ में 32 वर्षों से भी अधिक एक हथिनी माधुरी जैन मठ की शोभा बढ़ाती थी और प्रभु जिनेंद्र की सदैव आराधना करती थी और जैन धर्म के हर नियम का पालना भी करती थी परंतु आज जीव दया के नाम से एक संस्था के द्वारा माधुरी को गुजरात के वंतारा में भेज दिया गया।
आज पूरा विश्व का जैन समाज इस बात का विरोध कर रहा है। देश में लगभग 16 हजार गोशालाओं का संचालन जैन समाज के द्वारा किया जाता हैं तो न्यायालय ने यह कैसे मान लिया कि मठ में रह रही हाथनि माधुरी के साथ कोई अत्याचार हो रहा है। श्री दिगंबर जैन पंचायत ने शांति विधान के माध्यम से माधुरी को वापस लाने की प्रार्थना की और बताया कि आज विशेष रूप शांति विधान में बने मांडले पर माधुरी के प्रतीक स्वरूप एरावत को स्थापित किया गया ।इस अवसर पर उपाध्यक्ष सुरेश कुमार जैन, सचिव मनोज जैन, कोषाध्यक्ष सुशील जैन, जैन स्कूल समिति के अध्यक्ष राजेश जैन व उपप्रबंधक दिनेश जैन उपस्थित रहे।