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Panipat News: साइकिलिंग में मोक्ष ने प्रदेश स्तर तक बनाई पहचान
Thu, 25 Jun 2026 02:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Thu, 25 Jun 2026 02:12 AM IST
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मोक्ष।
संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। जिले की गुरु तेग बहादुर कॉलोनी के मोक्ष साइकिलिंग में अपनी प्रतिभा की न केवल जिला बल्कि प्रदेश स्तर तक पहचान बना चुके हैं। मोक्ष ने अब तक अपनी साइकिलिंग में कई उपलब्धियां अपने नाम की हैं।
जिला स्तर पर उन्होंने 12 स्वर्ण पदक हासिल किए हैं। इसके बाद राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में छह स्वर्ण और दो रजत पदक जीतकर उन्होंने हरियाणा साइकिलिंग सर्किट में अपनी पहचान मजबूत की।
मोक्ष की सफलता का सिलसिला यहीं नहीं रुका। मोक्ष ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए चार कांस्य और एक रजत पदक अपने नाम किए। यह उपलब्धियां किसी छोटे खिलाड़ी के लिए बहुत बड़ी बात हैं।
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पिछले साल करनाल में आयोजित स्कूली स्टेट प्रतियोगिता में भाग लिया और अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से स्वर्ण पदक जीत लिया। इसके बाद मोक्ष का चयन हरियाणा ओलंपिक के लिए हुआ, जो कुरुक्षेत्र के शाहबाद में आयोजित की गई थी।
मोक्ष ने बताया कि बचपन के दिनों से ही उन्हें को साइकिल चलाने का शौक था। समय के साथ यह शौक एक लक्ष्य में बदल गया। छोटी उम्र में ही उन्होंने साइकिलिंग को गंभीरता से लेना शुरू किया और रोजाना अभ्यास करने लगे।
उनके मार्गदर्शन उनके पिता रविंद्र सिंह हैं। उनके पिता का मार्बल का व्यवसाय है और मां जसजीत गृहिणी हैं। मोक्ष इस समय बारहवीं कक्षा में पढ़ाई कर रहे हैं। उनके पिता ने सपनों को पूरा करने के लिए हरसंभव प्रयास किए। उनके पिता ही उनके पहले कोच हैं।
उन्होंने मोक्ष को न केवल मानसिक रूप से प्रोत्साहित किया बल्कि आर्थिक रूप से भी सहयोग दिया ताकि वह बिना किसी रुकावट के अपनी साइकिलिंग यात्रा जारी रख सके।
उनके पिता ने बताया कि मोक्ष बचपन में ही साइकिल चलाने में ज्यादा रुचि लेते थे तो मैंने मोक्ष के इस सफर में उसका साथ दिया और उन्हें यकीन है मोक्ष साइकिलिंग में देश का नाम जरूर रोशन करेंगे। सकें। मोक्ष का सपना आने वाले समय में भारत का प्रतिनिधित्व अंतरराष्ट्रीय साइकिलिंग प्रतियोगिताओं में करना है और देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है।
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पानीपत। जिले की गुरु तेग बहादुर कॉलोनी के मोक्ष साइकिलिंग में अपनी प्रतिभा की न केवल जिला बल्कि प्रदेश स्तर तक पहचान बना चुके हैं। मोक्ष ने अब तक अपनी साइकिलिंग में कई उपलब्धियां अपने नाम की हैं।
जिला स्तर पर उन्होंने 12 स्वर्ण पदक हासिल किए हैं। इसके बाद राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में छह स्वर्ण और दो रजत पदक जीतकर उन्होंने हरियाणा साइकिलिंग सर्किट में अपनी पहचान मजबूत की।
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मोक्ष की सफलता का सिलसिला यहीं नहीं रुका। मोक्ष ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए चार कांस्य और एक रजत पदक अपने नाम किए। यह उपलब्धियां किसी छोटे खिलाड़ी के लिए बहुत बड़ी बात हैं।
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पिछले साल करनाल में आयोजित स्कूली स्टेट प्रतियोगिता में भाग लिया और अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से स्वर्ण पदक जीत लिया। इसके बाद मोक्ष का चयन हरियाणा ओलंपिक के लिए हुआ, जो कुरुक्षेत्र के शाहबाद में आयोजित की गई थी।
मोक्ष ने बताया कि बचपन के दिनों से ही उन्हें को साइकिल चलाने का शौक था। समय के साथ यह शौक एक लक्ष्य में बदल गया। छोटी उम्र में ही उन्होंने साइकिलिंग को गंभीरता से लेना शुरू किया और रोजाना अभ्यास करने लगे।
उनके मार्गदर्शन उनके पिता रविंद्र सिंह हैं। उनके पिता का मार्बल का व्यवसाय है और मां जसजीत गृहिणी हैं। मोक्ष इस समय बारहवीं कक्षा में पढ़ाई कर रहे हैं। उनके पिता ने सपनों को पूरा करने के लिए हरसंभव प्रयास किए। उनके पिता ही उनके पहले कोच हैं।
उन्होंने मोक्ष को न केवल मानसिक रूप से प्रोत्साहित किया बल्कि आर्थिक रूप से भी सहयोग दिया ताकि वह बिना किसी रुकावट के अपनी साइकिलिंग यात्रा जारी रख सके।
उनके पिता ने बताया कि मोक्ष बचपन में ही साइकिल चलाने में ज्यादा रुचि लेते थे तो मैंने मोक्ष के इस सफर में उसका साथ दिया और उन्हें यकीन है मोक्ष साइकिलिंग में देश का नाम जरूर रोशन करेंगे। सकें। मोक्ष का सपना आने वाले समय में भारत का प्रतिनिधित्व अंतरराष्ट्रीय साइकिलिंग प्रतियोगिताओं में करना है और देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है।