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Panipat News: हवा की जहां वेंटिलेशन नहीं, वहां मिल रहे सर्वाधिक टीबी रोगी
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पानीपत। केंद्र सरकार ने 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य के अनुरूप टीबी से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न कार्यक्रम भी चल रहे हैं। सबसे अधिक टीबी का खतरा टेक्सटाइल नगरी में ही मिला है। पानीपत में चार लाख से अधिक फैक्ट्री श्रमिक है। जो लेबर क्वार्टर में रहते हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अध्ययन में सबसे अधिक टीबी रोगी फैक्ट्रियों के श्रमिक हैं, जो लेबर क्वार्टर में रहते हैं। लेबर क्वार्टर में हवा का वेंटिलेशन नहीं होता। खराब वेंटिलेशन वाले स्थानों पर हवा में 100 गुना ज्यादा सूक्ष्म कण पैदा हो सकते हैं। जिससे फेफड़ों में संक्रमण बढ़ जाता है। अगर यहां पर कोई टीबी रोगी है तो हवा की वेंटिलेशन न होने के कारण उसके परिवार के दूसरे सदस्य के भी टीबी के रोगी होने का खतरा बढ़ जाता है।
इस साल टीबी के रोगी पिछले साल की अपेक्षा 40 प्रतिशत अधिक तेजी से बढ़ रहे हैं। 2023 में टीबी के 4475 रोगी मिले थे। इस साल एक जनवरी से 26 सितंबर तक टीबी के 4800 रोगी मिल चुके हैं। इस साल प्रति माह औसतन टीबी के 533 रोगी मिल रहे हैं। पिछले साल प्रति माह टीबी के रोगियों की मिलने की औसत 372 थी, यानि इस वर्ष टीबी के रोगियों की मिलने की रफ्तार पिछले वर्ष की अपेक्षा 40 प्रतिशत अधिक है। टीबी के रोगियों की मौत के आंकड़े में कमी लाने में स्वास्थ्य विभाग काफी हद तक कामयाब हुआ है।
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पिछले साल हर माह टीबी से नौ लोगों की मौत हो रही थी। इस वर्ष प्रति माह चार लोगों की टीबी से मौत हो रही है। इन नौ माह में टीबी से 40 लोगों की मौत हो चुकी है। यह पिछले साल के मुताबिक काफी कम है। पिछले साल टीबी से 112 लोगों की मौत हो गई थी। अब जिले में लगभग 5500 हजार लोग टीबी ग्रस्त हैं। इनमें से अधिकतर औद्योगिक क्षेत्रों में फैक्टि्रयों में काम करने वाले श्रमिक हैं। पिछले छह साल में टीबी से जिले में 720 लोगों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग ने जिले के 21 गांवों को टीबी मुक्त घोषित भी किया है।
जिले में इलाज की व्यवस्था-
- 01 जिला क्षय केंद्र
- 06 टीबी यूनिट (जांच व दवा)
- 12 माइक्रोस्कोपिक केंद्र (जांच केंद्र)
- 175 गांवों में ट्रीटमेंट सुपरवाइजर
वर्जन-
सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने बताया कि टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग गंभीरता से काम कर रहा है। टीबी का खतरा सबसे अधिक कॉलोनियों में है। जहां लोग बिना वेंटिलेशन के रहते हैं। वहां सबसे अधिक रोगी मिल रहे हैं। टीबी रोगियों की मौत का सबसे बड़ा कारण बीच में इलाज छोड़ना है। रोगियों से अपील है कि वह इलाज बीच में न छोड़ें। जिन लोगों को नियमित खांसी है। जिनका वजन गिर रहा हो और अधिक पसीना आ रहा हो, वह अपनी टीबी की जांच अवश्य करवाएं। संपन्न लोगों से अपील है कि वह टीबी रोगियों को गोद लेने के लिए आगे आएं।
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स्वास्थ्य विभाग के अध्ययन में सबसे अधिक टीबी रोगी फैक्ट्रियों के श्रमिक हैं, जो लेबर क्वार्टर में रहते हैं। लेबर क्वार्टर में हवा का वेंटिलेशन नहीं होता। खराब वेंटिलेशन वाले स्थानों पर हवा में 100 गुना ज्यादा सूक्ष्म कण पैदा हो सकते हैं। जिससे फेफड़ों में संक्रमण बढ़ जाता है। अगर यहां पर कोई टीबी रोगी है तो हवा की वेंटिलेशन न होने के कारण उसके परिवार के दूसरे सदस्य के भी टीबी के रोगी होने का खतरा बढ़ जाता है।
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इस साल टीबी के रोगी पिछले साल की अपेक्षा 40 प्रतिशत अधिक तेजी से बढ़ रहे हैं। 2023 में टीबी के 4475 रोगी मिले थे। इस साल एक जनवरी से 26 सितंबर तक टीबी के 4800 रोगी मिल चुके हैं। इस साल प्रति माह औसतन टीबी के 533 रोगी मिल रहे हैं। पिछले साल प्रति माह टीबी के रोगियों की मिलने की औसत 372 थी, यानि इस वर्ष टीबी के रोगियों की मिलने की रफ्तार पिछले वर्ष की अपेक्षा 40 प्रतिशत अधिक है। टीबी के रोगियों की मौत के आंकड़े में कमी लाने में स्वास्थ्य विभाग काफी हद तक कामयाब हुआ है।
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पिछले साल हर माह टीबी से नौ लोगों की मौत हो रही थी। इस वर्ष प्रति माह चार लोगों की टीबी से मौत हो रही है। इन नौ माह में टीबी से 40 लोगों की मौत हो चुकी है। यह पिछले साल के मुताबिक काफी कम है। पिछले साल टीबी से 112 लोगों की मौत हो गई थी। अब जिले में लगभग 5500 हजार लोग टीबी ग्रस्त हैं। इनमें से अधिकतर औद्योगिक क्षेत्रों में फैक्टि्रयों में काम करने वाले श्रमिक हैं। पिछले छह साल में टीबी से जिले में 720 लोगों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग ने जिले के 21 गांवों को टीबी मुक्त घोषित भी किया है।
जिले में इलाज की व्यवस्था-
- 01 जिला क्षय केंद्र
- 06 टीबी यूनिट (जांच व दवा)
- 12 माइक्रोस्कोपिक केंद्र (जांच केंद्र)
- 175 गांवों में ट्रीटमेंट सुपरवाइजर
वर्जन-
सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने बताया कि टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग गंभीरता से काम कर रहा है। टीबी का खतरा सबसे अधिक कॉलोनियों में है। जहां लोग बिना वेंटिलेशन के रहते हैं। वहां सबसे अधिक रोगी मिल रहे हैं। टीबी रोगियों की मौत का सबसे बड़ा कारण बीच में इलाज छोड़ना है। रोगियों से अपील है कि वह इलाज बीच में न छोड़ें। जिन लोगों को नियमित खांसी है। जिनका वजन गिर रहा हो और अधिक पसीना आ रहा हो, वह अपनी टीबी की जांच अवश्य करवाएं। संपन्न लोगों से अपील है कि वह टीबी रोगियों को गोद लेने के लिए आगे आएं।