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राम मंदिर के लिए तीन लाख से अधिक लोगों ने गंवाए प्राण: गोविंददेव गिरी
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पानीपत। अयोध्या में श्रीराम मंदिर को लेकर 78 बार संघर्ष हुआ। इस दौरान कारसेवकों समेत करीब तीन लाख से अधिक लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। लंबे समय तक चले संघर्ष के बाद उच्चतम न्यायालय से न्याय मिला, और भव्य मंदिर का निर्माण संभव हो सका।
ये बात श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरी महाराज ने सोमवार को पानीपत में कहीं। स्थानीय एसडी पीजी कॉलेज में प्रवचन के दौरान एक प्रश्न का उत्तर देते हुए उन्होंने श्रीराम मंदिर बनने के संघर्ष और प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के पलों को साझा किया। उन्होंने करीब दो घंटे शिक्षकों और विद्यार्थियों को सनातन का पाठ पढ़ाया।
स्वामी गोविंददेव ने कहा, न्यायालय से न्याय मिलने के बाद भी श्रीराम मंदिर निर्माण की राह में परेशानियां कम नहीं थी। जिस स्थान पर मंदिर बनना था वहां की जमीन रेतीली थी। नींव रखने के लिए पक्की जमीन नहीं मिल रही थी। तब रुड़की व कानपुर समेत देशभर की आईआईटी के विशेषज्ञों की राय ली गई। इसके बाद उच्च तकनीकी पर श्रीराम मंदिर बनाया गया।
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मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के पलों को याद करते हुए स्वामी गोविंददेव गिरी महाराज ने कहा, वह उनके जीवन के कुछ अलग ही पल थे। उन्होंने इस दिन को रामनवमी या एकादशी की तरह प्रतिष्ठा द्वादशी नाम दिया। उन्होंने उस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का व्रत खुलवाया। आमतौर पर चरणामृत हथेली पर लेकर धारण किया जाता है। स्वामी जी ने बताया, प्रधानमंत्री ने उन्हें चुपके से कहा कि आप पिला दें। वे उनको चरणामृत पिलाने लगे तो अचानक से उनके अंदर एक माता का वात्सल्य जागृत हुआ। उन्होंने प्रधानमंत्री को एक के बाद एक तीन चम्मच चरणामृत के पिलाए।
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मंदिर निर्माण के लिए 40 दिन में लक्ष्य से तीन गुना धन जुटाया
स्वामी गोविंददेव ने कहा, मंदिर निर्माण में कई कठिनाइयां भी आईं, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य को कभी कमजोर नहीं होने दिया। अदालत के फैसले के बाद राम मंदिर प्रोजेक्ट के लिए धन जुटाने के लिए 40 दिन तय किए। उन्होंने इस अवधि में प्रोजेक्ट की लागत से तीन गुना अधिक धन जुटा लिया था।
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ये बात श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरी महाराज ने सोमवार को पानीपत में कहीं। स्थानीय एसडी पीजी कॉलेज में प्रवचन के दौरान एक प्रश्न का उत्तर देते हुए उन्होंने श्रीराम मंदिर बनने के संघर्ष और प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के पलों को साझा किया। उन्होंने करीब दो घंटे शिक्षकों और विद्यार्थियों को सनातन का पाठ पढ़ाया।
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स्वामी गोविंददेव ने कहा, न्यायालय से न्याय मिलने के बाद भी श्रीराम मंदिर निर्माण की राह में परेशानियां कम नहीं थी। जिस स्थान पर मंदिर बनना था वहां की जमीन रेतीली थी। नींव रखने के लिए पक्की जमीन नहीं मिल रही थी। तब रुड़की व कानपुर समेत देशभर की आईआईटी के विशेषज्ञों की राय ली गई। इसके बाद उच्च तकनीकी पर श्रीराम मंदिर बनाया गया।
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मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के पलों को याद करते हुए स्वामी गोविंददेव गिरी महाराज ने कहा, वह उनके जीवन के कुछ अलग ही पल थे। उन्होंने इस दिन को रामनवमी या एकादशी की तरह प्रतिष्ठा द्वादशी नाम दिया। उन्होंने उस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का व्रत खुलवाया। आमतौर पर चरणामृत हथेली पर लेकर धारण किया जाता है। स्वामी जी ने बताया, प्रधानमंत्री ने उन्हें चुपके से कहा कि आप पिला दें। वे उनको चरणामृत पिलाने लगे तो अचानक से उनके अंदर एक माता का वात्सल्य जागृत हुआ। उन्होंने प्रधानमंत्री को एक के बाद एक तीन चम्मच चरणामृत के पिलाए।
मंदिर निर्माण के लिए 40 दिन में लक्ष्य से तीन गुना धन जुटाया
स्वामी गोविंददेव ने कहा, मंदिर निर्माण में कई कठिनाइयां भी आईं, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य को कभी कमजोर नहीं होने दिया। अदालत के फैसले के बाद राम मंदिर प्रोजेक्ट के लिए धन जुटाने के लिए 40 दिन तय किए। उन्होंने इस अवधि में प्रोजेक्ट की लागत से तीन गुना अधिक धन जुटा लिया था।